बजट 2026 की बड़ी बातें: टैक्स में राहत और मैन्युफैक्चरिंग पर जोर
बजट 2026 की बड़ी बातें यूनियन फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने रविवार को लोकसभा में फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए यूनियन बजट पेश किया। यह न केवल उनके कार्यकाल का लगातार नौवां बजट था, बल्कि इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि सालाना बजट रविवार के दिन पेश किया गया।
सीतारमण ने इसे ‘कर्तव्य भवन’ में तैयार होने वाला पहला बजट बताते हुए तीन मुख्य गाइडिंग ‘कर्तव्यों’ को रेखांकित किया। ये कर्तव्य आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक दिशा तय करने का काम करेंगे।
पहले कर्तव्य का उद्देश्य आर्थिक विकास की गति को बढ़ाना और वैश्विक अस्थिरता के बीच लचीलापन लाना है, जबकि दूसरा कर्तव्य नागरिकों की क्षमता निर्माण और उन्हें विकास यात्रा में सक्रिय भागीदार बनाने पर केंद्रित है।
नीतिगत निरंतरता और टैक्स कम्प्लायंस में बड़े सुधार
इस बजट को नीतिगत स्थिरता का प्रतीक माना जा रहा है, जिसमें अचानक बदलाव की जगह दीर्घकालिक आर्थिक प्राथमिकताओं पर ध्यान दिया गया है। बजट 2026 की बड़ी बातें साझा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसकी सराहना की।
मोदी ने कहा कि यह एक ऐसा अनोखा बजट है जो फिस्कल घाटे को कम करने, महंगाई को नियंत्रित करने और उच्च कैपिटल एक्सपेंडिचर व ग्रोथ का शानदार मेल है।
इसके साथ ही, इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) के नियमों में भी कई बदलाव किए गए हैं, ताकि कम्प्लायंस को आसान बनाया जा सके। अब छोटी-मोटी गलतियों के लिए पेनल्टी कम होगी और सुधार के लिए समयसीमा बढ़ाई जाएगी, जिससे मध्यम वर्ग को काफी सुविधा मिलने की उम्मीद है।
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टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत: ITR डेडलाइन और TCS में कटौती
टैक्स के मोर्चे पर वित्त मंत्री ने आम आदमी और छोटे टैक्सपेयर्स के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। सबसे बड़ी राहत यह है कि ITR-1 और ITR-2 फाइल करने की अंतिम तारीख अब बढ़ाकर 31 जुलाई कर दी गई है।
इसके अलावा, विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों के परिवारों को बड़ी राहत देते हुए एजुकेशन के लिए भेजे गए पैसे पर TCS (टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स) को 5 प्रतिशत से घटाकर मात्र 2 प्रतिशत कर दिया गया है।
सरकार का उद्देश्य टैक्स सिस्टम को अधिक सरल और ‘टैक्सपेयर-फ्रेंडली’ बनाना है, ताकि बिना किसी भ्रम के लोग अपना रिटर्न समय पर भर सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि इन कदमों से टैक्सपेयर्स और विभाग के बीच भरोसा मजबूत होगा।
पुराने बनाम नए टैक्स सिस्टम का नया स्वरूप
हालांकि इस बार इनकम टैक्स स्लैब में किसी बड़े बदलाव की सीधी घोषणा नहीं हुई, लेकिन संशोधित ITR फाइलिंग की समयसीमा को मामूली शुल्क के साथ 31 मार्च तक बढ़ा दिया गया है। बजट 2026 की बड़ी बातें यह भी हैं कि नए टैक्स सिस्टम के तहत 4 लाख रुपये तक की आय अब पूरी तरह कर-मुक्त है।
पुराने सिस्टम में 2.5 लाख रुपये तक की आय पर कोई कर नहीं है, जबकि 10 लाख से ऊपर की आय पर 30 प्रतिशत टैक्स लागू है। नए सिस्टम में स्लैब को कुछ इस तरह व्यवस्थित किया गया है: 4-8 लाख (5%), 8-12 लाख (10%), 12-16 लाख (15%), 16-20 लाख (20%), 20-24 लाख (25%) और 24 लाख से अधिक पर 30% टैक्स। उल्लेखनीय है कि पिछले बजट में स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद 12.75 लाख रुपये तक की आय को टैक्स-फ्री किया गया था।
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इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का हुआ आगाज़
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती देने के लिए सरकार ने ₹40,000 करोड़ के भारी-भरकम आवंटन के साथ ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0’ लॉन्च करने का ऐलान किया है। सीतारमण ने स्पष्ट किया कि पहले चरण की सफलता के बाद अब फोकस सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट, मटेरियल की मैन्युफैक्चरिंग और फुल-स्टैक इंडियन इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) को विकसित करने पर होगा।
इस मिशन के जरिए भारत न केवल वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी स्थिति मजबूत करेगा, बल्कि महत्वपूर्ण आयात पर अपनी निर्भरता को भी काफी हद तक कम कर सकेगा। बजट 2026 की बड़ी बातें में यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में सबसे बड़ा और रणनीतिक निवेश माना जा रहा है।
रेयर-अर्थ कॉरिडोर और खनिज उत्पादन पर विशेष जोर
घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को विश्वस्तरीय बनाने के लिए सरकार ने रेयर-अर्थ मैग्नेट के उत्पादन हेतु एक समर्पित कॉरिडोर बनाने का फैसला किया है। यह कॉरिडोर ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में विकसित किया जाएगा।
दरअसल, पिछले साल दिसंबर में सरकार ने सिंटर्ड रेयर-अर्थ परमानेंट मैग्नेट के लिए ₹7,280 करोड़ की योजना को मंजूरी दी थी। अब इसका लक्ष्य सालाना 6,000 टन इंटीग्रेटेड मैग्नेट बनाने की क्षमता विकसित करना है। यह पहल रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में भारत की उत्पादन क्षमता को एक नए स्तर पर ले जाएगी।
बायोफार्मा शक्ति: स्वास्थ्य और इनोवेशन का नया अध्याय
स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव के लिए सरकार ने ₹10,000 करोड़ के ‘बायोफार्मा शक्ति’ कार्यक्रम की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य भारत को ग्लोबल बायोफार्मा मैन्युफैक्चरिंग बेस बनाना है।
वित्त मंत्री ने कहा कि यह प्रोग्राम मुख्य रूप से कैंसर, डायबिटीज और ऑटोइम्यून विकारों जैसी गैर-संचारी बीमारियों के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए रिसर्च और इनोवेशन पर ध्यान केंद्रित करेगा।
इसके अंतर्गत एक विशाल संस्थागत नेटवर्क बनाया जाएगा जो नई दवाओं की खोज और उत्पादन में तेजी लाएगा। बजट 2026 की बड़ी बातें स्वास्थ्य सुरक्षा की दृष्टि से बेहद अहम हैं क्योंकि यह ज्ञान और तकनीक के जरिए बेहतर स्वास्थ्य का विजन पेश करती हैं।
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फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस पर सख्ती और बाजार की उम्मीदें
जहाँ एक तरफ मध्यम वर्ग को TCS और ITR डेडलाइन में राहत दी गई है, वहीं दूसरी तरफ फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग को पहले से और अधिक महंगा कर दिया गया है। सरकार ने पिछले साल GST दरों को युक्तिसंगत बनाया था, और इस बार भी इंडस्ट्री बॉडीज स्टैंडर्ड डिडक्शन और लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स के बीच संतुलन की उम्मीद कर रही थीं।
बजट का कुल सार यह संकेत देता है कि सरकार का ध्यान राजकोषीय विवेक (Fiscal Prudence) और उच्च विकास दर के बीच एक महीन संतुलन बनाने पर है, जिससे भविष्य में एक मजबूत और समृद्ध भारत की नींव रखी जा सके।
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