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भारत-पाक युद्ध में गिरे 11 लड़ाकू विमान? ट्रंप के खुलासे से उड़े सबके होश!

11 लड़ाकू विमान

क्या 11 लड़ाकू विमान गिर थे? यह वह सवाल है जो आज पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों की नींद उड़ा रहा है। वॉशिंगटन में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने दावा किया कि मई 2025 के भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान आसमान से “महंगे और घातक” विमान गिर रहे थे।

ट्रंप के मुताबिक, जब उन्होंने हस्तक्षेप किया, तब तक दोनों देशों के कुल 11 जेट जमीन पर आ चुके थे। यह पहली बार है जब किसी ग्लोबल लीडर ने इतनी बड़ी संख्या में विमानों के नुकसान का जिक्र किया है।

ट्रंप का यह बयान न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि यह उन सभी आधिकारिक रिपोर्टों को भी चुनौती देता है जिनमें नुकसान के आंकड़ों को बहुत कम बताया गया था।

आसमान में मची थी भारी तबाही: क्या सैटेलाइट्स ने पकड़ी थी ये जलती हुई लपटें?

जब ट्रंप से पूछा गया कि उन्हें 11 लड़ाकू विमान के बारे में कैसे पता चला, तो उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिकी खुफिया तंत्र और सैटेलाइट इमेजरी के जरिए वे इस युद्ध को लाइव देख रहे थे।

ट्रंप ने अपनी चिर-परिचित शैली में कहा कि यह “खौफनाक मंजर” था और आग की लपटें मीलों दूर से देखी जा सकती थीं। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि उस समय न तो भारत के इसरो (ISRO) और न ही किसी अंतरराष्ट्रीय स्वतंत्र एजेंसी ने इतने बड़े पैमाने पर ‘मिड-एयर कोलिजन’ या ‘शूट-डाउन’ की पुष्टि की थी।

ट्रंप का दावा है कि ये विमान इतने महंगे थे कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्था चरमरा सकती थी, और यही कारण था कि उन्होंने तुरंत दखल देने का फैसला किया।

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200 प्रतिशत टैरिफ का ‘एटम बम’: जब पैसों की धमकी ने शांत की मिसाइलें

ट्रंप ने अपने भाषण में 11 लड़ाकू विमान गिरने के रहस्य से पर्दा उठाते हुए बताया कि उन्होंने इसे कैसे रोका। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को फोन किया और कहा कि अगर युद्ध नहीं रुका, तो वे भारत और पाकिस्तान पर 200 प्रतिशत का आयात शुल्क (Tariff) लगा देंगे।

ट्रंप के अनुसार, “जैसे ही मैंने टैरिफ की बात की, विमानों का गिरना बंद हो गया।” उनका तर्क है कि दोनों देशों को यह समझ आ गया था कि युद्ध जीतने से ज्यादा महंगा अमेरिकी बाजार खोना पड़ेगा।

यह ‘इकोनॉमिक कूटनीति’ का एक ऐसा उदाहरण है जिसे ट्रंप अपनी सबसे बड़ी जीत बता रहे हैं, हालांकि भारत और पाकिस्तान ने आधिकारिक रूप से किसी भी ‘टैरिफ प्रेशर’ की बात को नकारा है।

भारत और पाकिस्तान की रहस्यमयी चुप्पी: क्या दबाया गया है नुकसान का सच?

सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि अगर 11 लड़ाकू विमान वाकई गिरे थे, तो दोनों देशों की सरकारों ने इसे छिपाया क्यों? रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध के दौरान अक्सर ‘मनोवैज्ञानिक बढ़त’ बनाए रखने के लिए अपने नुकसान को कम करके दिखाया जाता है।

लेकिन 11 विमानों का मलबा छिपाना नामुमकिन है। भारतीय वायुसेना के पूर्व अधिकारियों का कहना है कि मई 2025 में छिटपुट झड़पें जरूर हुई थीं, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर कोई ‘डॉगफाइट’ नहीं हुई थी जिसमें 11 जेट गिर जाएं।

ट्रंप का यह दावा या तो बहुत बड़ी खुफिया जानकारी है जो अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई, या फिर यह उनके चुनावी अभियान का एक बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया हिस्सा है।

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शहबाज शरीफ का ‘मसीहा’ वाला बयान: क्या ट्रंप ने बचाई 2.5 करोड़ जानें?

ट्रंप ने अपने 11 लड़ाकू विमान वाले दावे के दौरान पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ को भी गवाह के तौर पर पेश किया। उन्होंने कहा कि शरीफ ने उन्हें फोन कर शुक्रिया अदा किया था कि उन्होंने युद्ध रुकवाकर करीब ढाई करोड़ लोगों को मरने से बचा लिया।

ट्रंप के मुताबिक, अगर वे हस्तक्षेप नहीं करते, तो यह संघर्ष परमाणु युद्ध में बदल सकता था। शहबाज शरीफ ने भी मंच पर इस बात की पुष्टि की कि ट्रंप का बोर्ड ऑफ पीस दुनिया के लिए एक उम्मीद की किरण है।

हालांकि, भारत ने हमेशा की तरह इस पर अपनी सख्त ‘नो थर्ड पार्टी’ पॉलिसी बरकरार रखी है और किसी भी विदेशी नेता के ‘मसीहा’ बनने के दावे को तवज्जो नहीं दी है।

आंकड़ों का गिरता-बढ़ता ग्राफ: 5 से 11 तक कैसे पहुँचे ट्रंप?

अगर हम ट्रंप के पुराने भाषणों को खंगालें, तो 11 लड़ाकू विमान का आंकड़ा काफी संदेह पैदा करता है। पिछले साल जुलाई में उन्होंने यही संख्या ‘5’ बताई थी।

अगस्त आते-आते यह ‘8’ हो गई और आज 20 फरवरी 2026 को यह ’11’ तक पहुँच चुकी है। आलोचकों का कहना है कि ट्रंप शायद हर भाषण के साथ इस कहानी को और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए संख्या बढ़ा रहे हैं।

किसी भी अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक दस्तावेज़ में 11 विमानों का कोई जिक्र नहीं है। यह विसंगति यह दर्शाती है कि शायद ट्रंप ‘फैक्ट्स’ से ज्यादा ‘इम्पैक्ट’ पर ध्यान दे रहे हैं, जो कि डिजिटल मीडिया के दौर में एक खतरनाक लेकिन प्रभावी रणनीति है।

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जेन-जी और मिलेनियल्स के लिए एक ‘फैक्ट चेक’ चुनौती: क्या सब कुछ सिर्फ पीआर है?

आज का युवा जो सोशल मीडिया और ओएसइंट (OSINT) पर निर्भर है, वह 11 लड़ाकू विमान वाले दावे को आसानी से नहीं पचा पा रहा है। रेडिट और एक्स (X) पर लोग विमानों के मलबे की तस्वीरें और रडार डेटा मांग रहे हैं।

यदि 11 विमान गिरते, तो उनके पायलटों का क्या हुआ? क्या वे पकड़े गए या शहीद हुए? इन बुनियादी सवालों का जवाब ट्रंप के भाषण में नहीं मिलता। युवाओं के बीच यह चर्चा गर्म है कि क्या यह ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ के दौर में ‘आर्टिफिशियल इंफॉर्मेशन’ फैलाने की कोशिश है?

यह मामला दिखाता है कि कैसे ग्लोबल लीडर्स अब पारंपरिक मीडिया के बजाय सीधे सोशल मीडिया हेडलाइंस को टारगेट करने के लिए सनसनीखेज दावों का सहारा लेते हैं।

क्या ट्रंप का यह ‘शांति कार्ड’ 2026 के चुनावों की तैयारी है?

अंततः, 11 लड़ाकू विमान की यह गुत्थी अभी सुलझनी बाकी है। ट्रंप का ‘बोर्ड ऑफ पीस’ जिस तरह से भारत-पाक और ग़ज़ा जैसे मुद्दों पर खुद को केंद्र में रख रहा है, वह साफ इशारा है कि वे दुनिया को दिखाना चाहते हैं कि संयुक्त राष्ट्र (UN) फेल हो चुका है और सिर्फ वही शांति ला सकते हैं।

भारत के लिए यह एक मुश्किल स्थिति है क्योंकि ट्रंप एक मित्र देश के नेता हैं, लेकिन उनके ऐसे दावों से भारत की संप्रभुता और सेना के सम्मान पर आंच आती है। आने वाले समय में अगर कोई स्वतंत्र जांच या डिक्लासिफाइड रिपोर्ट सामने आती है, तभी पता चलेगा कि 11 विमान वाकई गिरे थे या यह सिर्फ एक ‘पॉलिटिकल स्टंट’ था जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया।

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