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न्यूजीलैंड: हाका प्रदर्शन और सिख जुलूस के बीच भारी तनाव

हाका प्रदर्शन सिख जुलूस

न्यूजीलैंड के तौरंगा में हाल ही में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान हाका प्रदर्शन और सिख जुलूस का आमना-सामना होने से स्थिति तनावपूर्ण हो गई। 10वें सिख गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती मनाने के लिए आयोजित इस नगर कीर्तन को स्थानीय प्रदर्शनकारियों के एक समूह के विरोध का सामना करना पड़ा।

सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में प्रदर्शनकारियों को माओरी संस्कृति के पारंपरिक हाका को बेहद आक्रामक और टकराव वाले तरीके से करते हुए देखा गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने “यह भारत नहीं है” और “यह न्यूजीलैंड है, भारत नहीं” जैसे नारे लगाए, जिससे सांप्रदायिक और सांस्कृतिक असहजता की स्थिति उत्पन्न हो गई।

सिख समुदाय का अनुकरणीय संयम और पुलिस की भूमिका

इस विरोध और रुकावट के बावजूद, सिख जुलूस में शामिल श्रद्धालुओं ने भारी संयम का परिचय दिया। प्रदर्शनकारियों द्वारा मार्ग बाधित करने और नारेबाज़ी करने के बाद भी सिखों ने अपना मार्च जारी रखा। हालांकि, कुछ प्रतिभागियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर स्थिति को शांत करने की कोशिश भी की।

मौके पर मौजूद पुलिस ने स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए तुरंत मोर्चा संभाला। गनीमत यह रही कि इस पूरी घटना में हिंसा की कोई तत्काल रिपोर्ट नहीं मिली। अधिकारियों ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की।

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राजनीतिक और अलगाववादी मुद्दों से जुड़ी असहमति

न्यूजीलैंड में हाका प्रदर्शन और सिख जुलूस के बीच यह टकराव केवल सांस्कृतिक नहीं, बल्कि राजनीतिक भी नजर आ रहा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि इस तरह के जुलूस विदेशी विवादों, विशेष रूप से भारतीय राजनीति और सिख अलगाववादी मुद्दों (खालिस्तान) से जुड़ी असहमति को न्यूजीलैंड की धरती पर ला रहे हैं।

प्रदर्शनकारी समूह, जो खुद को ‘ट्रू पैट्रियट्स ऑफ एनजेड’ कहता है, का दावा है कि वे “कीवी जीवन शैली” की रक्षा कर रहे हैं और बड़े पैमाने पर इमिग्रेशन और ग्लोबलिज्म का विरोध करते हैं।

सुखबीर सिंह बादल ने जताई गहरी चिंता

शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने तौरंगा की इस घटना को “बेहद चिंताजनक” करार दिया है। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के माध्यम से केंद्र सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की। बादल ने कहा कि नगर कीर्तन पवित्र धार्मिक जुलूस हैं जो शांति, एकता और सामुदायिक सेवा को बढ़ावा देते हैं।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सिख समुदाय हमेशा ‘सरबत दा भला’ (सभी के कल्याण) के लिए प्रार्थना करता है, और ऐसी संवेदनशील परिस्थितियों में भी समुदाय ने अनुकरणीय संयम दिखाया है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर से राजनयिक हस्तक्षेप की अपील

घटना की गंभीरता को देखते हुए सुखबीर बादल ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर से आग्रह किया है कि वे न्यूजीलैंड सरकार के साथ इस मुद्दे को कूटनीतिक स्तर पर उठाएं। बादल ने कहा, “इन बार-बार होने वाली घटनाओं से मुझे गहरा दुख हुआ है।

धार्मिक अभिव्यक्ति सभी के लिए सुरक्षित होनी चाहिए और विदेशों में रहने वाले हमारे प्रवासी समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करना अनिवार्य है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि शिरोमणि अकाली दल अपने प्रवासी भाइयों के साथ मजबूती से खड़ा है और उनकी सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेगा।

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एक महीने के भीतर दूसरी बड़ी घटना

यह न्यूजीलैंड में इस तरह की पहली घटना नहीं है। इससे पहले दिसंबर में दक्षिण ऑकलैंड के मनुरेवा में भी हाका प्रदर्शन और सिख जुलूस के बीच ऐसी ही स्थिति देखी गई थी। उस समय नानकसर सिख मंदिर द्वारा आयोजित नगर कीर्तन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सड़क ब्लॉक कर दी थी।

उस जुलूस में भी सैकड़ों प्रतिभागी ग्रेट साउथ रोड पर पैदल चल रहे थे, जिन्हें ‘ट्रू पैट्रियट्स ऑफ एनजेड’ के सदस्यों ने बाधित किया था। डेस्टिनी चर्च के नेता ब्रायन तमाकी ने इन प्रदर्शनों का समर्थन करते हुए इन्हें “कीवी सड़कों” की रक्षा के लिए किया गया शांतिपूर्ण विरोध बताया है।

धार्मिक स्वतंत्रता और सार्वभौमिक भाईचारे पर हमला

एसजीपीसी (SGPC) के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने भी इस विरोध की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि सिख धर्म की नींव ‘सरबत दा भला’ और मानवता की सेवा पर टिकी है। नगर कीर्तन समाज में सद्भाव और प्रेम का संदेश फैलाते हैं, ऐसे में इनका विरोध करना सिख गुरुओं के सार्वभौमिक संदेश पर सीधा हमला है।

धामी ने कहा कि सिख समुदाय दुनिया के हर कोने में वहां के कानूनों और संस्कृति का सम्मान करते हुए रहता है, फिर भी उनके धार्मिक अधिकारों में बाधा डालना अनुचित है।

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प्रशासनिक रुख और भविष्य की सुरक्षा का आह्वान

हालांकि न्यूजीलैंड के अधिकारियों ने अभी तक तौरंगा की घटना पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के उनके वादे के बीच सिख नेताओं ने सुरक्षा की मांग तेज कर दी है।

समुदाय के नेताओं का कहना है कि हाका प्रदर्शन और सिख जुलूस के बीच बार-बार होने वाले ये टकराव धार्मिक स्वतंत्रता के लिए बड़ा खतरा हैं। उन्होंने न्यूजीलैंड प्रशासन और भारत सरकार, दोनों से अपील की है कि भविष्य में ऐसे सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों को बिना किसी धमकी या रुकावट के संपन्न कराने के लिए एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जाए।

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