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FCI और WFP समझौता: भारत बनेगा दुनिया का नया ‘अन्नदाता’

FCI और WFP समझौता

FCI और WFP समझौता आज की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय खबर बन चुका है, क्योंकि भारत सरकार ने दुनिया भर में भुखमरी के खिलाफ जंग में अपनी भागीदारी को कई गुना बढ़ा दिया है। 18 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में हुए एक आधिकारिक कार्यक्रम में भारतीय खाद्य निगम (FCI) और संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के बीच एक 5-वर्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

इस डील के तहत, भारत 2,00,000 मीट्रिक टन चावल वैश्विक मानवीय अभियानों के लिए उपलब्ध कराएगा। यह कदम उस समय उठाया गया है जब दुनिया के कई हिस्से जलवायु परिवर्तन और संघर्ष के कारण खाद्य संकट का सामना कर रहे हैं। भारत के इस निर्णय ने उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक ‘जिम्मेदार कृषि महाशक्ति’ के रूप में स्थापित कर दिया है।

2 लाख मीट्रिक टन चावल और 5 साल का वादा: क्या है इस महा-डील की पूरी इनसाइड स्टोरी?

इस समझौते की सबसे महत्वपूर्ण बात इसकी अवधि और मात्रा है। FCI और WFP समझौता अगले पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगा, जिसे आपसी सहमति से आगे भी बढ़ाया जा सकता है। भारत द्वारा सप्लाई किया जाने वाला चावल ‘25% ब्रोकन’ (टूटा हुआ चावल) श्रेणी का होगा, जो मानवीय सहायता के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।

एफसीआई के सीएमडी रविंद्र कुमार अग्रवाल और डब्ल्यूएफपी के डिप्टी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर कार्ल स्काउ ने खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा की मौजूदगी में इस पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता सुनिश्चित करता है कि संकटग्रस्त क्षेत्रों में भोजन की आपूर्ति बाधित न हो और भारत का अधिशेष (surplus) अनाज सही जगह काम आए।

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कीमत और अर्थशास्त्र: ₹2,800 प्रति क्विंटल पर तय हुई दुनिया की ‘थाली’ का भविष्य

आर्थिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो FCI और WFP समझौता बहुत ही संतुलित तरीके से तैयार किया गया है। वर्तमान वित्तीय वर्ष यानी 31 मार्च 2026 तक के लिए चावल की कीमत ₹2,800 प्रति क्विंटल (या ₹28 प्रति किलो) निर्धारित की गई है। इसके बाद, हर साल कीमतों की समीक्षा आपसी सहमति से की जाएगी।

यह कीमत सुनिश्चित करती है कि भारत को भी अपने अनाज का उचित मूल्य मिले और विश्व खाद्य कार्यक्रम को भी एक किफायती और विश्वसनीय स्रोत प्राप्त हो। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने स्पष्ट किया कि हम सिर्फ अनाज का निर्यात नहीं कर रहे हैं, बल्कि हम दुनिया के उन लोगों को ‘आशा, पोषण और सम्मान’ निर्यात कर रहे हैं जो भूख से जूझ रहे हैं।

भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ का प्रदर्शन: ‘वसुधैव कुटुंबकम’ को हकीकत में बदलता अनाज

जेन-जी और मिलेनियल्स के बीच इस खबर की चर्चा ‘इंडियाज ग्लोबल लीडरशिप’ के रूप में हो रही है। FCI और WFP समझौता भारत की उस प्राचीन विचारधारा ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (दुनिया एक परिवार है) का आधुनिक प्रमाण है। जब विकसित देश अक्सर अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने में व्यस्त होते हैं, तब भारत अपने कृषि भंडार को दुनिया के सबसे कमजोर समुदायों के साथ साझा कर रहा है।

कार्ल स्काउ (WFP) ने भारत को ‘जीरो हंगर’ लक्ष्य की दिशा में एक प्रेरणा बताया है। भारत का यह योगदान संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDG 2) को प्राप्त करने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है।

गुणवत्ता नियंत्रण और तकनीक: पोषण से भरपूर चावल की वैश्विक यात्रा

इस पूरी प्रक्रिया में गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। FCI और WFP समझौता के तहत भेजे जाने वाले चावल का सख्त परीक्षण किया जाएगा। भारत अब केवल साधारण चावल नहीं, बल्कि ‘फोर्टिफाइड राइस’ (विटामिन और खनिजों से युक्त) पर भी ध्यान दे रहा है ताकि कुपोषण से प्रभावी ढंग से लड़ा जा सके।

एफसीआई के पास मौजूद अत्याधुनिक भंडारण प्रणालियां और ‘स्मार्ट वेयरहाउसिंग’ तकनीक यह सुनिश्चित करेंगी कि अनाज की बर्बादी न्यूनतम हो। डब्ल्यूएफपी इन खेपों का उपयोग उन संघर्ष क्षेत्रों और आपदा प्रभावित क्षेत्रों में करेगा जहाँ लोग बुनियादी पोषण के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

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वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत का बढ़ता दबदबा: क्यों डब्ल्यूएफपी ने भारत को ही चुना?

पिछले कुछ वर्षों में, वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) कई झटकों से गुजरी है, लेकिन भारत एक भरोसेमंद साथी बनकर उभरा है। FCI और WFP समझौता इस भरोसे का ही नतीजा है। भारत दुनिया के सबसे बड़े चावल उत्पादकों और निर्यातकों में से एक है।

हमारी विशाल खरीद और भंडारण क्षमता (Buffer Stock) हमें संकट के समय भी अंतरराष्ट्रीय मदद करने की अनुमति देती है। डब्ल्यूएफपी के लिए भारत से अनाज खरीदना न केवल लॉजिस्टिक के लिहाज से आसान है, बल्कि भारत के विविध जलवायु क्षेत्रों के कारण यहाँ अनाज की निरंतर उपलब्धता भी बनी रहती है।

अगला कदम: क्या भारत बनेगा दुनिया का ‘फूड बास्केट’?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल शुरुआत है। FCI और WFP समझौता के सफल कार्यान्वयन के बाद भारत अन्य अनाज जैसे गेहूं और मोटे अनाज (Millets) के लिए भी इसी तरह के वैश्विक करार कर सकता है।

2026 में भारत जिस तरह से अपनी कृषि नीतियों को वैश्विक जरूरतों के साथ जोड़ रहा है, उससे वह आने वाले दशक में ‘ग्लोबल फूड बास्केट’ के रूप में उभरेगा। सरकार अब ‘अन्नपूर्ति डिवाइसेस’ (ग्रेन एटीएम) और ‘जन पोषण केंद्र’ जैसी नवीन तकनीकों को भी दुनिया के साथ साझा करने की योजना बना रही है, जिससे वितरण प्रणाली और भी पारदर्शी हो सके।

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भूख के खिलाफ महायुद्ध में भारत का सबसे बड़ा प्रहार

अंततः, FCI और WFP समझौता यह साबित करता है कि सच्ची शक्ति दूसरों पर प्रभुत्व जमाने में नहीं, बल्कि दूसरों की मदद करने में है। 2 लाख मीट्रिक टन चावल केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि यह उन करोड़ों चेहरों की मुस्कान है जिन्हें अब वक्त पर भोजन मिल पाएगा।

भारत ने 19 फरवरी 2026 को दुनिया को यह संदेश दिया है कि मानवता के धर्म से बड़ा कोई धर्म नहीं है। इस समझौते के माध्यम से भारत न केवल वैश्विक शांति में योगदान दे रहा है, बल्कि वह भविष्य की उन पीढ़ियों को भी बचा रहा है जो कुपोषण का शिकार हो सकती थीं। यह समझौता एक नए, सशक्त और दयालु भारत की पहचान है।

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