100 करोड़ DSP शुक्ला: फर्जी केस, शेल कंपनियों का काला राज
100 करोड़ DSP शुक्ला की असलियत अब पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है। उत्तर प्रदेश पुलिस के तथाकथित ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ डीएसपी ऋषिकांत शुक्ला ने वर्दी को ढाल बनाकर अवैध संपत्ति का एक विशाल साम्राज्य खड़ा कर लिया। 1998 में सब-इंस्पेक्टर बनकर कानपुर आए शुक्ला 11 साल तक यहीं डटे रहे और इस दौरान 100 करोड़ से ज्यादा की बेनामी संपत्ति अर्जित कर ली।
एसआईटी की 266 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट में 12 प्राइम लोकेशन पर 92 करोड़ की प्रॉपर्टी का खुलासा हुआ है, जिसमें आर्यनगर में देवेंद्र दुबे के नाम पर 11 दुकानें (जिनके असल मालिक शुक्ला हैं), लखनऊ, फतेहपुर, इटावा और मैनपुरी में आलीशान फ्लैट और प्लॉट शामिल हैं।
इतना ही नहीं, तीन अनट्रेस्ड प्रॉपर्टी भी हैं, जिनके महत्वपूर्ण दस्तावेज़ गायब कर दिए गए हैं। ये सब संपत्ति ऋषिकांत शुक्ला ने दरोगा से डीएसपी बनते हुए सिर्फ कानपुर की पोस्टिंग के दौरान अर्जित की। अब विजिलेंस बैंक ट्रांजेक्शन, पैन लिंक और शेल कंपनियों की परत-दर-परत जांच कर रही है, जिसमें शुक्ला की पत्नी प्रभा से लेकर बेटे तक के नाम उजागर हो रहे हैं।
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फर्जी POCSO/रेप केस का सबसे बड़ा डीलर: ‘साकेत नगर दरबार’ का घिनौना खेल
ऋषिकांत शुक्ला ‘हीरो’ नहीं, बल्कि फर्जी बलात्कार और POCSO केस का सबसे बड़ा डीलर था। वह जेल में बंद वकील अखिलेश दुबे का ‘साकेत नगर दरबार’ चलाता था, जो वसूली का केंद्र था। इस गिरोह का सबसे घिनौना खेल यह था कि बिहार और झारखंड से ट्रैफिक की गईं गरीब लड़कियों को पैसे देकर ब्लैंक पेपर पर साइन करवाए जाते थे।
फिर इसी आधार पर व्यापारियों और राजनेताओं पर गैंगरेप के झूठे मुकदमे थोपे जाते थे। एसआईटी ने अब तक 54 रेप केस स्कैन किए हैं, जिनमें से आठ सीधे तौर पर दुबे-शुक्ला गैंग से जुड़े मिले हैं। इनमें एक भाजपा नेता पर फर्जी POCSO केस और एक होटल कारोबारी रवि सतिजा से करोड़ों की वसूली का मामला भी सामने आया है।
इस गठजोड़ में शुक्ला अपनी पुलिस शक्ति से केस दबाता था, जबकि दुबे कोर्ट में ‘सेटिंग’ करता था। वसूली की रकम आने के बाद दोनों 50-50 का बंटवारा करते थे।
‘शुक्ला कंस्ट्रक्शन’: काले धन को सफेद करने का ATM
काले धन को सफेद करने के लिए डीएसपी शुक्ला ने एक चतुर चाल चली। उन्होंने अपनी पत्नी प्रभा को डायरेक्टर बनाकर ‘शुक्ला कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की एक शेल कंपनी खड़ी कर दी। इस कंपनी में वकील दुबे का बेटा अखिल, भतीजा सात्विक, साथी सीओ विकास पांडेय का भाई प्रदीप, और संतोष सिंह का रिश्तेदार अशोक भी पार्टनर थे।
कंपनी का टर्नओवर 100 करोड़ रुपये तक दिखाया गया, मगर मजे की बात यह है कि इस कंपनी के पास न एक भी प्रोजेक्ट था, न मजदूर, और न ही कोई मशीनरी। यह कंपनी वास्तव में 100 करोड़ DSP शुक्ला के काले धन को सफेद करने का एक ‘एटीएम’ मात्र थी।
एसआईटी ने पाया कि आर्यनगर की 11 दुकानें देवेंद्र दुबे के नाम पर थीं, मगर उनका किराया सीधे शुक्ला के अकाउंट में जाता था। कानपुर में अकेले 33 शेल कंपनियां ऋषिकांत के बेटे के नाम पर रजिस्टर्ड पाई गई हैं।
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जमीन हड़पने से गोवा तक विस्तार: पुलिस-वकील-KDA गठजोड़
यह भ्रष्टाचार सिर्फ फर्जी मुकदमों तक सीमित नहीं था। यह गिरोह KDA अधिकारियों काश्यपकांत दुबे और महेंद्र सोलंकी से मिलकर जमीन हड़पना और बेनामी रजिस्ट्री करवाना जैसे अवैध कार्य भी चलाता था।
एसआईटी ने जांच में पाया कि ट्रांसफर होने के बाद भी शुक्ला, पांडेय और सिंह की तिकड़ी दुबे को रिमोट से चलाती रही, और इस अवैध कमाई से नोएडा से लेकर गोवा तक प्रॉपर्टी खरीदी गई।
शिकायतकर्ता सौरभ भदौरिया ने दावा किया है कि असल में 100 करोड़ DSP शुक्ला और उसके साथियों की संपत्ति 200 से 300 करोड़ रुपये तक हो सकती है। विजिलेंस अब विदेशी ट्रांजेक्शन की भी गहन जांच कर रही है।
शादी में शर्मनाक दिखावा: नाचते अफसर और रिसॉर्ट मालिक की बेबसी
जनता की गाढ़ी कमाई लूट कर डीएसपी शुक्ला ने मार्च 2025 में अपने बेटे की शादी कानपुर के ईटरनिटी रिसॉर्ट में की। इस शाही शादी में 200 से 250 करोड़ रुपये खर्च किए गए। बारात में ADG ज़ोन, SP और कई DSP नाचते हुए दिखाई दिए, यहाँ तक कि हेलिकॉप्टर से फूलों की वर्षा भी की गई।
कमाल की बात यह है कि रिसॉर्ट मालिक खुद दुबे गैंग का शिकार रहा था, जिसने बेबसी और मजबूरी में बुकिंग दी। मेहमानों में KDA अफसर और बिल्डर शामिल थे, और बताया जाता है कि उस शादी में शरीक होने वाले सबके चेहरे पर एक डर व्याप्त था।
एसआईटी को इस शादी का वीडियो मिला है, और अब उन नाचते अफसरों से पूछताछ होगी कि क्या वे अंधे थे या इस महाभ्रष्टाचार में हिस्सेदार? योगी सरकार की इस भयानक भ्रष्टाचार पर लगातार चुप्पी एक गंभीर सवाल खड़ा करती है।
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दोहरी न्याय व्यवस्था? सस्पेंडेड लक्जरी और सवालों के घेरे में कार्रवाई
योगी राज में ‘ऑपरेशन महाकाल’ के नाम पर मुख्य गुर्गे दुबे को तो जेल भेज दिया गया, मगर उसके पुलिसिया साथी अभी भी सस्पेंडेड लक्जरी में मौज कर रहे हैं। यह दोहरी न्याय व्यवस्था नहीं तो क्या है?
शुक्ला का निलंबन 3 नवंबर 2025 को हुआ और विजिलेंस जांच शुरू हुई, लेकिन सवाल यह है कि कहीं यह सब सिर्फ दिखावा तो नहीं? अब तक 100 करोड़ जब्त क्यों नहीं किया गया? DA एक्ट, BNS 318(4), POCSO मिसयूज और मनी लॉन्ड्रिंग के तहत गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई?
दुबे पर 5 केस और 1500 करोड़ का साम्राज्य होने के बावजूद वह जेल में छाती दर्द का ड्रामा कर रहा है, जबकि 100 करोड़ DSP शुक्ला अभी भी बाहर है। साथी सीओ विकास पांडेय (लखनऊ) और संतोष सिंह (हरदोई) को नोटिस दिया गया है, जबकि इंस्पेक्टर अशीष द्विवेदी फरार है।
विपक्ष का सवाल और जनता की मांग: कब होगी संपत्ति कुर्की और कड़ी सजा?
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सवाल उठाया है कि अगर एक डीएसपी 100 करोड़ लूट सकता है, तो ऊपर के DGP और ADG कितने हज़ार करोड़ लूट रहे होंगे? यह केस सिर्फ एक अफसर की लूट नहीं, बल्कि पूरी ‘खाकी’ की सड़ांध है। फर्जी POCSO से निर्दोषों की इज्जत लूटकर, पुलिस-वकील-KDA गठजोड़ ने समाज में ज़हर भर दिया है।
इनके भयानक अपराधों से कितने व्यापारी आत्महत्या कर चुके हैं, कितनी औरतें बदनामी से टूट चुकी हैं और कितने बच्चे अनाथ हो चुके हैं, इसका लेखा-जोखा कौन देगा? एसआईटी ने अभी तक 8 फर्जी केस पकड़े हैं, मगर सैकड़ों मामले अभी भी दबे पड़े हैं। बिहार-झारखंड से ट्रैफिकिंग के माध्यम से लाई गईं लड़कियां अब गवाह बन रही हैं, जिन्हें सुरक्षा देना अत्यंत आवश्यक है।
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जनता जागे: रामराज्य चाहिए तो भ्रष्ट खाकी को सलाखों के पीछे डालो
विजिलेंस अगर सचमुच ईमानदार है तो 30 दिन में चार्जशीट दाखिल करे, संपत्ति कुर्की करे और कड़ी से कड़ी सज़ा के लिए व्यापक सबूत इकट्ठा करके कोर्ट में प्रस्तुत करे। कानपुर के बिल्डर आज भी चुप हैं, क्योंकि उनमें अभी भी डर व्याप्त है। सोशल मीडिया पर 100CroreDSP ट्रेंड कर रहा है, मगर एक्शन अभी भी शून्य है और कार्रवाई मन्थर गति से बढ़ रही है।
कानून के रखवालों का यह हाल है, तो जनता न्याय के लिए कहाँ जाए? योगी सरकार अगर ‘रामराज्य’ लाना चाहती है तो 100 करोड़ DSP शुक्ला को तुरंत जेल भेजे, उसकी संपत्ति ज़ब्त करे और बेगुनाहों पर फर्जी POCSO बनाने वालों के विरुद्ध सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट बनाए जाएं।
जनता को जागना होगा, वरना खाकी का यह काला साम्राज्य हमें ही निगल जाएगा। भ्रष्ट खाकी को सलाखों के पीछे डालो, वरना न्याय सिर्फ न्यूज़ चैनलों की हेडलाइन में गुम होकर रह जाएगा!



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