गडकरी घोटालों पर मोदी सरकार की चुप्पी, क्यों नहीं हो रही जांच?
मोदी सरकार की चुप्पी उस समय और भी गहरा जाती है जब देश के एक वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री, नितिन गडकरी पर उनके परिवार के व्यापारिक हितों को बढ़ावा देने के लिए गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगते हैं। ऐसा लगता है कि मोदी-शाह और नितिन गडकरी के बीच देश को लूटने का कंपटीशन चल रहा है, जहाँ कोई किसी से पीछे नहीं रहना चाहता।
नितिन गडकरी को भले ही देश के PSU अडानी के हवाले करने, विदेशों में घूम घूम ठेके दिलाने सहित देश के बैंकों से भारी भरकम कर्ज दिलाकर हेयरकट का फायदा दिलाने हेतु मोदी जैसा मौका या शाह जैसे नोटबंदी में नोटों की अदला-बदली में अरबों रूपये का वारा न्यारा करने और बेटे को BCCI और ICC के तिजोरी की चाभी सौंपने का मौका नहीं मिला हो, पर उन्हें भारत के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री के तौर पर तमाम एक्सप्रेसवे बनाने और उस पर टोल लगाकर जनता द्वारा चुकाए गए टोल के पैसे की हेराफेरी का मौका जरुर मिला।
जिन्हें कभी ‘एक्सप्रेसवे मैन’ कहा जाता था, आज वह सत्ता के गलियारों में घूमते-घूमते परिवार के कारोबार को पोषित करने वाले एक केंद्रीय मंत्री के रूप में बदनाम हो चुके हैं।
पिछले कुछ वर्षों में पूर्ति घोटाला, एथनॉल घोटाला और अब टोल घोटाला (IDL कंपनी के जरिए धन शोधन का मामला) न केवल उनके विरुद्ध घोटालों का आरोप हैं, बल्कि दस्तावेजी सबूतों, मीडिया जांचों (कारवां मैगजीन 2021 से 2025 तक, क्विंट 2025, बिजनेस वर्ल्ड) और शपथपत्रों से भी पुष्ट हैं।
इसे भी पढ़े :-नितिन गडकरी का पलटवार: E20 ईंधन विवाद पर निजी लाभ के आरोप खारिज
जनता का पैसा, परिवार की तिजोरी: सुनियोजित लूट का चक्रव्यूह
कारवां मैगजीन की 2021 की जांच से लेकर 2025 की ताजा रिपोर्ट्स तक, गडकरी का परिवार सार्वजनिक धन को निजी जेबों में ट्रांसफर करने का मास्टरमाइंड साबित हो रहा है। यह आरोप लगाया गया है कि एक तरफ वे नीतियां बनाते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके बेटे निखिल और सारंग की कंपनियां उन नीतियों का ‘फायदा’ उठाती हैं।
यह संयोग नहीं, बल्कि सुनियोजित लूट है, जो टैक्स-पेयर्स के पैसे को कॉर्पोरेट घरानों की तिजोरी में डाल रही है। 2025 में क्विंट की रिपोर्ट्स और बिजनेस वर्ल्ड की जांच से साफ है कि गडकरी परिवार की 19 चीनी मिलें एथनॉल उत्पादन में सीधे जुड़ी हैं, और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के टोल कॉन्ट्रैक्ट्स में भी परिवार की कंपनियां हावी हैं।
विपक्षी दलों ने लोकपाल जांच की मांग की है, लेकिन मोदी सरकार की चुप्पी सवाल खड़ी करती है कि क्या यह ‘जीरो टॉलरेंस’ वाली नीति का अपवाद है? जनता का पैसा परिवार की संपत्ति बन रहा है, और यह लोकतंत्र का सबसे बड़ा धोखा है।
पूर्ति घोटाला: गडकरी की राजनीतिक यात्रा का पहला काला अध्याय
पूर्ति घोटाला गडकरी की राजनीतिक यात्रा का पहला काला अध्याय है, जो 2012 से ही मीडिया की सुर्खियों में रहा। इंडिया टुडे और मनीलाइफ की रिपोर्ट्स बताती हैं कि पूर्ति ग्रुप में शेल कंपनियों के जरिए धन का राउंड-ट्रिपिंग हुआ। गडकरी ने खुद असुरक्षित लोन दिए, जो वापस निवेश के रूप में लौट आए।
इन्वेस्टर कंपनियां जैसे अपडेट मर्केंटाइल और रीजेंसी इक्विफिन, जो फर्जी पते वाली थीं, ने पूर्ति में करोड़ों झोंक दिए। गडकरी के चालक मनोहर पानसे को छह कंपनियों का डायरेक्टर बनाया गया, जबकि उनके रिश्तेदारों ने भी डायरेक्टर पद संभाले। इनकम टैक्स और ED की जांच में अनियमितताएं पकड़ी गईं, लेकिन गडकरी इस्तीफा देकर बच निकले।
CAG रिपोर्ट में IREDA से $46$ करोड़ का लोन मिसयूज का खुलासा हुआ, फिर भी कोई सजा नहीं मिली। यह घोटाला साबित करता है कि गडकरी का परिवार किसानों के नाम पर सहकारी समितियों की जमीन हड़प लेता है, जैसे पॉलीसैक इंडस्ट्रियल कोऑपरेटिव की जमीन को सस्ते में ट्रांसफर करना।
2015 में राज्यसभा में कांग्रेस ने CAG रिपोर्ट पर गडकरी का इस्तीफा मांगा, लेकिन सदन पांच बार स्थगित होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। 2025 में भी, जब RTI एक्टिविस्ट अंजली दमानिया ने पुरानी फाइलें खोलीं, तो पाया गया कि पूर्ति की $18$ निवेशक कंपनियां फर्जी थीं, इनका कोई अस्तित्व ही नहीं था।
IT डिपार्टमेंट ने $7$ करोड़ का जुर्माना लगाया, लेकिन गडकरी को क्लीन चिट देकर केस को दबा दिया गया। यह देश के साथ वित्तीय धोखाधड़ी के साथ-साथ किसानों की मेहनत का शोषण भी है।
इसे भी पढ़े :-नितिन गडकरी बम धमकी मामले में नागपुर से फर्जी कॉल करने वाला गिरफ्तार
एथनॉल घोटाला: ‘राष्ट्रहित’ के नाम पर परिवार-हित की नीति
एथनॉल घोटाला गडकरी की नीति-निर्माण की कला का सबसे शर्मनाक नमूना है, जहाँ वे पेट्रोल में 20% एथनॉल ब्लेंडिंग को ‘राष्ट्रहित’ में बताते हैं, लेकिन उनका परिवार ही इसका सबसे बड़ा लाभार्थी बनता है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की 2025 की प्रेस कॉन्फ्रेंस और मनीकंट्रोल की रिपोर्ट्स से साफ है कि निखिल गडकरी की CIAN Agro Industries की आय जून 2024 में ₹18 करोड़ से जून 2025 में ₹723 करोड़ हो गई, यानि लगभग 40 गुना उछाल!
स्टॉक प्राइस ₹37 से ₹2023 तक पहुंचा, यानी 2184% की वृद्धि। सारंग की Manas Agro भी एथनॉल प्रोडक्शन में शीर्ष पर है। गडकरी ने 2018 में दावा किया था कि एथनॉल से पेट्रोल ₹55 प्रति लीटर सस्ता हो जाएगा, लेकिन 2025 में यह ₹95 पर पहुंच गया।
इनकी नीति से किसानों को लाभ का दावा झूठा है, गन्ना-आधारित एथनॉल पानी की बर्बादी करता है और वाहनों की माइलेज को 6% घटाता है। यह ‘परिवार-हित’ की नीति है, जहाँ मंत्री पिता नीति बनाते हैं और बेटे मुनाफा कमाते हैं। 2025 में E20 रोलआउट के बाद, द हिंदू और द हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट्स ने खुलासा किया कि गडकरी परिवार की 19 मिलें देश में गन्ना एथनॉल का 60% उत्पादन करती हैं, और CIAN की ‘अदर इनकम’ में सब्सिडी का बड़ा हिस्सा है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि FCI के सस्ते अनाज को एथनॉल उत्पादकों को बेचा जा रहा है, जबकि पेट्रोल कीमतें 2014 के ₹71 से ₹95 पर पहुंच गईं। X पर #E20Scam ट्रेंड कर रहा है, जहाँ यूजर्स गडकरी को ‘परिवार-प्रधान’ मंत्री कह रहे हैं, और BW बिजनेसवर्ल्ड ने इसे ‘एथनॉल एक्सप्रेस’ नाम दिया है, इनकी नीति से परिवार की संपत्ति ₹7500 करोड़ पार कर गई।
‘टोल घोटाला’: IDL कंपनी के जरिए जनता की गाढ़ी कमाई का अपहरण
अब इनका IDL कंपनी के जरिए ‘टोल घोटाला’ सबसे ताजा और घिनौना मामला सामने आया है। सामाजिक कार्यकर्ता अंजली दमानिया ने 2025 में खुलासा किया कि टोल रेवेन्यू पहले Ideal Energy Projects Limited (IEPL) को ट्रांसफर होता है, फिर वहां से गडकरी के बेटों की कंपनियों में।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि निखिल गडकरी IEPL में पार्टनर था, जो महाराष्ट्र में टोल कॉन्ट्रैक्ट्स हथियाने के लिए जाना जाता है। दमानिया के मुताबिक, ₹300 करोड़ का IBC के तहत IEPL को सस्ते में खरीदा गया, जहाँ सारंग की Manas Agro ने बोली जीती।
UP STF की रिपोर्ट में 200टोल प्लाजा पर ₹120 करोड़ का फ्रॉड सामने आया, जहाँ सॉफ्टवेयर टैंपरिंग से राजस्व, सरकारी खाते की बजाय निजी कंपनियों में जा रहा था। गडकरी का परिवार NHAI अधिकारियों के साथ मिलकर जनता की गाढ़ी कमाई लूट रहा है। यह पद का दुरुपयोग है; मंत्री टोल नीति बनाते हैं, परिवार टोल चुराता है।
TV9 मराठी और ABP लाइव की 2025 की कवरेज से पता चला कि महाराष्ट्र के $128$ टोल प्लाजा पर IDL (Ideal Road Builders ग्रुप) का कंट्रोल है, जहाँ गडकरी के समय PWD मंत्री रहते हुए IRB को बड़े कॉन्ट्रैक्ट दिए गए।
मोदी सरकार की चुप्पी इसलिए भी शर्मनाक है क्योंकि 2025 में UP STF ने 120 करोड़ का जो फ्रॉड पकड़ा था, उसमें गडकरी का नाम आने पर जांच रुक गई।
बचाव की चाल: ‘विदेशी लॉबी’ का बहाना, साक्ष्यों के सामने नाकाम
गडकरी परिवार का बचाव कि ये आरोप ‘विदेशी लॉबी’ या ‘इंपोर्ट कार्टेल’ के हैं, एक वाहियात बहाना है, जो साक्ष्यों के सामने नहीं टिकता। वे दावा करते हैं कि एथनॉल से अरबों की बचत हुई, लेकिन BW बिजनेसवर्ल्ड की 2025 रिपोर्ट दिखाती है कि CIAN Agro की ग्रोथ नीति से सीधे जुड़ी है, न कि राष्ट्रीय हित से।
पूर्ति में शेल कंपनियां और टोल में IDL का चक्रव्यूह साफ दिखता है। दमानिया जैसे कार्यकर्ताओं को बदनाम करने की कोशिशें नाकाम हो रही हैं। गडकरी खुद कहते हैं, ‘फलदार पेड़ पर पत्थर चलते हैं’, लेकिन यहाँ पेड़ तो जनता के हिस्से का फल परिवार को दे रहा है।
2025 में द हिंदू ने गडकरी के बयान को चुनौती दी, जहाँ उन्होंने कहा कि CIAN का उत्पादन कुल एथनॉल का 0.5%है, लेकिन क्रिटिक्स ने पॉइंट आउट किया कि नीति-निर्माण में टकराव स्पष्ट है। X पर @CivicOp_india ने पोस्ट किया कि गडकरी की 19 मिलें डायरेक्ट कॉन्ट्रैक्ट ले रही हैं, और @garvit_sethii ने इस्तीफे की मांग की।
इसे भी पढ़े :-सीपी राधाकृष्णन ने ली भारत के 15वें उपराष्ट्रपति की शपथ, धनखड़ रहे मौजूद
लोकतंत्र पर सीधी चोट: क्षद्म नारों की पोल
ये घोटाले केवल आंकड़ों के खेल नहीं हैं, बल्कि लोकतंत्र पर सीधी चोट हैं। जहाँ टोल टैक्स देश के बुनियादी ढांचे के लिए होता है, उस टैक्स को गडकरी परिवार की कंपनियां लूट रही हैं। एथनॉल नीति से किसान ऊर्जा उत्पादक बनने का सपना बेचा गया, लेकिन वास्तव में गन्ना मिलों के मालिक, जिनमें गडकरी के 19 मिल शामिल हैं, मुनाफा वे ही कमा रहे हैं।
2025 में E20 रोलआउट से वाहन का माइलेज घटा। दुनिया के तमाम देशों में सड़क मार्ग से माल ढुलाई का प्रति किलोमीटर ₹7 खर्च होता है, वहीं भारत में यह खर्च ₹14 पहुँच जाता है। ट्रांसपोर्टेशन के ज्यादा लागत के कारण कीमतें बढ़ जाती हैं, यह भी एक कारण है कि भारतीय निर्यातक अंतरराष्ट्रीय बाजार में फेल हो रहे हैं, लेकिन गडकरी के बेटों की कंपनियां तो खरबपति बन गईं।
X पर पोस्ट्स दिखाती हैं कि जनता गुस्से में है, ‘मोदी-शाह-गडकरी तीनों को हटाओ’ के नारे गूँज रहे हैं। यह परिवारवाद का जहर है, जो BJP की ‘सबका साथ’ ‘सबका विकास’ जैसे क्षद्म नारे का पोल खोल रहा है।
2025 की डेक्कन हेराल्ड रिपोर्ट से पता चला कि IRB इंफ्रा ने ₹32 करोड़ के इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे, जो गडकरी से जुड़े हैं, और Zojila टनल कॉन्ट्रैक्ट में ₹3241 करोड़ की कटौती हुई। @INCKerala ने X पर इसे ‘मोदी का फैमिली मेंबर’ कहा।
इसे भी पढ़े :-किसान आत्महत्या: अब तो खून के आँसू रोते हैं महाराष्ट्र के खेत!
आगे की राह: जनता की सतर्कता जरूरी
यह मुद्दा जनता के लिए सबक है: सत्यमेव जयते का मंत्र संविधान में है, लेकिन सत्ता में नहीं। गडकरी जैसे मंत्रियों को जवाबदेह बनाना जरूरी है, चाहे वे कितने भी स्वयं घोषित ‘विकास पुरुष’ क्यों न बनें। लोकपाल, ED या सुप्रीम कोर्ट से स्वतंत्र जांच हो, ताकि कोई मंत्री कानून से ऊपर न समझे।
लेकिन जब तक नरेंद्र मोदी सत्ता में हैं, तब तक निष्पक्ष जांच संभव नहीं है और मोदी सरकार की चुप्पी के चलते इन घोटालों की श्रृंखला जारी रहेगी। इसे रोकने के लिए जनता को सतर्क होना होगा। टोल, पेट्रोल या सब्सिडी का पैसा देश की जनता के हित के लिए हो, न कि सत्ताधारी परिवारों की तिजोरी भरने के लिए।
यदि मोदी सरकार की चुप्पी बनी रही, तो 2029 का चुनाव इन्हीं घोटालों पर लड़ा जाएगा। @VertigoWarrior जैसे समर्थकों ने बचाव किया, लेकिन @zhr_jafri ने इलेक्टोरल बॉन्ड्स के जरिए बिजनेस लॉबी के साइलेंस पर सवाल उठाए।
द इकोनॉमिक टाइम्स ने गडकरी के पुराने IRB लिंक्स को रिजेक्ट किया, लेकिन दमानिया की 128 कंपनियों की लिस्ट ने नया विवाद खड़ा कर दिया है।
यह केवल घोटाला नहीं, बल्कि सिस्टम का फेलियर है, जहाँ मंत्री बनकर परिवार को अरबपति बनाने का खेल चल रहा है। जनता जागे, वरना यह देश के अस्तित्व पर गंभीर खतरे की घंटी है।



Post Comment