Loading Now

माघ मेला विवाद 2026: शंकराचार्य और योगी सरकार के बीच बढ़ी तकरार

माघ मेला विवाद 2026

माघ मेला विवाद 2026 के बीच प्रयागराज के संगम तट पर धर्म और राजनीति का एक ऐसा टकराव देखने को मिल रहा है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पिछले 6 दिनों से कड़ाके की ठंड में धरने पर बैठे हैं। उत्तर प्रदेश शासन और प्रशासन के रवैये से आहत शंकराचार्य ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा है। उन्होंने एक गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा, “क्या हम उनके रहम पर जी रहे हैं?”

साधु वेश और गोहत्या: शंकराचार्य का कालनेमि वाला प्रहार

सनातन धर्म में ‘कालनेमि’ के बयान पर मचे घमासान के बीच शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने बेहद तीखा कटाक्ष किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘कालनेमि’ वाले बयान का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, “वेश तो साधु का है लेकिन गोहत्या हो रही है। अब आप बताइए कि असल में कालनेमि कौन है?

” शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि साधु के वस्त्र पहन लेने मात्र से कोई धर्मरक्षक नहीं हो जाता, यदि उसके राज में गोमाता का रक्त बह रहा हो। उन्होंने यह बयान योगी सरकार की उन नीतियों के विरोध में दिया है जिसे वे गोवंश के लिए असुरक्षित मानते हैं।

इसे भी पढ़े :-प्रयागराज माघ मेला 2026: शंकराचार्य का अपमान और मणिकर्णिका विवाद

हिंदू धर्म में ‘खिलाफत’ परंपरा लाने की कोशिश का आरोप

शंकराचार्य ने एक बड़ा सैद्धांतिक मुद्दा उठाते हुए कहा कि आज हिंदू धर्म के भीतर ‘खिलाफत’ की परंपरा थोपने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने तर्क दिया, “मुसलमानों में धर्मगुरु ही खलीफा यानी देश का मुखिया होता है। लेकिन सनातन परंपरा में हमेशा से राजा और धर्मगुरु अलग-अलग रहे हैं।

हमारे यहाँ शाही गुरु की परंपरा थी, राजा खुद गुरु नहीं होता था।” उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में जो देश का मुखिया है, वही धर्मगुरु बनने की कोशिश कर रहा है, जो कि हिंदू धर्म को कमजोर करने की एक सोची-समझी साजिश है।

18 जनवरी की वो घटना और पालकी का अपमान

पूरे माघ मेला विवाद 2026 की शुरुआत 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन हुई। उस दिन शंकराचार्य अपनी पालकी में बैठकर संगम की ओर पवित्र स्नान के लिए जा रहे थे। पुलिस ने उनकी पालकी को रोक दिया और उनसे पैदल चलने को कहा। जब शंकराचार्य के शिष्यों ने विरोध किया, तो पुलिस और समर्थकों के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई।

आरोप है कि पुलिस ने शंकराचार्य की पालकी को संगम से 1 किलोमीटर दूर तक घसीटा, जिससे पालकी का छज्जा टूट गया। पुलिस ने कई शिष्यों को हिरासत में लिया और पुलिस चौकी पर एक साधु की पिटाई भी की।

योगी और मौर्य के बीच बंटा हुआ सरकारी रुख

इस विवाद ने उत्तर प्रदेश सरकार के भीतर भी दो अलग-अलग सुर पैदा कर दिए हैं। जहाँ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस विरोध की आलोचना करते हुए इसे सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश बताया और ‘कालनेमि’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया, वहीं डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने सुलह का रास्ता अपनाया।

मौर्य ने कहा कि उन्होंने साधु के सामने सिर झुकाया है और उनसे विवाद खत्म कर संगम में डुबकी लगाने का अनुरोध किया है। हालांकि, शंकराचार्य ने मौर्य के अनुरोध पर कहा कि यह भाजपा की शुरुआती भावना को तो दिखाता है, लेकिन आज की भाजपा जनता को स्वीकार्य नहीं है।

इसे भी पढ़े :-“दिल्ली: यौन शोषण आरोपी स्वयंभू धर्मगुरु फरार पर लुकआउट नोटिस”

रामभद्राचार्य और प्रशासन के नोटिस पर तीखा जवाब

जब जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने प्रशासन का बचाव करते हुए कहा कि नोटिस देकर सही किया गया है, तो शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कड़ा पलटवार किया। उन्होंने कहा, “उनके बारे में बात मत करो, वह अपनी दोस्ती निभा रहे हैं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि परंपरा इज्जत से नहाने की होती है, बेइज्जती सहकर स्नान करने की नहीं।

माघ मेला विवाद 2026 के तहत प्रशासन ने उन्हें नोटिस जारी कर उनकी पहचान और पद पर भी सवाल उठाए हैं, जिसे उन्होंने करोड़ों हिंदुओं की आस्था का अपमान बताया है।

विपक्ष की एकजुटता और कांग्रेस का मौन व्रत

शंकराचार्य के समर्थन में अब विपक्षी दल भी उतर आए हैं। उत्तराखंड कांग्रेस यूनिट ने घोषणा की है कि वे मंदिरों में ‘मौन व्रत’ रखेंगे। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी माघ मेले पहुंचकर स्वामी जी का समर्थन किया।

संजय सिंह ने कहा, “यह बड़े दुर्भाग्य की बात है कि जो लोग अपनी डिग्री नहीं दिखा पाए, वे शंकराचार्य से उनकी पहचान का सबूत मांग रहे हैं।” उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस बदसलूकी के लिए तुरंत माफी मांगें।

बिगड़ती सेहत के बावजूद जारी है सत्याग्रह

शुक्रवार को धरने के छठे दिन शंकराचार्य की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें तेज बुखार और सांस लेने में तकलीफ होने लगी, जिसके बाद उन्हें अपनी वैनिटी वैन में जाना पड़ा। हालांकि, कुछ घंटों बाद वे फिर बाहर आए और अपने रथ पर बैठकर धरना जारी रखा।

उन्होंने साफ कर दिया है कि उनकी मौनी अमावस्या की पूजा तब तक अधूरी है जब तक सरकार उनसे माफी नहीं मांग लेती। माघ मेला विवाद 2026 अब केवल एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि धर्म और सत्ता के बीच के गहरे टकराव का प्रतीक बन गया है।

इसे भी पढ़े :-मनुस्मृति को 80% हिन्दू समाज नहीं मानता है मुख्य धार्मिक पुस्तक!

सनातन की मर्यादा और भविष्य का सवाल

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का यह आंदोलन सनातन धर्म की प्राचीन मर्यादाओं को बचाने की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है।

उनका कहना है कि जो लोग हिंदू धर्म में ‘खिलाफत’ जैसी व्यवस्था लाकर राजा को ही गुरु बनाना चाहते हैं, वही धर्म के असली दुश्मन हैं। फिलहाल संगम की रेती पर तनाव बरकरार है और सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि योगी सरकार इस धार्मिक संकट का समाधान कैसे निकालती है।

इसे भी पढ़े :-अयोध्या दीपोत्सव: 26 लाख दीयों से बना गिनिज वर्ल्ड रिकॉर्ड दीपोत्सव

Spread the love

Post Comment

You May Have Missed