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कैबिनेट राहत पैकेज अटकलें: वोडाफोन आइडिया का शेयर 15% गिरा

कैबिनेट राहत पैकेज अटकलें

बुधवार को भारतीय दूरसंचार बाजार और स्टॉक एक्सचेंज में उस वक्त हड़कंप मच गया जब कैबिनेट राहत पैकेज अटकलें तेज हो गईं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि केंद्रीय कैबिनेट ने कर्ज में डूबी दिग्गज टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया (Vi) के लिए एक बड़े राहत पैकेज को मंजूरी दे दी है।

इन खबरों के अनुसार, सरकार ने कंपनी के 87,695 करोड़ रुपये के एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) बकाया को 31 दिसंबर तक फ्रीज करने का फैसला किया है। हालांकि, इन खबरों के बीच वोडाफोन आइडिया ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि उसे अभी तक सरकार की ओर से ऐसी किसी भी राहत की कोई आधिकारिक सूचना या आदेश प्राप्त नहीं हुआ है।

शेयर बाजार में भारी बिकवाली और स्टॉक का 15 प्रतिशत तक गिरना

जैसे ही बाजार में ये खबरें और कैबिनेट राहत पैकेज अटकलें फैलीं, वोडाफोन आइडिया के शेयरों में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव देखने को मिला। इंट्रा-डे ट्रेडिंग के दौरान कंपनी का स्टॉक 15.01 प्रतिशत यानी 1.81 रुपये टूटकर 10.25 रुपये के निचले स्तर पर आ गया। भारी बिकवाली के दबाव के कारण निवेशकों में घबराहट देखी गई।

दिन का कारोबार समाप्त होने तक, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर शेयर 10.76 रुपये पर बंद हुए, जो पिछले बंद भाव से 1.31 रुपये या 10.85 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर भी दोपहर के समय स्टॉक 10.8 रुपये के आसपास संघर्ष करता नजर आया।

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एक्सचेंज फाइलिंग के जरिए वोडाफोन आइडिया का आधिकारिक स्पष्टीकरण

बाजार में मची उथल-पुथल को देखते हुए वोडाफोन आइडिया ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के माध्यम से एक स्पष्टीकरण जारी किया। कंपनी ने दो-टूक शब्दों में कहा कि मीडिया में चल रही रिपोर्टें महज अटकलें हैं। टेलीकॉम ऑपरेटर ने अपनी फाइलिंग में स्पष्ट किया, “हमें ऊपर बताई गई बात के संबंध में सरकार से कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है।

” कंपनी ने निवेशकों को आश्वस्त करते हुए आगे कहा कि जब भी कोई ऐसा डेवलपमेंट होगा जिसके लिए खुलासा करना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा, तो कंपनी नियमानुसार जरूरी कदम उठाएगी और स्टॉक एक्सचेंज को सूचित करेगी।

AGR बकाया फ्रीज और पुनर्भुगतान की प्रस्तावित समयसीमा का गणित

विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के हवाले से यह दावा किया गया था कि कैबिनेट ने वोडाफोन आइडिया के 87,695 करोड़ रुपये के भारी-भरकम AGR बकाए को फ्रीज कर दिया है। इन रिपोर्टों के अनुसार, इस राशि को चुकाने के लिए कंपनी को 10 साल की लंबी अवधि दी गई है, जो वित्तीय वर्ष 2031-32 (FY32) से शुरू होकर FY41 तक चलेगी।

इस कदम को कंपनी की तंग वित्तीय स्थिति को सुधारने और नकदी संकट से उबारने के लिए एक बड़ी संजीवनी के रूप में देखा जा रहा था। हालांकि, कंपनी ने अभी तक इन सूचनाओं की पुष्टि नहीं की है और इन्हें केवल कैबिनेट राहत पैकेज अटकलें ही करार दिया है।

दूरसंचार विभाग द्वारा ऑडिट और ऑडिट निष्कर्षों की समीक्षा

प्रस्तावित राहत पैकेज की खबरों में यह भी उल्लेख था कि फ्रीज की गई राशि अंतिम नहीं है। दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा ऑडिट निष्कर्षों और कटौती सत्यापन दिशानिर्देशों (Deduction Verification Guidelines) के आधार पर इस राशि का बाद में फिर से मूल्यांकन किया जाना था।

रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार द्वारा नियुक्त एक उच्च स्तरीय समिति को पुनर्मूल्यांकित राशि पर अंतिम फैसला लेने की जिम्मेदारी सौंपी जानी थी। इस समीक्षा प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य वोडाफोन आइडिया को अपने दीर्घकालिक वित्तीय बोझ को प्रबंधित करने में कुछ लचीलापन प्रदान करना था, ताकि कंपनी प्रतिस्पर्धी बाजार में बनी रह सके।

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सुप्रीम कोर्ट का 2020 का आदेश और FY18-19 की देनदारियां

यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि जो राहत चर्चाओं में है, वह वित्त वर्ष 2017-18 और 2018-19 से संबंधित AGR देनदारियों पर लागू नहीं होती है। भारत के माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2020 में दिए गए आदेश के तहत इन बकायों को पहले ही अंतिम रूप दिया जा चुका है।

कंपनी को इन देनदारियों का भुगतान मौजूदा रीपेमेंट शेड्यूल के अनुसार ही करना होगा, जो FY26 और FY31 के बीच निर्धारित है। कैबिनेट राहत पैकेज अटकलें केवल उन बकायों तक सीमित बताई जा रही हैं जिन पर सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सरकार को पुनर्मूल्यांकन की अनुमति दी थी।

सरकार की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी और 20 करोड़ ग्राहकों का हित

राजनीतिक और आर्थिक गलियारों में चर्चा है कि कैबिनेट का यह संभावित कदम वोडाफोन आइडिया में सरकार की लगभग 49 प्रतिशत हिस्सेदारी की रक्षा करने के उद्देश्य से है। सरकार चाहती है कि टेलीकॉम सेक्टर में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनी रहे और एकाधिकार की स्थिति पैदा न हो।

इसके अलावा, देश भर के लगभग 20 करोड़ वोडाफोन आइडिया ग्राहकों के हितों की रक्षा करना भी प्राथमिकता है। कंपनी ने पहले भी सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि यदि उसे भुगतान में राहत नहीं मिली, तो यह उसकी वित्तीय स्थिरता पर बड़ा सवालिया निशान लगा देगा और सरकारी निवेश को भी खतरे में डाल सकता है।

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भविष्य की राह और सालाना 18,000 करोड़ रुपये के भुगतान की चुनौती

वर्तमान स्थिति के अनुसार, वोडाफोन आइडिया पर सरकार का जो AGR बकाया है, उसका सालाना लगभग 18,000 करोड़ रुपये का भुगतान मार्च 2026 से शुरू होना है। कंपनी इस वित्तीय बोझ को कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

हालांकि बुधवार को आई खबरों ने बाजार में सनसनी फैला दी, लेकिन कंपनी के आधिकारिक इनकार ने निवेशकों को फिलहाल ‘इंतजार करो और देखो’ की स्थिति में डाल दिया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ये अटकलें हकीकत में बदलती हैं और सरकार आधिकारिक तौर पर किसी सपोर्ट पैकेज की घोषणा करती है।

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