मणिपुर को नया CM मिला युमनाम खेमचंद सिंह ने ली शपथ,राष्ट्रपति शासन हटा
पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में लगभग एक साल से जारी राजनीतिक अनिश्चितता का अंत हो गया है। बुधवार, 4 फरवरी 2026 को मणिपुर को नया CM मिला, जब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता युमनाम खेमचंद सिंह ने राज्य के 56वें मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। यह शपथ ग्रहण समारोह इम्फाल के लोक भवन में आयोजित किया गया, जहाँ राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने उन्हें शपथ दिलाई। खेमचंद सिंह की नियुक्ति गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा राज्य में लागू राष्ट्रपति शासन को तत्काल प्रभाव से हटाने की अधिसूचना जारी करने के कुछ ही घंटों बाद हुई है।
राष्ट्रपति शासन का अंत और अनुच्छेद 356 का निरस्तीकरण
मणिपुर में 13 फरवरी 2025 से लागू राष्ट्रपति शासन अब आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया है। भारत के राजपत्र (असाधारण) में प्रकाशित घोषणा के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान के अनुच्छेद 356(2) के तहत जारी उद्घोषणा को रद्द कर दिया है। यह कदम राज्य में लोकतांत्रिक व्यवस्था की बहाली की दिशा में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। गौरतलब है कि मई 2023 में भड़की जातीय हिंसा के बाद पैदा हुए प्रशासनिक संकट और तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने राज्य की कमान अपने हाथों में ले ली थी।
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कुकी और नागा समुदाय से दो उपमुख्यमंत्री
शांति और सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश देने के लिए नई सरकार के गठन में जातीय संतुलन का विशेष ध्यान रखा गया है। मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह (मैतेई समुदाय) के साथ दो उपमुख्यमंत्रियों ने भी शपथ ली है। कुकी समुदाय से बीजेपी विधायक नेमचा किपगेन और नागा पीपल्स फ्रंट (NPF) के विधायक एल. दिखो को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। इसके अलावा, बीजेपी के वरिष्ठ नेता गोविंददास कोंथौजम और नेशनल पीपल्स पार्टी (NPP) के के. लोकेन सिंह ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली है।
कौन हैं युमनाम खेमचंद सिंह?
62 वर्षीय युमनाम खेमचंद सिंह को बीजेपी के भीतर एक गैर-विवादास्पद और संयमित नेता के रूप में जाना जाता है। वे इम्फाल पश्चिम जिले के सिंगजामेई निर्वाचन क्षेत्र से दो बार के विधायक हैं।
- अनुभव: वे 2017 से 2022 तक मणिपुर विधानसभा के स्पीकर रहे।
- पिछली भूमिका: बीरेन सिंह सरकार के दूसरे कार्यकाल में उन्होंने शिक्षा, ग्रामीण विकास और पंचायती राज जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभाले।
- उपलब्धि: खेमचंद सिंह ताइक्वांडो में 5वीं डैन ब्लैक बेल्ट पाने वाले पहले भारतीय भी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी संगठनात्मक क्षमता और शांत स्वभाव राज्य के वर्तमान नाजुक हालातों में गुटबाजी को खत्म करने में मददगार साबित होंगे।
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चुनौतीपूर्ण रहा है मणिपुर का पिछला साल
मई 2023 में मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति (ST) दर्जे की मांग के विरोध में शुरू हुई हिंसा ने मणिपुर को गहरे जख्म दिए हैं। इस जातीय संघर्ष में अब तक कम से कम 260 लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग विस्थापित होकर राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। पिछले एक साल से विधानसभा निलंबित अवस्था में थी। बीरेन सिंह के इस्तीफे और विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव के बीच राष्ट्रपति शासन लगाना अनिवार्य हो गया था। अब नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती विस्थापितों का पुनर्वास और समुदायों के बीच विश्वास बहाली की है।
नई सरकार की प्राथमिकताएं: स्थिरता और न्याय
शपथ ग्रहण के बाद गृह विभाग का प्रभार संभालने वाले गोविंददास कोंथौजम ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था और स्थिरता लाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। हालांकि, राजनीतिक राह अभी भी कांटों भरी है। कई कुकी नागरिक समाज समूहों ने फिलहाल नई सरकार से दूरी बनाए रखने का फैसला किया है और एक अलग प्रशासनिक व्यवस्था की मांग पर अड़े हुए हैं। वहीं, मैतेई संगठनों का तर्क है कि विस्थापितों की सुरक्षित वापसी को पहली प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
भविष्य की राह और क्षेत्रीय शांति
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हस्ताक्षर के बाद बहाल हुई इस चुनी हुई सरकार से केंद्र को काफी उम्मीदें हैं। 60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा का कार्यकाल 2027 तक है, ऐसे में खेमचंद सिंह सरकार के पास शांति बहाल करने के लिए लगभग एक साल का समय है। एनडीए के घटक दलों ने एकजुटता दिखाते हुए विश्वास जताया है कि लोकप्रिय शासन की वापसी से मणिपुर के विकास की गति फिर से तेज होगी। मणिपुर को नया CM मिला है, लेकिन वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी जब राज्य के पहाड़ों और घाटियों में फिर से शांति का सूरज उगेगा।
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