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राहुल गांधी के मोदी पर तीखे वार पड़े भारी, अब प्रिविलेज नोटिस झेलेंगे राहुल?

प्रिविलेज नोटिस

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार बजट चर्चा के दौरान बेबुनियाद बयान देने और लोकसभा को गुमराह करने के लिए विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ प्रिविलेज नोटिस (विशेषाधिकार प्रस्ताव) लाएगी। पत्रकारों से बात करते हुए रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ बेकार और झूठे आरोप लगाए हैं। मंत्री ने सवाल उठाया कि श्री गांधी ने बिना किसी पूर्व सूचना के किस आधार पर इतने गंभीर आरोप लगाए?

उन्होंने जोर देकर कहा कि आरोपों को साबित करने के लिए लोकसभा और राज्यसभा में प्रक्रिया और कार्य संचालन के बहुत स्पष्ट नियम हैं। रिजिजू ने कहा कि उन्होंने राहुल गांधी से सदन में कही गई बातों को सत्यापित करने का अनुरोध किया है, लेकिन उन्होंने बिना किसी नोटिस के मंत्री हरदीप सिंह पुरी के खिलाफ भी आरोप लगाए, जिसे सरकार विशेषाधिकार का गंभीर उल्लंघन मानती है।

इंडिया-US ट्रेड डील पर ‘भारत माता को बेचने’ के आरोप से हंगामा

संसद के भीतर चल रहे सत्ता पक्ष और विपक्ष के टकराव के बीच भारतीय जनता पार्टी ने गुरुवार (12 फरवरी) को राहुल गांधी के खिलाफ प्रिविलेज नोटिस फाइल करने की पूरी योजना बना ली है। केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने बजट चर्चा में कोई उपयोगी ठोस योगदान देने के बजाय केवल झूठे दावे किए।

दरअसल, यूनियन बजट पर बहस के दौरान गांधी ने आरोप लगाया था कि सरकार ने इंडिया-US अंतरिम ट्रेड डील के जरिए “भारत माता को बेच दिया है” और यह एक “थोक सरेंडर” है। उन्होंने दावा किया कि इस सौदे में भारत की ऊर्जा सुरक्षा अमेरिका को सौंप दी गई और किसानों के हितों से समझौता किया गया। राहुल गांधी ने तीखे लहजे में कहा था कि अगर इंडिया ब्लॉक की सरकार होती, तो वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बराबरी के स्तर पर बात करते।

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प्रिविलेज नोटिस: सदन को गुमराह करने और असंसदीय व्यवहार का मुद्दा

किरेन रिजिजू ने सदन में राहुल गांधी के व्यवहार पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि वे अपना भाषण देने के बाद अक्सर सदन छोड़कर भाग जाते हैं और मंत्रियों का जवाब नहीं सुनते। उन्होंने कहा, “हम सदन को गुमराह करने और बेबुनियाद बयान देने के लिए राहुल गांधी के खिलाफ प्रिविलेज नोटिस फाइल करने जा रहे हैं।” रिजिजू ने स्पष्ट किया कि कोई भी इस देश को न तो बेच सकता है और न ही खरीद सकता है।

उन्होंने स्पीकर से अनुरोध किया है कि राहुल गांधी के भाषण से असंसदीय शब्द और बिना सबूत वाले आरोपों को हटा दिया जाना चाहिए। लोकसभा में 2 फरवरी से ही गतिरोध बना हुआ है, जिसकी शुरुआत तब हुई थी जब चेयर ने राहुल गांधी को पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित यादों (मेमॉयर) का हवाला देने से रोक दिया था।

स्पीकर के चैंबर में गाली-गलौज और विपक्ष का पलटवार

संसदीय कार्य मंत्री ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि 20 से 25 कांग्रेस सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के चैंबर के भीतर उनके साथ गाली-गलौज की। रिजिजू का दावा है कि इस दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल वहां मौजूद थे, लेकिन उन्होंने सांसदों को रोकने की कोशिश नहीं की।

दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सरकार के इन कदमों की आलोचना की है। मसूद ने पलटवार करते हुए कहा कि सरकार बहस से भाग रही है और राहुल गांधी के सवालों का उनके पास कोई जवाब नहीं है। उन्होंने दावा किया कि जब राहुल गांधी से तथ्यों को प्रमाणित करने के लिए कहा गया, तो उन्होंने तुरंत सहमति जताई थी, लेकिन सत्ता पक्ष के लोग ही पीछे हट गए।

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जनरल नरवणे की ‘अनपब्लिश्ड’ किताब पर बढ़ता विवाद

राहुल गांधी और सरकार के बीच विवाद की एक बड़ी वजह पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ है। राहुल गांधी ने सदन में इस किताब के उन अंशों का जिक्र किया था जिसमें कथित तौर पर दावा किया गया है कि अगस्त 2020 में लद्दाख संकट के दौरान शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व सेना को स्पष्ट निर्देश देने में विफल रहा था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस पर आपत्ति जताई थी कि एक अप्रकाशित किताब को संसद में उद्धृत नहीं किया जा सकता।

इसके बाद राहुल गांधी संसद परिसर में किताब की एक हार्डबाउंड कॉपी लेकर पहुंचे और दावा किया कि यह किताब अस्तित्व में है और वे इसे प्रधानमंत्री को देना चाहते थे। हालांकि, प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस ने स्पष्ट किया है कि किताब अभी प्रकाशित या वितरित नहीं की गई है।

दिल्ली पुलिस की जांच और प्रकाशक को नोटिस

दिल्ली पुलिस ने इस मामले में सक्रियता दिखाते हुए पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया को नोटिस भेजा है। पुलिस जनरल नरवणे की यादों की प्रीप्रिंट कॉपी के कथित सर्कुलेशन की जांच कर रही है और इसमें ‘आपराधिक साजिश’ की धाराएं भी जोड़ी गई हैं। पुलिस का मानना है कि पांडुलिपि का लीक होना और उसका पीडीएफ फॉर्म में अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर घूमना एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा हो सकता है।

जांचकर्ताओं का कहना है कि यह किसी व्हिसलब्लोअर का काम नहीं है, बल्कि रक्षा मंत्रालय से जरूरी क्लीयरेंस न मिलने की स्थिति में किया गया एक जानबूझकर किया गया कृत्य हो सकता है। प्रकाशक से पूछा गया है कि उन्होंने लीक का पता चलने पर तुरंत पुलिस से संपर्क क्यों नहीं किया।

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किताब के ‘लीक’ की तलाश

स्पेशल सेल की जांच में यह बात सामने आई है कि किताब के लीक वर्शन को पहले ब्रिटिश इंडियन ओशन टेरिटरी के ‘.io’ डोमेन पर अपलोड किया गया था। पुलिस अब अमेरिका, कनाडा, यूके और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में इस प्री-प्रिंट कॉपी की कथित बिक्री या वितरण की जांच कर रही है।

पुलिस उस 13-अंकों वाले ISBN (इंटरनेशनल स्टैंडर्ड बुक नंबर) का भी विश्लेषण कर रही है जो लीक हुए वर्शन पर दिखाई दे रहा है। पेंगुइन रैंडम हाउस ने बार-बार साफ किया है कि पब्लिशिंग राइट्स उनके पास हैं और उन्होंने इसे आधिकारिक तौर पर रिलीज नहीं किया है। इस पूरे प्रकरण ने सरकार और विपक्ष के बीच की खाई को और चौड़ा कर दिया है।

संसदीय मर्यादा और विशेषाधिकार हनन का भविष्य

वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट है कि सत्ता पक्ष राहुल गांधी को घेरने के लिए प्रिविलेज नोटिस का सहारा ले रहा है। किरेन रिजिजू के अनुसार, राहुल गांधी ने बिना एडवांस नोटिस दिए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर जो आरोप लगाए, वह संसदीय शिष्टाचार का बड़ा उल्लंघन है।

भाजपा का रुख साफ है कि वे राहुल गांधी के ‘झूठ’ का मुकाबला सदन के भीतर नोटिस देकर और सदन के बाहर राजनीतिक रूप से करेंगे।

अब सबकी नजरें लोकसभा स्पीकर की कार्रवाई पर टिकी हैं कि वे इस प्रिविलेज मोशन को किस तरह आगे बढ़ाते हैं। इस विवाद ने न केवल बजट सत्र की कार्यवाही को प्रभावित किया है, बल्कि देश की सुरक्षा और विदेशी व्यापार नीति जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी एक बड़ी राजनीतिक बहस छेड़ दी है।

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