राज कुंद्रा बिटकॉइन स्कैम: ₹150 करोड़ के मामले में मिली जमानत
राज कुंद्रा बिटकॉइन स्कैम का यह मामला आज फिर सुर्खियों में आ गया जब मुंबई की एक विशेष PMLA अदालत ने व्यवसायी और अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा को जमानत दे दी।
शुक्रवार, 20 फरवरी 2026 को कुंद्रा अदालत के सामने पेश हुए थे, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें ₹1 लाख के निजी मुचलके (Surety) पर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक अंतरिम राहत है और मुख्य मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कुंद्रा पर ₹150 करोड़ से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया है, जिसमें कथित तौर पर हजारों निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की गई थी।
यूक्रेन में माइनिंग फार्म और 285 बिटकॉइन: क्या है इस पूरे घोटाले की कहानी?
इस राज कुंद्रा बिटकॉइन स्कैम की जड़ें ‘गेन बिटकॉइन’ (Gain Bitcoin) नामक एक पोंजी स्कीम से जुड़ी हैं, जिसे अमित भारद्वाज नामक व्यक्ति ने चलाया था।
ED के अनुसार, राज कुंद्रा ने इस मास्टरमाइंड से 285 बिटकॉइन प्राप्त किए थे, जिनका उद्देश्य यूक्रेन में एक ‘बिटकॉइन माइनिंग फार्म’ स्थापित करना था। चूंकि यह सौदा कभी धरातल पर नहीं उतरा, इसलिए जांच एजेंसी का दावा है कि ये बिटकॉइन आज भी कुंद्रा के पास हैं, जिनकी वर्तमान कीमत ₹150 करोड़ से भी ज्यादा है।
कुंद्रा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है और खुद को इस लेनदेन में केवल एक ‘मध्यस्थ’ (Mediator) बताया है, लेकिन ED का कहना है कि उनके पास इस दावे को साबित करने के लिए कोई दस्तावेजी सबूत नहीं है।
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शिल्पा शेट्टी का नाम और जुहू के फ्लैट: क्या संपत्ति छिपाने की कोशिश की गई थी?
ED ने राज कुंद्रा बिटकॉइन स्कैम की जांच के दौरान शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा की ₹97.79 करोड़ की संपत्तियों को पहले ही कुर्क (Attach) कर लिया था।
इसमें जुहू स्थित उनका एक आलीशान फ्लैट और पुणे का एक बंगला शामिल है। एजेंसी का गंभीर आरोप यह है कि कुंद्रा ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर बाजार मूल्य से बहुत कम कीमत पर फ्लैटों की बिक्री दिखाई ताकि अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) को वैध बनाया जा सके।
जांचकर्ताओं का मानना है कि यह संपत्तियों की हेराफेरी केवल टैक्स बचाने के लिए नहीं, बल्कि इस घोटाले के पैसे को ‘लेयरिंग’ (Layering) के जरिए छिपाने की एक सोची-समझी साजिश थी।
कोर्ट में कुंद्रा के वकील की दलील: ‘6 साल से सहयोग कर रहे हैं, गिरफ्तारी क्यों?’
अदालत में राज कुंद्रा के वकील प्रशांत पाटिल ने मजबूती से पक्ष रखते हुए कहा कि उनके मुवक्किल ने 2018 से अब तक 6 बार ED के सामने पेश होकर जांच में पूरा सहयोग किया है।
राज कुंद्रा बिटकॉइन स्कैम की लंबी जांच के बावजूद कुंद्रा को कभी गिरफ्तार नहीं किया गया था, जिसका अर्थ है कि उनकी हिरासत में पूछताछ की अब कोई आवश्यकता नहीं है।
पाटिल ने यह भी तर्क दिया कि ED द्वारा बिटकॉइन का जो मूल्यांकन (Valuation) किया गया है, वह कानूनी रूप से गलत है क्योंकि क्रिप्टो की कीमतें लगातार बदलती रहती हैं। कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए जमानत दे दी, लेकिन कुछ कड़ी शर्तें भी लगाई हैं।
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जमानत की शर्तें और पासपोर्ट जब्त: क्या देश छोड़कर नहीं जा पाएंगे राज कुंद्रा?
हालांकि राज कुंद्रा बिटकॉइन स्कैम में जमानत मिल गई है, लेकिन कुंद्रा के लिए आगे का रास्ता आसान नहीं होगा। कोर्ट ने आदेश दिया है कि राज कुंद्रा को विदेश यात्रा करने से पहले अदालत की अनुमति लेनी होगी।
उनका पासपोर्ट भी फिलहाल जांच के दायरे में रहेगा। इसके अलावा, उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे भविष्य की सभी अदालती सुनवाई में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें और जांच में किसी भी प्रकार की बाधा न डालें।
कुंद्रा के वकील ने भरोसा दिलाया है कि वे सभी शर्तों का पालन करेंगे, लेकिन ED अभी भी इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख करने की संभावना तलाश रही है।
सत्यमेव जयते: कोर्ट के बाहर राज कुंद्रा का संक्षिप्त लेकिन चर्चा वाला बयान
जमानत मिलने के तुरंत बाद कोर्ट रूम से बाहर निकलते हुए राज कुंद्रा के चेहरे पर एक मुस्कान थी। उन्होंने मीडिया के कैमरों के सामने संक्षिप्त में ‘सत्यमेव जयते’ कहा, जो यह दर्शाता है कि वे खुद को बेगुनाह मानते हैं।
राज कुंद्रा बिटकॉइन स्कैम पर पूछे गए अन्य सवालों पर उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि उनकी पत्नी उन्हें घर पर बोलने नहीं देती और वकील कोर्ट में, इसलिए वे ज्यादा कुछ नहीं कहेंगे।
यह बयान सोशल मीडिया पर जेन-जी और मिलेनियल्स के बीच काफी वायरल हो रहा है, जो कुंद्रा के इस बेबाक अंदाज को उनकी कानूनी जंग में एक रणनीतिक ‘PR मूव’ के तौर पर देख रहे हैं।
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क्रिप्टो पोंजी स्कीम का शिकार हुए हजारों लोग: क्या उन्हें कभी न्याय मिलेगा?
यह मामला केवल एक हाई-प्रोफाइल कपल का नहीं है, बल्कि उन हजारों मध्यमवर्गीय परिवारों का है जिन्होंने अपनी मेहनत की कमाई इस राज कुंद्रा बिटकॉइन स्कैम से जुड़ी स्कीमों में लगा दी थी।
‘वेरिएबल टेक प्राइवेट लिमिटेड’ और अमित भारद्वाज के नेतृत्व में चले इस रैकेट ने निवेशकों को हर महीने 10% रिटर्न का झांसा दिया था। जब यह स्कीम ढही, तो पता चला कि यह 6,600 करोड़ रुपये का एक विशाल फर्जीवाड़ा था।
राज कुंद्रा पर लगे आरोपों ने इस मामले को ग्लैमर का तड़का जरूर दिया है, लेकिन असली सवाल उन मासूम निवेशकों का है जिनकी जिंदगी भर की कमाई इन डिजिटल वॉलेट्स में खो गई है।
कानूनी लड़ाई अभी शुरू हुई है, क्या कुंद्रा बेदाग निकल पाएंगे?
अंततः, राज कुंद्रा बिटकॉइन स्कैम में मिली यह जमानत केवल एक कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है, इसे क्लीन चिट नहीं माना जा सकता। ED की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में कुंद्रा को ‘बेनिफिशियल ओनर’ बताया गया है, जो एक बहुत गंभीर आरोप है।
आने वाले महीनों में जब इस मामले का ट्रायल शुरू होगा, तब डिजिटल सबूत और बिटकॉइन वॉलेट के पते (Wallet Addresses) सबसे बड़ी भूमिका निभाएंगे।
राज कुंद्रा के लिए चुनौती यह साबित करने की होगी कि उनका उन 285 बिटकॉइन से कोई सीधा संबंध नहीं था, या फिर वे वास्तव में केवल एक फेल डील के शिकार हुए थे। तब तक, यह बॉलीवुड और बिजनेस वर्ल्ड का सबसे चर्चित कानूनी ड्रामा बना रहेगा।
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