पीएम मोदी विदेश यात्रा: जॉर्डन, इथियोपिया, ओमान दौरा और CEPA
PM मोदी विदेश यात्रा के तहत 15 दिसंबर से पश्चिम एशिया और अफ्रीका की अपनी चार दिवसीय महत्वपूर्ण यात्रा पर निकल रहे हैं। यह यात्रा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भारत के रुख को भी स्पष्ट करेगी।
विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को मीडिया को जानकारी देते हुए गाजा शांति योजना के लिए भारत के समर्थन को दोहराया और बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी यात्रा के दौरान चर्चा में क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मामले शामिल होंगे।
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जॉर्डन: राजनयिक संबंधों के 75वें वर्ष में पहली द्विपक्षीय यात्रा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 से 17 दिसंबर तक जॉर्डन का दौरा करेंगे, जो इस देश की उनकी पहली द्विपक्षीय यात्रा होगी। विदेश मंत्रालय में सचिव (दक्षिण), डॉ. नीना मल्होत्रा ने कल शाम नई दिल्ली में मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री किंग अब्दुल्ला II बिन अल हुसैन के निमंत्रण पर 15 से 16 तारीख तक जॉर्डन जाएंगे।
यह यात्रा दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75वें वर्ष के साथ हो रही है, जो इसे और भी ऐतिहासिक बनाती है। प्रधानमंत्री द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करने और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान करने के लिए किंग अब्दुल्ला द्वितीय से मिलेंगे।
डॉ. मल्होत्रा ने ज़ोर देकर कहा कि भारत और जॉर्डन के बीच मज़बूत आर्थिक संबंध हैं, जिसमें भारत जॉर्डन का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों और सहयोग के क्षेत्रों को मजबूत करने पर ध्यान देंगे।
इथियोपिया: अफ्रीका में भारत का महत्वपूर्ण भागीदार और दक्षिण-दक्षिण सहयोग
अपनी तीन देशों की यात्रा के दूसरे चरण में, श्री मोदी इस महीने की 16 और 17 तारीख को इथियोपिया जाएंगे। सचिव (दक्षिण) मीना मल्होत्रा ने बताया कि यह यात्रा दक्षिण-दक्षिण सहयोग को गहरा करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इथियोपिया अफ्रीका में एक महत्वपूर्ण भागीदार है और अफ्रीकी संघ का मुख्यालय भी यहीं है।
प्रधानमंत्री मोदी अपने इथियोपियाई समकक्ष डॉ. अबी अहमद अली के साथ आमने-सामने और प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत करेंगे। मल्होत्रा ने यह भी बताया कि भारत इंडिया-अफ्रीका शिखर सम्मेलन के अगले संस्करण के आयोजन के लिए अफ्रीकी भागीदारों के साथ काम करना जारी रखे हुए है।
ओमान: विशेष साझेदारी और ऐतिहासिक CEPA पर हस्ताक्षर की उम्मीद
PM मोदी विदेश यात्रा का अंतिम चरण 17 से 18 दिसंबर तक ओमान में समाप्त होगा, जो 2018 के बाद सल्तनत की उनकी दूसरी यात्रा होगी। सचिव (CPV और OIA) अरुण कुमार चटर्जी ने कहा कि प्रधानमंत्री के साथ एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल होगा।
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत ओमान के साथ एक विशेष साझेदारी साझा करता है, जो व्यापार संबंधों और लोगों के बीच संबंधों पर आधारित है। श्री चटर्जी ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री की ओमान यात्रा के दौरान कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।
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भारत-ओमान CEPA: $10.6 बिलियन व्यापार को बढ़ावा देने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मस्कट दौरे से ठीक पहले, केंद्रीय कैबिनेट ने शुक्रवार को भारत और ओमान के बीच एक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) यानी व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को मंज़ूरी दी।
जानकारों के अनुसार, इस समझौते पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 17-18 दिसंबर को मस्कट दौरे के दौरान हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। दोनों पक्ष प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान अपने CEPA को अंतिम रूप देने की घोषणा कर सकते हैं।
CEPA से मौजूदा $10.61 बिलियन से ज़्यादा द्विपक्षीय व्यापार बढ़ने की उम्मीद है। बातचीत नवंबर 2023 में शुरू हुई थी, लेकिन ओमान की तरफ से कुछ आंतरिक नीतिगत मुद्दों के कारण इसमें देरी हुई थी।
वित्त वर्ष 25 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार $10.61 बिलियन था, जो भारत के कुल व्यापार का सिर्फ़ 0.9 प्रतिशत है। समझौते में पेट्रोलियम, यूरिया और मैन्युफैक्चर्ड सामान पर फोकस रहेगा।
पेट्रोलियम उत्पाद और यूरिया मिलकर ओमान से भारत के आयात का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा बनाते हैं। ओमान को भारत के मुख्य निर्यात में गैसोलीन, लोहा और इस्पात, इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी शामिल हैं, जबकि आयात में मुख्य रूप से पेट्रोलियम उत्पाद, यूरिया, प्रोपलीन और एथिलीन पॉलिमर शामिल हैं।
क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर गहन चर्चा
यात्रा के बारे में मीडिया को जानकारी देते हुए, सचिव (CPV और OIA) अरुण कुमार चटर्जी ने कहा कि दोनों देशों के साथ भारत के संबंध अपने आप में रणनीतिक महत्व रखते हैं और उम्मीद है कि नेता आपसी हित के मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि बैठकों के बाद विशिष्ट विषय और स्पष्ट होंगे।
मोदी विदेश यात्रा के दौरान यह चर्चा होना तय है कि पश्चिम एशिया में स्थिरता और भारत के विस्तारित पड़ोस की स्थिति पर क्या कदम उठाए जाएं। यह ध्यान देने योग्य है कि यह ब्रीफिंग प्रधानमंत्री मोदी के इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बात करने के कुछ दिनों बाद हुई है, जिसके दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की थी।
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गाजा शांति योजना: भारत का लगातार और अडिग समर्थन
सचिव (दक्षिण) मीना मल्होत्रा ने कहा कि गाजा पर भारत का रुख लगातार बना हुआ है, उन्होंने गाजा पर शर्म अल-शेख शिखर सम्मेलन में देश की भागीदारी को याद किया।
उन्होंने कहा कि भारत ने गाजा शांति योजना के पहले चरण पर हस्ताक्षर का स्वागत किया और स्थायी शांति स्थापित करने के उद्देश्य से सभी प्रयासों का समर्थन करता है।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी कहा था कि नेतन्याहू के साथ बातचीत में नेताओं ने रणनीतिक सहयोग की समीक्षा की और भारत ने गाजा शांति योजना के शीघ्र कार्यान्वयन के लिए समर्थन दोहराया। यह दर्शाता है कि PM मोदी विदेश यात्रा के एजेंडे में गाजा का मुद्दा एक प्रमुख स्थान रखता है।
बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल का सिलसिला जारी
इस बहुराष्ट्रीय दौरे के बीच, एक अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रीय घटनाक्रम भी चर्चा में है। बांग्लादेश में फरवरी 2026 के चुनाव से पहले बढ़ते राजनीतिक संकट का सिलसिला जारी है।
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रिपोर्ट में सवाल उठाया गया है कि क्या नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस द्वारा कराए जाने वाले आगामी चुनाव से सच्ची लोकतंत्र आ पाएगा या यह सिर्फ ‘नए रूप में वही पुराना गंदा खेल’ है।
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विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का संक्षिप्त विवरण
यात्रा के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी विदेश मंत्रालय के दो प्रमुख अधिकारियों द्वारा दी गई:
डॉ. नीना मल्होत्रा (सचिव, दक्षिण): इन्होंने जॉर्डन और इथियोपिया की यात्रा पर विस्तार से बात की और गाजा पर भारत के रुख को स्पष्ट किया।
अरुण कुमार चटर्जी (सचिव, CPV और OIA): इन्होंने ओमान यात्रा और क्षेत्रीय/अंतर्राष्ट्रीय मामलों पर चर्चा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री के साथ एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल होगा।



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