महाराष्ट्र सरकार की योजना: ‘लड़की बहन’ में ई-केवाईसी अनिवार्य,
महाराष्ट्र सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री माझी लड़की बहन योजना‘ में महाराष्ट्र सरकार की योजना एक बड़ा बदलाव किया है, जिससे अब यह योजना अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनेगी। हाल ही में यह खुलासा हुआ कि योजना में 26 लाख से ज़्यादा फर्जी लाभार्थी शामिल थे, जिनमें कई पुरुष भी थे।
इस धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के लिए, सरकार ने सभी लाभार्थियों के लिए ई-केवाईसी (E-KYC) अनिवार्य कर दिया है। महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने गुरुवार को बताया कि इस संबंध में एक सरकारी प्रस्ताव (जीआर) भी जारी किया गया है।
योजना के सभी लाभार्थियों को अगले दो महीनों के भीतर वेब पोर्टल ladakibahin.maharashtra.gov.in पर अपना ई-केवाईसी कराना होगा। ऐसा न करने पर उनकी मासिक सहायता राशि रोक दी जाएगी।
इतना ही नहीं, जो अपात्र पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। यह नया कदम योजना की विश्वसनीयता को बहाल करने और यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि केवल पात्र महिलाओं को ही इसका लाभ मिले।
क्या है मुख्यमंत्री माझी लड़की बहन योजना?
जुलाई 2024 में शुरू की गई यह योजना महाराष्ट्र की जरूरतमंद महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। इस योजना के तहत, 21 से 65 वर्ष की उन महिलाओं को हर महीने ₹1,500 की सहायता राशि दी जाती है, जिनकी वार्षिक पारिवारिक आय ₹2.5 लाख से अधिक नहीं है और जो किसी अन्य सरकारी योजना का लाभ नहीं ले रही हैं।
मौजूदा समय में, इस योजना से 2.25 करोड़ से ज़्यादा महिलाएं जुड़ी हुई हैं। सरकार हर महीने इन लाभार्थियों पर ₹3,800 करोड़ खर्च करती है। यह महाराष्ट्र सरकार की योजना महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही थी, लेकिन फर्जी प्रविष्टियों ने इसकी साख पर सवाल उठा दिए थे।
ई-केवाईसी क्यों है ज़रूरी? फर्जीवाड़े की चौंकाने वाली कहानी
दरअसल, जब यह योजना पिछले साल शुरू की गई थी, तब लाभार्थियों के सत्यापन पर ज़्यादा ध्यान नहीं दिया गया था। आवेदकों से केवल स्व-घोषणा पत्र लिया गया था। इसी का फायदा उठाकर 26.34 लाख अपात्र लोगों ने भी इस योजना का लाभ लेना शुरू कर दिया था।
इनमें पुरुष और सरकारी कर्मचारी जैसे लोग भी शामिल थे। राज्य सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने अगस्त में इन अपात्र लाभार्थियों की सूची सौंपी, जिसके बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने जांच शुरू की।
यह फर्जीवाड़ा इतना व्यापक था कि इसके आंकड़े चौंकाने वाले हैं। सबसे ज़्यादा फर्जी प्रविष्टियां उप-मुख्यमंत्री अजित पवार के गृह जिले पुणे में पाई गईं (2.04 लाख)। वहीं, उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के जिले ठाणे में 1.25 लाख फर्जी प्रविष्टियां दर्ज की गईं।
इसके अलावा, नासिक में 1.86 लाख, अहमदनगर में 1.25 लाख, छत्रपति संभाजीनगर में 1.04 लाख और सोलापुर में भी 1.04 लाख अपात्र लाभार्थी पाए गए। सरकार ने अब आधार-आधारित प्रमाणीकरण को अनिवार्य कर दिया है ताकि इस तरह के घोटालों को रोका जा सके।
‘मुख्यमंत्री लड़की बहन’ योजना के लिए ई-केवाईसी कैसे करें?
ई-केवाईसी की प्रक्रिया को सरल और सुविधाजनक बनाया गया है ताकि सभी लाभार्थी इसे आसानी से पूरा कर सकें। महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में भी इस बात पर जोर दिया है। महाराष्ट्र सरकार की योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण है।
यहाँ चरण-दर-चरण प्रक्रिया दी गई है:
सबसे पहले, आपको मुख्यमंत्री लड़की बहन योजना की आधिकारिक वेबसाइट ladakibahin.maharashtra.gov.in पर जाना होगा।वेबसाइट के होमपेज पर, आपको “ई-केवाईसी” का विकल्प मिलेगा, जिस पर क्लिक करें।
अब, आपको अपना नाम, पता, राशन कार्ड नंबर, आय की जानकारी और आधार कार्ड की जानकारी जैसे सभी आवश्यक दस्तावेज दोबारा अपलोड करने होंगे।जानकारी भरने के बाद, ई-केवाईसी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए “सबमिट” बटन पर क्लिक करें।
यह प्रक्रिया पूरी करने के बाद, आपका सत्यापन हो जाएगा और आप योजना का लाभ लेना जारी रख पाएंगी। जीआर के अनुसार, अब हर साल जून के महीने में सभी लाभार्थियों को अपना ई-केवाईसी अपडेट करना होगा।
भविष्य की योजनाएं और फडणवीस का बयान
हाल ही में, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया था कि राज्य सरकार इस लोकप्रिय योजना को बंद नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने ऐसी अफवाहें फैलाई हैं कि यह योजना बंद हो जाएगी, लेकिन बहनों को उन पर विश्वास नहीं करना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार सिर्फ ₹1,500 की मासिक सहायता तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ‘लखपति दीदी’ बनाने की योजना पर भी काम कर रही है। इसका उद्देश्य महिलाओं को स्व-रोजगार के अवसर प्रदान करना है, ताकि वे हर साल ₹1 लाख या उससे ज़्यादा कमा सकें।
इस महाराष्ट्र सरकार की योजना के तहत, गाँवों में महिलाओं के नेतृत्व वाली क्रेडिट सोसाइटी शुरू की जा रही हैं और महिलाओं को ₹1 लाख का ब्याज-मुक्त ऋण भी दिया जा रहा है। फडणवीस ने कहा कि सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि हर गाँव को केंद्र और राज्य की योजनाओं का लाभ मिले ताकि महाराष्ट्र समृद्ध हो सके।



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