“राहुल गांधी को धमकी: बीजेपी की हिंसक राजनीति का काला अध्याय”
बीजेपी की हिंसक राजनीति भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 26 सितंबर 2025 की रात एक काला अध्याय जुड़ गया, जब न्यूज़18 केरल चैनल पर लद्दाख हिंसा पर बहस के दौरान बीजेपी के पैनलिस्ट और पूर्व एबीवीपी नेता प्रिंटू महादेव ने लोकसभा विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ खुलेआम जान से मारने की धमकी दे डाली।
उसने कहा, “राहुल गांधी को सीने में गोली मार दी जाएगी।” यह बयान बहस की तपिश में निकला कोई अनियोजित शब्द नहीं था, न ही कोई अतिशयोक्ति। यह था एक ठंडे दिमाग से सोचा-समझा हिंसा का आह्वान, जो टीवी स्क्रीन पर लाइव प्रसारित होकर पूरे देश के जन मानस को झकझोर गया।
यह घटना न केवल राजनीतिक असभ्यता की हदें पार करती है, बल्कि साबित करती है कि सत्ता की कुर्सी पर बैठे लोग विपक्ष को कुचलने के लिए अब हथियारों/असलहों की भाषा बोलने लगे हैं।
धमकी पर गहराती साजिश: क्या यह पार्टी लाइन है?
प्रिंटू महादेव जैसे बीजेपी के ‘प्रवक्ता’ का यह बयान पार्टी की उस पुरानी प्रवृत्ति का आईना है, जो असहमति को हमेशा हिंसा से खत्म करने की कोशिश करती रही है। एबीवीपी से आरएसएस तक की पृष्ठभूमि वाला यह व्यक्ति महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे का अनुयायी होने का दावा करता है, और उसकी धमकी गांधी परिवार के खिलाफ बीजेपी-आरएसएस की ऐतिहासिक दुश्मनी को ताजा कर देती है।
राहुल गांधी, जिन्होंने अपने पिता राजीव गांधी और दादी इंदिरा गांधी की हत्याओं का मर्मस्पर्शी दर्द झेला है, को ऐसी धमकी देना न केवल व्यक्तिगत हमला है, बल्कि पूरे विपक्ष पर एक सुनियोजित साजिश का संकेत है। बीजेपी की हिंसक राजनीति असल में कायरता है, जब इनके पास तर्क खत्म हो जाते हैं, तो इनकी गोली की भाषा शुरू हो जाती है।
केरल से दिल्ली तक राजनीतिक संग्राम: ‘अपवित्र गठबंधन’ के आरोप
इस घिनौने बयान के बाद केरल कांग्रेस ने तुरंत कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने प्रिंटू महादेव की गिरफ्तारी की मांग की और इसे ‘मौत की धमकी’ करार दिया। वी.डी. सतीशियन जैसे नेता ने इसे ‘गोडसे की विचारधारा का जहर’ बताते हुए केरल सरकार पर निष्क्रियता का आरोप लगाया, जो बीजेपी और सीपीआई(एम) के बीच गुप्त सांठगांठ को उजागर करता है।
कांग्रेसी नेता रमेश चेनिथला ने इसे ‘अपवित्र गठबंधन’ कहा। वहीं, केंद्रीय स्तर पर के.सी. वेणुगोपाल ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई की मांग की। लेकिन यह निंदा सिर्फ शब्दों तक सीमित न रहे, क्योंकि यह एक आंदोलन का बीज है, जो बीजेपी की हिंसक राजनीति को उखाड़ फेंकेगा।
मीडिया की भूमिका और कानून व्यवस्था पर सवाल
मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाला न्यूज़18 केरल जैसे चैनल ने इस बहस को होस्ट किया, लेकिन क्या वे ऐसी हिंसक टिप्पणियों के लिए तैयार थे? लाइव डिबेट में धमकी प्रसारित होने के बाद चैनल की चुप्पी शर्मनाक है। क्या यह ‘ट्रपी रेटिंग्स‘ के चक्कर में लोकतंत्र की हत्या का साथ देना है?
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद ही हंगामा मचा, लेकिन मीडिया हाउस की जिम्मेदारी क्या सिर्फ सनसनी फैलाना है? प्रिंटू महादेव का बयान मलयालम में था, लेकिन इसका असर राष्ट्रीय है। मीडिया को अब आत्ममंथन करना होगा कि वे हिंसा के प्रचारक बन रहे हैं या लोकतंत्र के रक्षक।
यह धमकी केवल शब्द नहीं, बल्कि बीएनएस की धारा 353 (आपराधिक धमकी) और धारा 196 (सामुदायिक वैमनस्य फैलाने) के तहत अपराध है। सीआरपीएफ ने राहुल गांधी की सुरक्षा पर पहले ही कई खतरे के पत्र लिखे हैं, और यह घटना उन चेतावनियों को साकार करती है।
सामाजिक रूप से, यह धमकी युवाओं को हिंसा की ओर धकेलता है, खासकर जब सोशल मीडिया पर ऐसे पोस्ट वायरल हो रहे हैं, जहां यूजर्स इसे ‘गम्भीर मामला‘ बता रहे हैं। केरल पुलिस की निष्क्रियता न केवल कानून व्यवस्था को कमजोर करती है, बल्कि पूरे समाज में भय का माहौल पैदा करती है। क्या हम एक ऐसे भारत की ओर बढ़ रहे हैं, जहां असहमति मौत का फरमान बन जाए?
प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की चुप्पी: साजिश या सहमति?
अमित शाह और नरेंद्र मोदी की चुप्पी इस घटना का सबसे बड़ा रहस्य है। प्रिंटू महादेव बीजेपी का आधिकारिक पैनलिस्ट था, इसलिए यह साबित होता है कि राहुल गांधी को दी गई यह धमकी पार्टी लाइन है। वेणुगोपाल ने इसे ‘सुनियोजित साजिश’ कहा, जो सोशल मीडिया पर बीजेपी से जुड़े अकाउंट्स से आने वाली धमकियों का हिस्सा लगता है।
जब विपक्ष चुनाव आयोग पर ‘वोट चोरी‘ का आरोप लगाता है, तो बीजेपी की हिंसक राजनीति हमेशा व्यक्तिगत हमले होती है, लेकिन मौत की धमकी? यह सत्ता का नशा है, जो अब खुलेआम हत्या का न्योता दे रहा है। यह तो आतंकवाद है, बीजेपी को स्पष्ट करना होगा: क्या वे गोडसे की विचारधारा को पूरी तरह अपना चुके हैं?
यह घटना भारतीय लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है। अगर विपक्ष के नेता को खुलेआम टीवी पर गोली मारने की धमकी दी जा सकती है, तो आम नागरिक की क्या बिसात? राहुल गांधी जैसे योद्धा नहीं झुकेंगे, यह देश जानता है, लेकिन भारतीय समाज को जागना होगा।
कांग्रेस को कानूनी लड़ाई तेज करनी चाहिए, और भाजपाई हिंसा के विरोध के लिए नागरिकों को सड़कों पर उतरना होगा। यह समय है कि हम हिंसा की इस चक्रव्यूह को तोड़ें, वरना मोदी-शाह का ‘नया भारत’ खून से रंगा होगा। उठो भारत, अपनी आवाज बचाओ, आज राहुल गांधी को गोली मारने की धमकी दी गई, कल तुम्हारी बारी हो सकती है।



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