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पीके जंगल राज हमला: बिहार चुनाव 2025 में प्रवासी हैं असली ‘एक्स फैक्टर’।

पीके जंगल राज हमला

जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने शनिवार को बिहार चुनाव 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुनावी रणनीति पर बड़ा हमला बोला है। पीके जंगल राज हमला करते हुए, किशोर ने स्पष्ट कहा कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) का डर पैदा करके वोट पाने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि उनके पास जनता से कहने के लिए कोई सकारात्मक एजेंडा नहीं बचा है।

हालांकि, राजनीतिक रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने यह भी स्वीकार किया कि एक समय था जब कोई विकल्प नहीं होने के कारण, पीएम मोदी आरजेडी के “जंगल राज” के खिलाफ मतदाताओं से वोट करने का आग्रह करके सही कर रहे थे।

प्रशांत किशोर ने जोर देकर कहा कि अब स्थिति बदल गई है। उनके अनुसार, “लेकिन इस बार स्थिति बदल गई है… जन सुराज ही एक विकल्प है और इसलिए इस बार प्रधानमंत्री की रणनीति काम नहीं आएगी।

” उन्होंने सवाल किया, “अगर आप कह रहे हैं कि जंगल राज वापस नहीं आना चाहिए, तो फिर आपको [एनडीए] क्यों कहना चाहिए? जन सुराज एक नया विकल्प है…” यह टिप्पणी दिखाती है कि प्रशांत किशोर ने पीएम मोदी की उस पुरानी और सफल चुनावी रणनीति को सीधे चुनौती दी है जो लालू यादव और आरजेडी के अतीत को सामने रखती थी।

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रिकॉर्ड मतदान: बदलाव की गहरी चाहत का सबूत

बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में रिकॉर्ड 64.66 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जिसने राज्य के राजनीतिक परिदृश्य को गरमा दिया है। प्रशांत किशोर ने इस अभूतपूर्व मतदान प्रतिशत को बिहार में बदलाव की गहरी चाहत का स्पष्ट प्रमाण बताया।

उन्होंने कहा, “ये स्वयंभू विश्लेषक दावा कर रहे हैं कि उन्हें पता है कि बिहार में क्या होने वाला है… लेकिन किसी ने यह अनुमान नहीं लगाया था कि बिहार में देश के राजनीतिक इतिहास में सबसे ज़्यादा मतदान होगा। इतने सारे सर्वेक्षणों से पता चलता है कि बिहार में बदलाव ज़रूर आ रहा है।”

किशोर ने इस रिकॉर्ड मतदान को स्वतंत्रता के बाद से सबसे अधिक बताते हुए दावा किया कि लोग लगभग 30 सालों से चली आ रही राजनीतिक दलदल से बाहर निकलने के लिए एक व्यवहार्य विकल्प की तलाश में थे।

उन्होंने दावा किया कि उनकी एक साल पुरानी पार्टी ‘जन सुराज’ के एक विकल्प के रूप में उभरने के कारण लोगों में अब एक नई उम्मीद जगी है। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने भी इस रिकॉर्ड मतदान की पुष्टि करते हुए कहा कि राज्य में 1951 के बाद से सबसे ज़्यादा मतदान हुआ है और “बिहार ने देश को राह दिखाई है।”

प्रवासी मज़दूर: चुनाव का असली ‘एक्स फैक्टर’

प्रशांत किशोर ने पहले चरण के चुनाव में दर्ज हुए रिकॉर्ड मतदान के पीछे के असली ‘एक्स फैक्टर’ की पहचान की। जन सुराज पार्टी के संस्थापक ने शुक्रवार को दावा किया कि बिहार के प्रवासी, जो छठ पर्व के लिए घर लौटे हैं और अभी तक अपने कार्यस्थल पर वापस नहीं गए हैं, वे ही विधानसभा चुनावों में “एक्स फैक्टर” हैं।

उन्होंने एनडीए की आलोचना करते हुए कहा, “इन लोगों ने सोचा था कि महिलाओं को कुछ रियायतें देकर वे जीत सकते हैं। हाँ, महिलाएँ बड़ी संख्या में मतदान करने आईं, लेकिन इस चुनाव में प्रवासी ही एक्स फ़ैक्टर हैं।” उन्होंने जोर देकर कहा, “वे यहीं रुके रहे और अपने परिवार के सदस्यों को बाहर जाकर मतदान करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।

उनका प्रभाव देखने लायक है।” सुपौल में पत्रकारों से बात करते हुए, उन्होंने कहा कि युवा और प्रवासी मज़दूर बदलाव के लिए वोट देने के लिए दृढ़ हैं, और अब उनके पास जन सुराज के रूप में एक नया विकल्प मौजूद है। उन्होंने दावा किया कि पहले प्रवासी मजदूर एनडीए को वोट देते थे क्योंकि उनके पास विकल्प नहीं था, लेकिन अब वे उनकी पार्टी को वोट दे रहे हैं।

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प्रधानमंत्री मोदी की एनडीए के लिए जीत की प्रतिक्रिया

जहां एक ओर प्रशांत किशोर बदलाव और नए विकल्प की बात कर रहे हैं, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्वास व्यक्त किया है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने विधानसभा चुनाव के पहले चरण में भारी बढ़त हासिल की है और दूसरे चरण में भी उसके पक्ष में लहर दिखाई दे रही है।

पीएम मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान में एनडीए ने भारी बढ़त हासिल की है। इसके साथ ही दूसरे चरण में भी इसकी लहर हर जगह दिखाई दे रही है।

जनता और जनमानस के इसी उत्साह के बीच, कल दोपहर लगभग 1:45 बजे मुझे औरंगाबाद में अपने परिवार के सदस्यों के साथ और लगभग 3:30 बजे भभुआ में संवाद करने का सौभाग्य प्राप्त होगा।”

शाह का लालू-राबड़ी-राहुल पर सीधा निशाना

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को पटना में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक के बाद विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। शाह ने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं के पास बिहार के लिए “कोई विकास” एजेंडा नहीं है।

पीके जंगल राज हमला के संदर्भ में, अमित शाह ने आरोप लगाया कि राजद-कांग्रेस गठबंधन ने राज्य में अपने शासन के दौरान “घुसपैठियों को संरक्षण देने” के अलावा “गरीबों के लिए कुछ नहीं किया”।

जमुई में एक रैली को संबोधित करते हुए, उन्होंने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद और कांग्रेस नेता सोनिया गांधी पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि “जो लोग केवल अपने बेटे-बेटियों के कल्याण के बारे में चिंतित हैं, वे बिहार का विकास नहीं कर सकते।” यह दिखाता है कि एनडीए का शीर्ष नेतृत्व भी ‘जंगल राज’ और परिवारवाद के मुद्दे को चुनाव में प्रमुखता से उठा रहा है।

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चुनावी प्रक्रिया और विवाद: मतदाता सूची और मतदान

बिहार में विधानसभा चुनाव का पहला चरण गुरुवार को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। 6 नवंबर को रिकॉर्ड 64.66 प्रतिशत मतदान हुआ, जो राज्य के इतिहास में अब तक का सबसे अधिक है।

पहले चरण के चुनाव में 18 जिलों की 121 सीटों पर मतदान हुआ और कुल 3.75 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के पात्र थे। विधानसभा चुनाव का दूसरा चरण 11 नवंबर को होगा और मतों की गिनती 14 नवंबर को होगी।

यह चुनाव हाल ही में संपन्न मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद हुआ था, जिस पर विपक्षी दलों ने कड़ी आपत्ति जताई थी। सीईसी ज्ञानेश कुमार ने एसआईआर में शून्य अपील और 1951 के बाद से सबसे ज़्यादा मतदान का हवाला देते हुए इस प्रक्रिया को सफल बताया।

इस बीच, प्रशांत किशोर ने कांग्रेस के ‘वोट चोरी’ के आरोप को खारिज करते हुए कहा, “सड़क पर किसी भी व्यक्ति से पूछ लीजिए, पहले चरण के मतदान वाली सीटों पर किसी का भी नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया गया।”

प्रशांत किशोर की राजनीति: चुनौती और अवसर

लेख में यह भी कहा गया है कि पिछले चार दशकों में, बहुत कम पार्टियाँ नाटकीय रूप से इस दहलीज को पार कर पाई हैं। बसपा को उत्तर प्रदेश में अपने दम पर जीत हासिल करने में लगभग चौथाई सदी लग गई, जबकि आप ने मीडिया प्रचार, सत्ता-विरोधी भावना और शहरी मध्यवर्गीय भावनाओं का लाभ उठाया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रशांत किशोर की खुद को दूसरों से श्रेष्ठ समझने की राजनीति एक चुनौती भी है और एक अवसर भी। इस चुनाव से असली सवाल यह नहीं होगा कि क्या पीके राज्य में एक प्रमुख खिलाड़ी होंगे, बल्कि यह होगा कि क्या बिहार चुनाव के बाद, वह बिहार के बाहर एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनने का प्रयास कर सकते हैं। यह काम आसान नहीं है।

उल्लेखनीय रूप से, अधिकांश “नई” ताकतें केवल प्रमुख पार्टी के अंतिम दौर में या उसके पतन के बाद ही उभरीं। ऐसे में, प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के भविष्य पर चर्चा हो रही है, खासकर जब पीके जंगल राज हमला करके पुराने स्थापित दलों को चुनौती दे रहे हैं।

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युवा और प्रवासी ही बदलाव के लिए दृढ़

प्रशांत किशोर ने शनिवार को यह दोहराया कि बिहार में चल रहे विधानसभा चुनाव के असली “एक्स फैक्टर” प्रवासी मज़दूर और युवा हैं, न कि केवल महिलाएँ। सुपौल में उन्होंने दावा किया कि युवा और प्रवासी मज़दूर बदलाव के लिए वोट देने के लिए दृढ़ हैं और बड़ी संख्या में मतदान करने के लिए अपने परिवारों के साथ घर वापस आ रहे हैं।

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री पहले प्रवासी मज़दूरों और आम जनता को राजद के ‘जंगल राज’ का डर दिखाकर वोट दिलाते थे। लेकिन, उन्हें मौजूदा ज़मीनी हालात का अंदाज़ा नहीं है।

जिन लोगों को बिहार में ‘जंगल राज’ के फिर से उभरने की आशंका थी, उन्हें इस चुनाव में जन सुराज का विकल्प दिखाई दे रहा है।” यह अंतिम टिप्पणी स्पष्ट करती है कि पीके जंगल राज हमला को अब एक नए राजनीतिक विकल्प के रूप में पेश कर रहे हैं।

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