राजेश याबाजी का बयान बेंगलुरु के इंफ्रास्ट्रक्चर पर बहस का केंद्र बन गया है।
राजेश याबाजी का बयान बेंगलुरु के आईटी और इंफ्रास्ट्रक्चर परिदृश्य पर एक बड़ा मुद्दा बन गया है। ऑनलाइन ट्रकिंग प्लेटफॉर्म ब्लैकबक ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि वे बेंगलुरु से बाहर नहीं जा रहे हैं, जैसा कि कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था। कंपनी ने यह साफ कर दिया है कि वे केवल कर्मचारियों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए शहर के भीतर ही अपना कार्यालय बदल रहे हैं।
कंपनी के सीईओ राजेश याबाजी ने कहा कि बेंगलुरु ने उन्हें विकसित होने के लिए सभी आवश्यक संसाधन दिए हैं, और वे इस शहर के तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि बेंगलुरु उनके लिए घर है और वे यहीं रहेंगे।
ब्लैकबक ने यह निर्णय आवाजाही और सड़क संबंधी समस्याओं के कारण लिया है। कंपनी का कहना है कि अगले पांच वर्षों में सड़कों में कोई खास सुधार नहीं दिख रहा है, और कर्मचारियों का औसत आवागमन 1.5 घंटे से अधिक हो गया है। याबाजी के इस बयान ने बेंगलुरु के उद्योगपतियों को सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने का आग्रह करने के लिए प्रेरित किया।
पूर्व इंफोसिस सीएफओ मोहनदास पई और बायोकॉन की चेयरपर्सन किरण मजूमदार-शॉ जैसे उद्योग जगत के दिग्गजों ने कर्नाटक सरकार से इस मामले में तत्काल कदम उठाने का आह्वान किया।
सीईओ के बयान से उपजा विवाद और ब्लैकबक का स्पष्टीकरण
16 सितंबर को, ब्लैकबक के सह-संस्थापक राजेश याबाजी ने अपने बेलंदूर कार्यालय को छोड़ने की घोषणा की, जो बेंगलुरु के आउटर रिंग रोड (ओआरआर) पर स्थित है। उन्होंने इसके लिए आवाजाही और सड़क के बुनियादी ढांचे की समस्याओं का हवाला दिया।
याबाजी के इस बयान ने बेंगलुरु के प्रशासन के खिलाफ बड़े पैमाने पर बहस और आलोचना को जन्म दिया। इसके बाद, उद्योग जगत के दिग्गजों ने कर्नाटक सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।
इस विवाद के बाद, ब्लैकबक ने कुछ मीडिया संस्थानों द्वारा किए गए दावों का खंडन किया, जिनमें कहा गया था कि वे शहर से बाहर जाने पर विचार कर रहे हैं। कंपनी ने स्पष्ट किया कि वे सिर्फ शहर के भीतर ही एक अलग स्थान पर जा रहे हैं। ब्लैकबक ने 2015 में कोरमंगला में एक छोटे कार्यालय से शुरुआत की थी और 2016 में बड़े कार्यालय के लिए बेलंदूर आउटर रिंग रोड में स्थानांतरित हुई।
कंपनी का कहना है कि पिछले एक दशक में वह कर्नाटक की तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र की लाभार्थी रही है। राजेश याबाजी का बयान ने यह स्पष्ट कर दिया कि कंपनी बेंगलुरु के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखेगी।
आंध्र प्रदेश के आईटी मंत्री का आमंत्रण और कर्नाटक के मुख्यमंत्री का बयान
याबाजी के शुरुआती बयान के बाद, आंध्र प्रदेश के आईटी मंत्री नारा लोकेश ने ब्लैकबक को विशाखापत्तनम में अपना कारोबार स्थानांतरित करने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने अपनी पोस्ट में विशाखापत्तनम को भारत के शीर्ष 5 सबसे स्वच्छ और महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित शहरों में से एक बताया।
दूसरी ओर, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि सरकार को किसी भी कंपनी द्वारा “धमकाया या ब्लैकमेल” नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर कंपनियां संतुष्ट नहीं हैं तो वे उन्हें नहीं रोकेंगे। हालांकि, ब्लैकबक ने दोहराया है कि उनके संचालन का एक बड़ा हिस्सा अभी भी ओआरआर पर ही जारी रहेगा।
वे सुचारू व्यावसायिक संचालन के लिए बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए संबंधित अधिकारियों से मदद मांगते रहेंगे।
भविष्य की योजनाएं और ब्लैकबक की प्रतिबद्धता
ब्लैकबक ने एक बयान में कहा कि वे शहर से बाहर नहीं जा रहे हैं, बल्कि कर्मचारियों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए सिर्फ बेंगलुरु में ही अपनी जगह बदल रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे न केवल बेंगलुरु शहर में बने रहेंगे, बल्कि यहां अपनी उपस्थिति का विस्तार भी करेंगे।
कंपनी ने कहा कि वे अपनी समस्याओं को संबंधित सरकारी अधिकारियों तक पहुंचाने और उनके समाधान के लिए समर्थन प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। राजेश याबाजी का बयान ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि बेंगलुरु उनके लिए घर है और वे ओआरआर और कर्नाटक राज्य को उनके विकास का श्रेय देते हैं।
राजेश याबाजी का बयान ने बेंगलुरु की ट्रैफिक समस्या और शहरी बुनियादी ढांचे पर एक नई बहस छेड़ दी है, जिसमें सरकार और उद्योग जगत दोनों को अपनी भूमिका पर सोचने पर मजबूर किया है।



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