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उपराष्ट्रपति धनखड़ ने सरकारी आवास खाली किया पद छोड़ने के 6 हफ्ते बाद

उपराष्ट्रपति ने आवास खाली किया

नई दिल्ली स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने वाले पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 6 सप्ताह बाद अपना सरकारी आवास खाली कर दिया है। यह कदम उनके अचानक लिए गए इस्तीफे के बाद उठाया गया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी थी। अब वह दक्षिण दिल्ली के छतरपुर एन्क्लेव में एक निजी फार्महाउस में रहने चले गए हैं, जो इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) प्रमुख अभय सिंह चौटाला का है। यह आवास एक अंतरिम व्यवस्था है, जब तक कि उन्हें पूर्व उपराष्ट्रपति के रूप में टाइप-VIII का आधिकारिक आवास आवंटित नहीं किया जाता।

अचानक इस्तीफा और उसके बाद का घटनाक्रम

74 वर्षीय जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई को मानसून सत्र के पहले दिन अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने अपने त्यागपत्र में स्वास्थ्य सेवा को प्राथमिकता देने की बात कही थी, लेकिन उनके अचानक इस्तीफे से कई विपक्षी नेताओं ने मतभेद का दावा करते हुए सवाल उठाए। इस्तीफे के बाद से, धनखड़ जनता की नज़रों से दूर रहे और राष्ट्रीय राजधानी स्थित उपराष्ट्रपति एन्क्लेव में रह रहे थे, जिसमें आधिकारिक आवास और कार्यालय शामिल हैं। यह एन्क्लेव सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत बनाया गया था। वह पिछले साल अप्रैल में इस आवास में शिफ्ट हुए थे और लगभग 15 महीने तक यहां रहे।

एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि उपराष्ट्रपति आवास खाली करना उनके लिए एक मजबूरी भी थी क्योंकि अगले उपराष्ट्रपति का चुनाव 9 सितंबर को होना है। उनके उत्तराधिकारी के चयन के लिए होने वाले इस चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार और महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन का मुकाबला विपक्ष के उम्मीदवार और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी से होगा।

चौटाला के फार्महाउस में क्यों?

धनखड़ के चौटाला परिवार से रिश्ते लगभग 40 साल पुराने हैं। 1989 में, अभय के दादा देवीलाल – जो उस समय मुख्यमंत्री थे राजस्थान के उस समय के युवा वकील धनखड़ में एक संभावित नेता देखा। धनखड़, जो स्वयं भी एक जाट थे, हमेशा जाट नेता देवीलाल को अपना ‘गुरु’ कहते थे। 1989 के लोकसभा चुनाव में, देवीलाल ने उन्हें झुंझुनू लोकसभा सीट से जनता दल का टिकट दिया था। जब देवीलाल उप-प्रधानमंत्री बने, तो धनखड़ को केंद्रीय राज्य मंत्री (संसदीय कार्य) बनाया गया।

चौटाला ने इस कदम की पुष्टि करते हुए कहा कि उनके पुराने पारिवारिक संबंध हैं और धनखड़ ने उनसे घर नहीं मांगा था, बल्कि उन्होंने खुद उन्हें घर देने की पेशकश की थी। यह पारिवारिक संबंध ही इस अस्थायी व्यवस्था का कारण बना।

व्यस्तता और भविष्य की योजनाएं

सूत्रों के अनुसार, इस्तीफा देने के बाद से धनखड़ अपने परिवार के साथ समय बिता रहे हैं, टेबल टेनिस खेल रहे हैं और योग का अभ्यास कर रहे हैं। इस्तीफे के बाद वह पहली बार 1 सितंबर को अपने आधिकारिक आवास से बाहर निकले, जब वह दांतों की जांच के लिए धौला कुआं स्थित सेना के रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल गए। एक सूत्र ने बताया कि पिछले एक महीने से वह अपने आवास के अंदर ही टहल रहे थे और रिश्तेदारों व पुराने दोस्तों से मिल रहे थे।

साथ ही, उन्होंने राजस्थान में पूर्व विधायक के रूप में अपनी पेंशन के लिए भी आवेदन किया है। वह 1993 से 1998 तक किशनगढ़ से कांग्रेस के विधायक रहे थे और 2019 तक पेंशन प्राप्त करते थे। इसके बाद उन्हें पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया, जिसके बाद पेंशन बंद हो गई थी। 74 वर्षीय धनखड़ को चिकित्सा देखभाल और यात्रा भत्ते जैसी सुविधाओं के अलावा 42,000 रुपये प्रति माह पेंशन मिलती है, जो पूर्व उपराष्ट्रपति और पूर्व सांसद के तौर पर मिलने वाली पेंशन के अतिरिक्त होगी।

इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एएनआई को बताया कि धनखड़ ने केवल स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया है और इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। धनखड़, एम. वेंकैया नायडू के बाद देश के इतिहास में तीसरे ऐसे उपराष्ट्रपति हैं जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा करने से पहले ही इस्तीफा दिया। उनसे पहले वीवी गिरि और आर. वेंकटरमन ने राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के कारण कार्यकाल के बीच में ही पद छोड़ा था।

उपराष्ट्रपति आवास खाली करना और एक निजी फार्महाउस में जाना उनके जीवन का एक नया अध्याय है। सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें ज़ेड-प्लस सुरक्षा जारी रखने का फैसला किया है। दिल्ली पुलिस ने भी अपने स्थानीय बीट स्टाफ को सतर्क रहने के लिए कहा है। यह कदम उनके सार्वजनिक जीवन से कुछ समय के लिए दूरी बनाने की इच्छा को दर्शाता है। यह एक ऐसी घटना है जब एक पूर्व उपराष्ट्रपति को उपराष्ट्रपति आवास खाली करना पड़ा है।

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