दिल्ली में दिवाली पर सख्त नियम लागू, दिवाली पटाखा पर प्रतिबंध
दिवाली पटाखा प्रतिबंध दिल्ली पुलिस दिवाली समारोह के लिए सख्त नियम लागू कर रही है, जिसके तहत केवल पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) द्वारा अनुमोदित हरित पटाखों के लिए ही अस्थायी लाइसेंस जारी किए जाएंगे। नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त दंड का प्रावधान है।
किसी भी उल्लंघन की स्थिति में तत्काल कार्रवाई के लिए अतिरिक्त पुलिस बल और प्रवर्तन दल तैनात किए जाएंगे, जहाँ पटाखों के अवैध स्टॉक को जब्त किया जाएगा और उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली-एनसीआर में हरित पटाखों की बिक्री और फोड़ने की अनुमति देते हुए स्पष्ट किया है कि यह छूट ‘परीक्षण के आधार पर’ है और यह सख्त प्रवर्तन और पर्यावरण निगरानी के अधीन रहेगी। समाचार एजेंसी पीटीआई ने बुधवार को अधिकारियों के हवाले से बताया कि दिल्ली पुलिस सहित कई एजेंसियों की गश्ती टीमें यह सुनिश्चित करेंगी कि केवल नीरी (राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान) और PESO द्वारा अनुमोदित क्यूआर कोड वाले हरित पटाखे ही निर्धारित दिनों और समय पर फोड़े जाएँ।
लाइसेंस और स्टॉक वापसी की समय-सीमा
सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस को समय पर तैयारी सुनिश्चित करते हुए दो दिनों के लिए अस्थायी बिक्री लाइसेंस आवेदनों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों ने बताया कि दिवाली के बाद, खुदरा विक्रेताओं को बिना बिके स्टॉक को वापस करने या सुरक्षित रूप से निपटाने के लिए दो दिन का समय दिया जाएगा, ताकि प्रतिबंध तुरंत बहाल किए जा सकें।
रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी में लगभग 140 PESO प्रमाणित खुदरा विक्रेताओं को दिवाली के लिए पटाखे बेचने के अस्थायी लाइसेंस जारी किए जाएंगे।
दिल्ली सरकार ने पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा की अध्यक्षता में प्रवर्तन एजेंसियों और हितधारकों के साथ अदालती दिशानिर्देशों के कार्यान्वयन पर चर्चा करने के लिए कई उच्च-स्तरीय बैठकें भी की हैं।
पीटीआई ने सिरसा के हवाले से कहा, “हमें आपकी मदद की ज़रूरत है क्योंकि केवल क्यूआर कोड वाले हरे पटाखों की अनुमति होगी और निर्माताओं को इस निर्देश का पालन करना होगा। जिन पटाखों में क्यूआर कोड नहीं होगा, उन्हें ज़ब्त कर लिया जाएगा और उनके लाइसेंस निलंबित कर दिए जाएँगे।”
क्या अनुमति है और क्या प्रतिबंधित
दिवाली पटाखा प्रतिबंध के बीच, नागरिकों के लिए यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि इस उत्सव पर किन गतिविधियों की अनुमति है और किन पर सख्त रोक है।
क्या अनुमति है (What is Allowed):
हरे पटाखों की बिक्री केवल 18 से 20 अक्टूबर तक की अनुमति है।दिवाली के दो दिन, यानी 19 और 20 अक्टूबर को, पटाखे केवल सुबह 6 बजे से 7 बजे के बीच और रात 8 बजे से 10 बजे के बीच ही फोड़े जाने चाहिए।
NEERI द्वारा अनुमोदित ‘ग्रीन पटाखे’, जो 30% न्यूनतम कण और गैस उत्सर्जित करते हैं, की बिक्री, खरीद या उपयोग की अनुमति है।केवल नवीनीकृत या अस्थायी रूप से पुनर्मान्य लाइसेंस वाले व्यापारियों को ही पटाखे बेचने की अनुमति होगी।
क्या प्रतिबंधित है (What is Prohibited):
पारंपरिक या उच्च उत्सर्जन वाले पटाखे, और बेरियम और सीरीज़ या ‘लड़ी’ पटाखे युक्त पटाखों की अनुमति नहीं होगी। इसके अतिरिक्त, सभी स्वीकृत ग्रीन पटाखों पर क्यूआर कोड होना अनिवार्य होगा।अनुमत समय के बाहर पटाखे फोड़ने की अनुमति नहीं है।गैर-प्रमाणित पटाखे बेचने वाली दुकानें लाइसेंस निलंबित होने के साथ बंद हो जाएँगी।
दिल्ली-एनसीआर के बाहर से खरीदे गए पटाखों की अनुमति नहीं होगी।अमेज़न, फ्लिपकार्ट या किसी अन्य ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऑनलाइन खरीदे गए पटाखों की अनुमति नहीं है।बिना लाइसेंस के सड़क किनारे पटाखों की बिक्री की अनुमति नहीं है।दिवाली पटाखा प्रतिबंध के तहत, हरित पटाखों के उपयोग पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाएगा।
दिशानिर्देशों का सख्त प्रवर्तन
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस द्वारा सघन पैदल गश्त और अनधिकृत एवं प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री की जाँच के माध्यम से हरित पटाखों के उपयोग पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाएगा। दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण अधिकारियों की संयुक्त टीमें दिशानिर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करेंगी।
PESO को विभिन्न बिक्री केंद्रों का औचक निरीक्षण करने और नमूना परीक्षण करने का भी निर्देश दिया गया है। आने वाले दिनों में आवासीय और बाजार क्षेत्रों में गतिविधियों पर नज़र रखने और किसी भी उल्लंघन की स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल और प्रवर्तन दल तैनात किए जाएँगे। पटाखों के अवैध स्टॉक को जब्त किया जाएगा और उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: परंपरा और पर्यावरण का संतुलन
सुप्रीम कोर्ट के ग्रीन पटाखों पर फैसले को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक ऐतिहासिक कदम बताया। गुप्ता ने कहा कि यह फैसला सांस्कृतिक भावनाओं और पर्यावरणीय ज़िम्मेदारियों के बीच संतुलन स्थापित करता है, जिससे दिल्ली के लोगों को वर्षों बाद पहली बार आधिकारिक तौर पर अनुमत पटाखों के साथ दीपावली मनाने की अनुमति मिली।
पर्यावरण मंत्री ने पर्यावरण के अनुकूल उत्सव सुनिश्चित करने के लिए सख्त प्रवर्तन और जन जागरूकता का वादा किया। हालांकि, आप ने वायु प्रदूषण पर सरकार की ‘निष्क्रियता’ की आलोचना की और शीतकालीन कार्य योजना को तेज़ी से लागू करने की मांग की।
बुधवार को सदर बाज़ार में दीपावली की खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। इस संशय के बीच कि कोई पटाखा वास्तव में हरित है या नहीं, हरित पटाखों की वापसी हुई है। कार्यकर्ता और विशेषज्ञ कहते हैं कि कार्यान्वयन का रिकॉर्ड खराब है, और प्रतिबंध हटाना प्रतिकूल हो सकता है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि “करोड़ों लोगों की भावनाओं का सम्मान किया गया है।”
न्यायालय की पीठ और निर्देश
बुधवार को, मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने केंद्र और दिल्ली सरकार के संयुक्त अनुरोध और ग्रीन पटाखा निर्माताओं की रियायतों की मांग को स्वीकार कर लिया। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली-एनसीआर में “ग्रीन पटाखों” की बिक्री और फोड़ने की अनुमति दे दी, प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए पिछले साल लगाए गए प्रतिबंध में संशोधन किया गया है।
शीर्ष न्यायालय ने 2018 में पारंपरिक पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था और केवल “ग्रीन पटाखों” की अनुमति दी थी, जिनका उत्पादन और बिक्री अनियमित रही, जिससे पारंपरिक पटाखों की अवैध तस्करी को बढ़ावा मिला। इसी के चलते पिछले साल शीर्ष न्यायालय ने ग्रीन पटाखों पर भी प्रतिबंध लगा दिया था।
पीठ ने कहा कि अदालत को पर्यावरण संबंधी चिंताओं और पटाखा उद्योग पर निर्भर हज़ारों कामगारों की आजीविका के बीच संतुलन बनाने की ज़रूरत है। पीठ ने हरियाणा राज्य द्वारा उठाई गई चिंताओं पर भी ध्यान दिया, जिनके 22 जिलों में से 14 जिले एनसीआर में आते हैं, जिससे राज्य का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा पटाखों पर प्रतिबंध से प्रभावित है।
उत्तर प्रदेश और राजस्थान राज्यों की ओर से भी इसी तरह की दलील दी गई थी। पीठ ने यह भी कहा कि प्रतिबंध लगाए जाने के समय वर्ष 2018 और 2024 में AQI (वायु गुणवत्ता सूचकांक) में बहुत अधिक अंतर नहीं था।
न्यायालय द्वारा जारी कुछ प्रमुख निर्देश:
नीरी की वेबसाइट पर अपलोड किए गए अनुसार, हरित पटाखों की बिक्री 18 अक्टूबर से 20 अक्टूबर, दिवाली तक की अनुमति होगी।
हरित पटाखों की बिक्री केवल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में निर्दिष्ट स्थानों पर ही की जा सकेगी, जिन्हें जिला कलेक्टर पुलिस अधीक्षक के परामर्श से चिन्हित करेंगे और व्यापक प्रचार-प्रसार करेंगे।
पुलिस अधिकारी, जिला प्रशासन के परामर्श से, बिक्री के निर्दिष्ट स्थानों पर निगरानी रखने के लिए गश्ती दल गठित करेंगे।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों द्वारा नामित अधिकारी गश्ती दल का हिस्सा होंगे।
गश्ती दल निर्दिष्ट स्थलों की नियमित रूप से जाँच करेंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि केवल अनुमत उत्पाद ही बेचे जाएँ। वे विश्लेषण के लिए यादृच्छिक नमूने भी लेंगे, जिन्हें PESO को भेजा जाएगा।
उल्लंघन पाए जाने पर, निर्माताओं के लाइसेंस रद्द कर दिए जाएँगे।
ज़िला प्रशासन और पुलिस यह सुनिश्चित करेंगे कि पटाखों का उपयोग दोनों दिनों (दिवाली और उससे एक दिन पहले) सुबह 6 बजे से 7 बजे तक और रात 8 बजे से 10 बजे तक ही सीमित रहे।
हरित पटाखों की बिक्री केवल उन लाइसेंस प्राप्त व्यापारियों द्वारा की जाएगी जो NEERI में पंजीकृत हैं और PESO से लाइसेंस प्राप्त हैं।
उक्त क्षेत्र के बाहर से एनसीआर क्षेत्र में किसी भी पटाखे की अनुमति नहीं होगी।
बेरियम युक्त पटाखों और NEERI द्वारा हरित पटाखों के रूप में अनुमोदित नहीं किए गए पटाखों के उपयोग की अनुमति नहीं होगी। यदि ये बिक्री के लिए या किसी व्यक्ति/व्यापारी के कब्जे में पाए जाते हैं, तो उन्हें तुरंत जब्त कर लिया जाएगा। यह सख्त दिवाली पटाखा प्रतिबंध सभी पर लागू होगा।
दिवाली पटाखा प्रतिबंध को लेकर देशभर में मतभेद गहराते जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस बार सख्त निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि किसी भी राज्य में पटाखों के खुले बिक्री की अनुमति नहीं दी जाएगी।
दिल्ली, राजस्थान और ओडिशा ने पहले ही पटाखों पर रोक लगाई है।कई व्यापारी संघ इसे परंपरा पर हमला बता रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट का पर्यावरण आधारित निर्णय
दिवाली पटाखा प्रतिबंध का मुख्य कारण प्रदूषण नियंत्रण बताया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि हर साल दिवाली के बाद वायु गुणवत्ता गंभीर हो जाती है। इसीलिए सरकारों को जिम्मेदारी लेनी होगी कि बैन पूरी तरह लागू हो।
केवल ग्रीन पटाखों को सीमित अनुमति दी जाएगी।उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना और जेल का प्रावधान रहेगा।



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