नरवणे की डायरी का क्या है सच? पब्लिशर पेंगुइन को पुलिस नोटिस
पब्लिशर पेंगुइन को पुलिस नोटिस जारी होने के साथ ही पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कानूनी पेचीदगियों में उलझ गया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने बुधवार सुबह पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (PRHI) को औपचारिक रूप से नोटिस भेजकर इस संस्मरण के कथित सर्कुलेशन पर जवाब माँगा है।
यह पूरा मामला तब गरमाया जब पूर्व आर्मी चीफ की अभी तक पब्लिश न हुई किताब की सॉफ्ट कॉपी और पीडीएफ वर्जन सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर अवैध रूप से घूमने लगे।
पुलिस अब इस बात की गहनता से जांच कर रही है कि आखिर यह अनऑथराइज्ड सॉफ्ट कॉपी किसने और कैसे लीक की। इस संबंध में सोमवार को ही ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट की धाराओं, आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy) और अन्य अपराधों के तहत एक एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसके बाद बुधवार को यह बड़ी कार्रवाई हुई है।
स्पेशल सेल की जांच और पब्लिशर से तीखे सवाल
दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने जांच के दायरे को बढ़ाते हुए पब्लिशिंग हाउस से कई गंभीर सवाल पूछे हैं। एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने स्पष्ट किया कि पुलिस यह चेक कर रही है कि पब्लिशिंग हाउस इस पूरी प्रक्रिया के दौरान क्या कर रहा था और यह किताब बिना किसी आधिकारिक मंजूरी के सार्वजनिक डोमेन में कैसे पहुँच गई। पब्लिशर पेंगुइन को पुलिस नोटिस देकर उन सभी तकनीकी और कानूनी पहलुओं पर जवाब माँगा गया है जो मैन्युस्क्रिप्ट की सुरक्षा से जुड़े थे।
अधिकारियों के अनुसार, स्पेशल सेल ने पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया से विस्तृत जानकारी माँगी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि डिजिटल फॉर्मेट में मैन्युस्क्रिप्ट के बिना इजाजत प्रसार के पीछे कौन सी कड़ियां जुड़ी हैं। पुलिस ने साफ किया है कि यह जांच का हिस्सा है और पब्लिशर को सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।
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संसद में गूँजा नरवणे की यादों का विवाद
यह अनपब्लिश्ड संस्मरण उस समय विवाद के केंद्र में आ गया जब 2 फरवरी को संसद में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस किताब के कुछ हिस्सों का जिक्र किया। इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही में बार-बार रुकावटें आईं। राहुल गांधी ने सदन में जनरल नरवणे की यादों के “प्री-प्रिंट बुक” वर्जन से कोट करने की कोशिश की, जिस पर ट्रेजरी बेंच के सदस्यों ने कड़ी आपत्ति जताई।
इस पर लोकसभा स्पीकर ने फैसला सुनाया कि विपक्ष के नेता को सदन में बिना छपी और अनऑथेंटिकेटेड सामग्री का हवाला नहीं देना चाहिए। राहुल गांधी ने संसद के बाहर भी यह दावा किया कि किताब ऑनलाइन बिक्री के लिए उपलब्ध है और उन्होंने जनरल नरवणे के एक पुराने ट्वीट का हवाला देते हुए पब्लिशर के दावों पर सवाल खड़े किए।
पब्लिशर पेंगुइन की सफाई और कानूनी चेतावनी
विवाद के बीच पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने सोमवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की थी। पब्लिशर ने जोर देकर कहा कि उसके पास जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के संस्मरण ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ के एकमात्र और एक्सक्लूसिव पब्लिशिंग राइट्स हैं। पब्लिशर पेंगुइन को पुलिस नोटिस मिलने से पहले ही संस्थान ने यह साफ कर दिया था कि किताब अभी पब्लिकेशन में नहीं गई है और न ही इसकी कोई भी कॉपी—प्रिंट या डिजिटल फॉर्म में—बेची या बांटी गई है।
पब्लिशर ने चेतावनी दी कि वर्तमान में सर्कुलेशन में चल रहा कोई भी वर्जन, चाहे वह पीडीएफ हो या ऑनलाइन, पूर्णतः कॉपीराइट का उल्लंघन माना जाएगा। मंगलवार को एक और बयान में उन्होंने स्पष्ट किया कि प्री-ऑर्डर लेना एक स्टैंडर्ड प्रैक्टिस है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि किताब पब्लिश हो चुकी है।
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आपराधिक साजिश की धाराओं से बढ़ी मुश्किलें
न्यूज़ एजेंसी ANI के सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने इस मामले में दर्ज एफआईआर में आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy) की धाराएं जोड़ दी हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि पुलिस इसे केवल एक साधारण डेटा लीक नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश के रूप में देख रही है।
पब्लिशर पेंगुइन को पुलिस नोटिस जारी होने के बाद अब जांच इस दिशा में मुड़ गई है कि क्या इस लीक के पीछे कोई संगठित प्रयास था। पुलिस का मानना है कि मैन्युस्क्रिप्ट के अनऑथराइज्ड वर्जन का सोशल मीडिया पर फैलना सुरक्षा और गोपनीयता के लिहाज से गंभीर मामला है, खासकर जब इसमें देश के पूर्व सेना प्रमुख के अनुभव शामिल हों।
राहुल गांधी बनाम बीजेपी: राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
इस कानूनी कार्रवाई ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि या तो जनरल नरवणे झूठ बोल रहे हैं या पब्लिशर, क्योंकि किताब अमेजन पर प्री-ऑर्डर के लिए लिस्टेड थी। उन्होंने कहा कि उन्हें पेंगुइन से ज्यादा जनरल नरवणे पर भरोसा है और आरोप लगाया कि किताब में ऐसी बातें हैं जो सरकार के लिए असहज हो सकती हैं।
दूसरी ओर, बीजेपी ने राहुल गांधी पर संसदीय नियमों को तोड़ने का आरोप लगाया। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि राहुल गांधी खुद को नियमों से ऊपर समझते हैं, जबकि सुधांशु त्रिवेदी ने उन पर ‘झूठ और फिक्शन’ के जरिए सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया। बीजेपी का कहना है कि अनपब्लिश्ड मटेरियल को सदन में कोट करना गलत परंपरा है।
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जनरल नरवणे का पक्ष और वर्तमान स्टेटस
पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पब्लिशर के बयान को शेयर करते हुए पुष्टि की कि उनकी मेमॉयर अभी तक आधिकारिक रूप से पब्लिश नहीं हुई है।
उन्होंने साफ किया कि “यह किताब का स्टेटस है” और इसे अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। पब्लिशर ने भी दोहराया कि किताब अभी जरूरी मंजूरियों का इंतजार कर रही है। पब्लिशर और लेखक दोनों का स्टैंड एक ही है कि जो भी कॉपियां इंटरनेट पर घूम रही हैं, वे अवैध हैं और उनका उनके संस्थान से कोई लेना-देना नहीं है।
जांच का अगला चरण और भविष्य की कार्रवाई
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल अब पब्लिशर से मिलने वाले जवाबों का इंतजार कर रही है। पब्लिशर से जांच में पूरी तरह सहयोग करने को कहा गया है। पुलिस यह भी ट्रैक करने की कोशिश कर रही है कि डिजिटल फाइल का ओरिजिन पॉइंट क्या था और इसे पहली बार किस आईपी एड्रेस या सोशल मीडिया अकाउंट से साझा किया गया।
पब्लिशर पेंगुइन को पुलिस नोटिस की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कुछ और लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है। फिलहाल, ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ के पब्लिकेशन पर रोक जैसी स्थिति बनी हुई है जब तक कि यह कानूनी जांच और सुरक्षा संबंधी क्लीयरेंस की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती।
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