साकेत श्रीनिवासैया की मौत: अमेरिका में लापता भारतीय छात्र का मिला शव
अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहाँ एक हफ्ते से लापता 22 साल के भारतीय छात्र का शव बरामद किया गया है। सैन फ़्रांसिस्को में भारतीय कॉन्सुलैट ने शनिवार को आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया, बर्कले (UC Berkeley) के छात्र साकेत श्रीनिवासैया की मौत हो गई है।
साकेत, जो कर्नाटक के तुमकुरु के रहने वाले थे, पिछले सोमवार 9 फरवरी से लापता थे। स्थानीय पुलिस और बचाव दलों ने कई दिनों तक सोनार, ड्रोन और डाइवर्स की मदद से गहन सर्च ऑपरेशन चलाया, जिसके बाद शनिवार दोपहर करीब 2 बजे अलामेडा काउंटी शेरिफ ऑफिस के डाइवर्स ने लेक अंज़ा से उनकी बॉडी बरामद की।
कॉन्सुलैट ने परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है और पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत लाने के लिए सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने का आश्वासन दिया है।
IIT मद्रास से बर्कले तक का सफर: एक होनहार इंजीनियर का एकेडमिक बैकग्राउंड
साकेत श्रीनिवासैया एक बेहद मेधावी छात्र थे, जिनका शैक्षणिक रिकॉर्ड भारत और अमेरिका दोनों जगह शानदार रहा। उनके लिंक्डइन प्रोफ़ाइल के अनुसार, वे यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया, बर्कले में केमिकल और बायोमॉलिक्यूलर इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में मास्टर्स (MS) के छात्र थे।
अमेरिका जाने से पहले, उन्होंने भारत के प्रतिष्ठित संस्थान IIT मद्रास से 2025 में केमिकल इंजीनियरिंग में अपनी बी.टेक डिग्री पूरी की थी। साकेत को सॉफ्ट और एक्टिव मटीरियल, सेमीकंडक्टर और एडवांस्ड मटीरियल में ‘डीप-टेक इनोवेशन’ का गहरा जुनून था। उनके सहपाठियों और शिक्षकों के बीच वे एक समर्पित स्कॉलर के रूप में जाने जाते थे।
6 फीट 1 इंच लंबे साकेत की आँखों में सुनहरे भविष्य के सपने थे, लेकिन बर्कले हिल्स की वादियों में उनका यह सफर बहुत ही दर्दनाक मोड़ पर खत्म हुआ।
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9 फरवरी से शुरू हुआ लापता होने का रहस्य और बैकपैक की बरामदगी
साकेत के लापता होने की खबर ने 9 फरवरी को हड़कंप मचा दिया था। उनके पिता श्रीनिवासैया ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे से आखिरी बार 9 फरवरी को बात की थी, जिसके बाद से साकेत का कोई सुराग नहीं मिला। जांच तब और तेज़ हो गई जब उनका बैकपैक, जिसमें उनका पासपोर्ट और लैपटॉप था, बर्कले कैंपस के पास पार्क हिल्स इलाके में एक घर के दरवाजे पर लावारिस हालत में मिला।
इस बरामदगी ने जांच दल का ध्यान टिल्डेन रीजनल पार्क और पास की लेक अंज़ा की ओर खींचा। साकेत के रूममेट बनीत सिंह ने भी उन्हें ढूंढने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर गुहार लगाई थी, जिसमें उन्होंने बताया था कि साकेत को आखिरी बार झील के पास देखा गया था।
साकेत श्रीनिवासैया की मौत की खबर मिलने से पहले तक पूरा परिवार और बर्कले की भारतीय कम्युनिटी उनकी सलामती की दुआ कर रही थी।
रूममेट का बड़ा खुलासा: आखिरी दिनों में बदला हुआ बर्ताव और सुसाइड का दावा
साकेत के रूममेट बनीत सिंह ने लिंक्डइन पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए दावा किया है कि साकेत ने सुसाइड किया है। बनीत के अनुसार, पिछले दो हफ्तों से साकेत के व्यवहार में गंभीर बदलाव देखे गए थे।
उन्होंने बताया कि साकेत ने अचानक “परवाह करना बंद कर दिया था” और वह बहुत कम सक्रिय रहने लगा था। वह सोशलली कट गया था और भोजन के नाम पर केवल चिप्स और कुकीज़ पर गुजारा कर रहा था। बनीत ने याद किया कि 21 जनवरी को साकेत ने उन्हें लेक अंज़ा चलने के लिए कहा था, लेकिन आलस के कारण उन्होंने मना कर दिया था।
अब उन्हें इस बात का गहरा अफसोस है कि शायद वह जगह वही थी जहाँ साकेत ने अपनी जान देने की योजना बनाई थी। साकेत श्रीनिवासैया की मौत ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के बीच मानसिक स्वास्थ्य के छिपे हुए संकट को उजागर कर दिया है।
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‘मुझे किसी चीज़ की परवाह नहीं है’: साकेत के वे आखिरी डरावने शब्द
बनीत सिंह ने साकेत के साथ हुई अपनी आखिरी बातचीत का भी जिक्र किया, जो अब एक डरावनी याद बन गई है। उन्होंने बताया कि एक दिन साकेत क्लास से लाल रंग का बाथरोब पहनकर लौटा। जब बनीत ने मुस्कुराते हुए पूछा, “तुम क्लास में रोब क्यों पहन रहे हो?” तो साकेत का जवाब हैरान करने वाला था।
साकेत ने कहा, “यार, मैंने परवाह करना छोड़ दिया है। मुझे ठंड लगती है और मुझे परवाह नहीं है कि कोई मेरे बारे में क्या सोचता है। मुझे किसी चीज़ की परवाह नहीं है।”
बनीत को उस समय लगा कि साकेत हमेशा की तरह बस कोई बेवकूफी भरी हरकत कर रहा है, लेकिन अब वे समझते हैं कि वह सच में जीवन के प्रति बेरुखी दिखा रहा था। बनीत ने लिखा, “ज़िंदगी का उल्टा कभी मौत नहीं थी, यह बेपरवाही थी।”
कर्नाटक सरकार और विदेश मंत्रालय का हस्तक्षेप: परिवार को मदद की अपील
साकेत का शव मिलने से पहले, उनके माता-पिता ने कर्नाटक की मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को पत्र लिखकर सहायता मांगी थी। 13 फरवरी को लिखे गए इस पत्र में परिवार ने राज्य सरकार से अमेरिकी अधिकारियों के साथ समन्वय करने की गुजारिश की थी।
इसके बाद कर्नाटक सरकार ने विदेश सचिव विक्रम मिस्री को पत्र लिखकर सैन फ्रांसिस्को में भारतीय मिशन के माध्यम से स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों पर दबाव बनाने और परिवार को हर संभव मदद देने का अनुरोध किया।
अब साकेत श्रीनिवासैया की मौत की पुष्टि होने के बाद, कर्नाटक सरकार और विदेश मंत्रालय मिलकर साकेत के परिवार के लिए ‘इमरजेंसी वीज़ा’ सुरक्षित करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि वे जल्द से जल्द अमेरिका पहुँच सकें और अपने बेटे के पार्थिव शरीर को वापस ला सकें।
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लेक अंज़ा में सर्च ऑपरेशन और स्थानीय अधिकारियों की कार्रवाई
शनिवार को लेक अंज़ा में चले ऑपरेशन के दौरान झील और उसके आसपास के रास्ते आम लोगों के लिए बंद कर दिए गए थे। इस सर्च ऑपरेशन में ईस्ट बे रीजनल पार्क डिस्ट्रिक्ट, बर्कले पुलिस और अलामेडा काउंटी शेरिफ ऑफिस शामिल थे। डाइवर्स ने दोपहर 2 बजे के करीब पानी से साकेत का शव निकाला।
अब कॉन्ट्रा कोस्टा काउंटी कोरोनर ऑफिस इस केस की जांच कर रहा है। स्थानीय पुलिस ने अभी तक मौत के सटीक कारणों और हालातों के बारे में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है।
हालांकि, बनीत सिंह का कहना है कि पुलिस ने उन्हें प्राथमिक जांच के आधार पर सुसाइड की जानकारी दी है। स्थानीय कम्युनिटी और छात्र संघ ने इस मेधावी छात्र के जाने पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
विदेश में भारतीय छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर उठते सवाल
साकेत की मौत ने एक बार फिर विदेश में पढ़ रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षा और उनके मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। विदेश मंत्रालय ने पहले भी लोकसभा में सांसद असदुद्दीन ओवैसी के सवाल के जवाब में कहा था कि सरकार भारतीय छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।
लेकिन, अकेलेपन और दबाव के कारण छात्रों द्वारा उठाए जा रहे ऐसे कदम एक बड़ी चुनौती बन गए हैं। बनीत सिंह ने भी अपनी पोस्ट में अपील की है कि लोग अपने प्रियजनों से बात करें और उनका हालचाल जानते रहें।
साकेत के दोस्तों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय छात्र के तौर पर जीवन बहुत कठिन होता है। बर्कले की पूरी कम्युनिटी इस समय सदमे में है और साकेत की रिसर्च और उनके योगदान को याद कर रही है।
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