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संभल हिंसा केस अपडेट: FIR के आदेश पर हाई कोर्ट की रोक

संभल हिंसा केस अपडेट

संभल हिंसा केस अपडेट के इस बड़े घटनाक्रम में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मंगलवार को संभल के पूर्व सर्कल ऑफिसर (CO) अनुज चौधरी और अन्य पुलिसकर्मियों को बड़ी राहत दी है। जस्टिस समित गोपाल की पीठ ने निचली अदालत यानी संभल की सीजेएम (CJM) कोर्ट के उस आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है, जिसमें पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया गया था।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की अगली सुनवाई अब 24 फरवरी को होगी। यह याचिका अनुज चौधरी और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संयुक्त रूप से दायर की गई थी, जिसमें निचली अदालत के फैसले को कई कानूनी आधारों पर चुनौती दी गई थी।

राज्य सरकार की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल मनीष गोयल ने पक्ष रखा और बताया कि राज्य ने भी इस आदेश के खिलाफ अपनी अपील दाखिल की है।

संभल CJM कोर्ट का वह फैसला जिसने बढ़ाई थी अधिकारियों की मुश्किलें

इस कानूनी लड़ाई की शुरुआत 9 जनवरी, 2026 को हुई थी, जब संभल के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर ने एक बड़ा फैसला सुनाया था। उन्होंने यामीन नामक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए तत्कालीन CO अनुज चौधरी, इंस्पेक्टर अनुज तोमर और 12 अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया था।

CJM सुधीर ने अपने 11 पन्नों के आदेश में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि पुलिस अपनी आपराधिक गतिविधियों को छिपाने के लिए ‘ऑफिशियल ड्यूटी’ की आड़ नहीं ले सकती।

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए यह माना था कि निहत्थी भीड़ पर गोली चलाना किसी भी तरह से ड्यूटी का हिस्सा नहीं माना जा सकता और सच्चाई का पता केवल निष्पक्ष जांच से ही लग सकता है।

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यामीन के आरोपों और ‘आलम’ की आपबीती ने बदला था कानूनी रुख

शिकायतकर्ता यामीन, जो संभल के नखासा इलाके के खग्गू सराय के रहने वाले हैं, ने कोर्ट में गुहार लगाई थी कि उनका 24 वर्षीय बेटा आलम 24 नवंबर, 2024 को रस्क और बिस्कुट बेचने के लिए घर से निकला था।

यामीन का आरोप है कि जब आलम शाही जामा मस्जिद के पास पहुंचा, तो पुलिस ने जान से मारने की नीयत से फायरिंग की, जिसमें आलम को गोली लग गई।

वकील चौधरी अख्तर हुसैन ने कोर्ट में तर्क दिया कि उनका मुवक्किल पुलिस के खौफ की वजह से छिपकर अपना इलाज करा रहा था। इसी शिकायत के आधार पर संभल हिंसा केस अपडेट के तहत पुलिस अधिकारियों को आरोपी बनाया गया था, जिन्हें अब हाई कोर्ट से अंतरिम राहत मिल गई है।

24 नवंबर 2024 की वह काली सुबह जब सर्वे के दौरान भड़की थी हिंसा

संभल में हिंसा की जड़ें 19 नवंबर, 2024 को तब जमीं जब सिविल जज (सीनियर डिवीजन) आदित्य सिंह ने शाही जामा मस्जिद के सर्वे का आदेश दिया। हिंदू पक्ष का दावा था कि यह स्थान मूल रूप से हरिहर मंदिर था, जिसे 1529 में बाबर ने मस्जिद में तब्दील कर दिया था।

24 नवंबर को जब सर्वे टीम दोबारा मस्जिद पहुंची, तो वहां भारी भीड़ जमा हो गई। देखते ही देखते हालात बेकाबू हो गए और भीड़ ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया।

इस हिंसक झड़प में गोली लगने से 4 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई, CO अनुज चौधरी और 29 अन्य पुलिसकर्मी घायल हुए थे। पुलिस ने इस मामले में सांसद जियाउर्रहमान बर्क समेत 79 लोगों को गिरफ्तार किया था।

हाई कोर्ट में मैराथन बहस और प्रशासन का कड़ा रुख

इलाहाबाद हाई कोर्ट में सोमवार और मंगलवार को इस मामले पर करीब दो घंटे तक मैराथन बहस चली। संभल हिंसा केस अपडेट के कानूनी पहलुओं को समझाते हुए यूपी सरकार ने तर्क दिया कि घटना की न्यायिक जांच पहले ही की जा चुकी है, इसलिए नई FIR का कोई औचित्य नहीं है।

एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने भी स्पष्ट किया था कि पुलिस विभाग इस FIR के आदेश के खिलाफ मजबूती से अपील करेगा। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद यह पाया कि याचिकाओं को एक साथ मिलाकर सुना जाना जरूरी है।

इसी के साथ शिकायतकर्ता के वकील को भी अपना पक्ष तैयार करने के लिए समय दिया गया है। फिलहाल, अनुज चौधरी जो वर्तमान में फिरोजाबाद में तैनात हैं, उन्हें इस कानूनी राहत से बड़ी संजीवनी मिली है।

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आदेश देने वाले जज का तबादला और नई न्यायिक नियुक्तियां

इस मामले में एक और चौंकाने वाला मोड़ 20 जनवरी, 2026 को आया, जब इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 14 जजों का तबादला कर दिया। इस सूची में संभल के CJM विभांशु सुधीर का नाम भी शामिल था, जिन्होंने पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR का आदेश दिया था।

विभांशु सुधीर को सुल्तानपुर में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) बनाकर भेजा गया है। उनकी जगह आदित्य सिंह को संभल का नया CJM नियुक्त किया गया है।

गौरतलब है कि आदित्य सिंह वही जज हैं जिन्होंने सबसे पहले जामा मस्जिद के सर्वे का आदेश दिया था। इस फेरबदल को लेकर कानूनी गलियारों में काफी चर्चाएं रही हैं, हालांकि इसे नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है।

SIT की जांच और चार्जशीट के दायरे में आए कई दिग्गज

संभल हिंसा की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। 18 जून को SIT ने करीब 1,128 पन्नों की एक विस्तृत चार्जशीट दाखिल की थी। इस चार्जशीट में समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क समेत 23 लोगों को आरोपी बनाया गया है।

हालांकि, शुरुआत में चर्चाओं में रहे विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल का नाम इस चार्जशीट में शामिल नहीं किया गया है।

संभल हिंसा केस अपडेट में पुलिस ने कुल 12 FIR दर्ज की थीं, जिनमें 40 नामजद और करीब 2,750 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया था। प्रशासन अब भी वीडियो फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अन्य दंगाइयों की पहचान करने में जुटा है।

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भविष्य की कानूनी राह और 24 फरवरी की तारीख पर टिकी निगाहें

अब पूरे उत्तर प्रदेश की नजरें 24 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। हाई कोर्ट ने पांच हफ्ते का समय देते हुए अंतरिम राहत को बरकरार रखा है। इस दौरान पुलिस और सरकार को अपनी दलीलें और पुख्ता करनी होंगी, वहीं पीड़ित पक्ष यामीन के वकील भी नई रणनीति के साथ कोर्ट में पेश होंगे।

संभल का यह मामला केवल एक हिंसा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह धार्मिक स्थल के दावों और पुलिसिया कार्रवाई की मर्यादा के बीच एक बड़ा कानूनी उदाहरण बनता जा रहा है। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए संभल प्रशासन अब भी अलर्ट पर है और जामा मस्जिद इलाके में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम बने हुए हैं।

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