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संभल दंगा: न्यायिक पैनल की रिपोर्ट ने खोला राज, योगी आदित्यनाथ का बयान

संभल दंगा योगी आदित्यनाथ बयान

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान शुक्रवार (29 अगस्त, 2025) को सामने आया, जिसमें उन्होंने कहा कि नवंबर 2024 में संभल में हुई हिंसा पर न्यायिक आयोग की रिपोर्ट ने शहर में दंगों की साजिश की पुष्टि कर दी है। मुख्यमंत्री ने इस हिंसा को पिछली सरकारों के दौरान हिंदुओं के खिलाफ हुई “लक्षित कार्रवाइयों” के इतिहास से जोड़ा। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब राज्य “तुष्टिकरण” से “संतोष” की ओर बढ़ रहा है, जहां किसी भी तरह के जनसांख्यिकीय बदलाव की कोई गुंजाइश नहीं है।

तीन सदस्यीय न्यायिक पैनल, जिसकी अध्यक्षता इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश देवेंद्र कुमार अरोड़ा ने की, ने गुरुवार को मुख्यमंत्री से मुलाकात कर 24 नवंबर को शाही जामा मस्जिद के पास एएसआई की निगरानी में हुए सर्वेक्षण के दौरान भड़की हिंसा पर अपनी 450 पृष्ठों की रिपोर्ट सौंपी। इस हिंसा में चार लोगों की जान चली गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे। सूत्रों के अनुसार, इस रिपोर्ट में संभल में तीव्र जनसांख्यिकीय बदलाव, हिंदुओं को निशाना बनाने की साजिश और अशांति में कट्टरपंथी समूहों और बाहरी दंगाइयों की भूमिका का भी उल्लेख है।

न्यायिक पैनल की रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे

लखनऊ में आयोजित विभिन्न विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास समारोह में बोलते हुए, योगी आदित्यनाथ का बयान आया कि न्यायिक आयोग ने गुरुवार को संभल घटना पर अपनी रिपोर्ट सौंपी है, जिसने 2024 में हुए दंगों की साजिश के कुछ हिस्सों का खुलासा किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 1947 के बाद से संभल में हर दंगे में हिंदुओं को लगातार मुख्य निशाना बनाया गया है और इस बार भी वे एक साजिश का केंद्र थे। रिपोर्ट में 1947 से अब तक हुए 15 दंगों का उल्लेख है।

रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि स्वतंत्रता के समय संभल नगरपालिका क्षेत्र की लगभग 45% आबादी हिंदुओं की थी, जो अब घटकर मात्र 15 से 20 प्रतिशत रह गई है। इन संदर्भों ने राजनीतिक बहस छेड़ दी है, जिसमें कांग्रेस और समाजवादी पार्टी दोनों ने सरकार पर इस रिपोर्ट का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए करने का आरोप लगाया है।

डबल इंजन सरकार की नीति और विपक्ष के आरोप

मुख्यमंत्री ने कहा, “समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के कार्यकाल में हिंदुओं को चुन-चुनकर निशाना बनाया गया, उनकी जनसांख्यिकी को कम किया गया, उन पर लगातार अत्याचार किए गए और दंगों के जरिए इलाकों को हिंदू-विहीन बनाया गया।” योगी आदित्यनाथ का बयान यह भी था कि “आज डबल इंजन वाली सरकार है, जो जनसांख्यिकी को बदलने नहीं देगी। जो भी जनसांख्यिकी बदलने की हिम्मत करेगा, उसे पलायन करने पर मजबूर होना पड़ेगा क्योंकि अब हर नागरिक को बिना किसी भेदभाव के सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है।”

विपक्ष ने इस रिपोर्ट को चुनिंदा रूप से लीक करने पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता शाहनवाज आलम ने कहा कि हिंदुओं की जनसांख्यिकीय गिरावट और समुदाय-आधारित विभाजन के बारे में सामने आ रहे विवरण “अविश्वास पैदा करने के उद्देश्य से प्रतीत होते हैं।” समाजवादी पार्टी ने भी आरोप लगाया कि इस विवाद का इस्तेमाल बेरोजगारी और कृषि संबंधी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए किया जा रहा है।

संभल हिंसा का घटनाक्रम और वर्तमान स्थिति

संभल विवाद पिछले साल 19 नवंबर का है, जब हिंदू याचिकाकर्ताओं ने जिला अदालत में एक मुकदमा दायर किया, जिसमें दावा किया गया कि शाही जामा मस्जिद एक मंदिर पर बनी थी। उसी दिन और फिर 24 नवंबर को अदालत के आदेश पर सर्वेक्षण किया गया। दूसरे सर्वेक्षण के दौरान हिंसा भड़क उठी, जिसके परिणामस्वरूप चार लोगों की मौत हुई और 29 पुलिसकर्मी घायल हुए। पुलिस ने 96 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें समाजवादी पार्टी के विधायक जियाउर्रहमान बर्क भी शामिल थे। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत में मुकदमे की कार्यवाही पर रोक लगा दी है।

न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में पुलिस की कार्रवाई को एक “नरसंहार” रोकने का श्रेय दिया गया है और कहा गया है कि दंगाइयों को बाहर से लाया गया था। सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी अरविंद कुमार जैन, जो आयोग के सदस्य थे, ने कहा कि रिपोर्ट सरकार की मंजूरी के बाद ही सार्वजनिक की जाएगी।

योगी आदित्यनाथ का बयान और इस रिपोर्ट के निष्कर्षों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया अध्याय खोल दिया है, जिसमें सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। सरकार ने इस रिपोर्ट को विचार के लिए कैबिनेट के समक्ष रखने की बात कही है।

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