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मुंबई राशन कार्ड घोटाला: दिंडोशी में 7 गिरफ्तार, 343 फर्जी कार्ड बरामद

मुंबई राशन कार्ड घोटाला

मुंबई राशन कार्ड घोटाला आज शहर की सबसे बड़ी चर्चा बन गया है, जब दिंडोशी पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया जो फर्जी राशन कार्ड बनाकर सरकारी अनाज और योजनाओं का लाभ अवैध रूप से उठा रहा था। आज 21 फरवरी 2026 को मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस ने इस मामले में एक राशन दुकान के मालिक सहित कुल 7 लोगों को गिरफ्तार किया है।

इस गिरोह के पास से 343 फर्जी राशन कार्ड और बड़ी संख्या में जाली रबर स्टैंप बरामद किए गए हैं। यह कार्रवाई उस समय हुई जब पुलिस को एक गुप्त सूचना मिली कि मालाड के दिंडोशी इलाके में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर राशन कार्ड बनाए जा रहे हैं और उनका इस्तेमाल बैंक खाते खोलने और सिम कार्ड खरीदने जैसी अवैध गतिविधियों के लिए भी किया जा रहा है।

कैसे चलता था ये रैकेट? चाय की पत्ती से लेकर असली स्टैंप तक का ‘जुगाड़’

इस मुंबई राशन कार्ड घोटाला की मोडस ऑपरेंडी (काम करने का तरीका) जानकर पुलिस भी हैरान रह गई। पकड़े गए आरोपियों में से एक 21 साल का युवक विरार का रहने वाला है, जिसने अपने पिता की मौत के बाद इस धंधे को संभाला था। ये लोग पुराने दिखने वाले कागज बनाने के लिए सफेद कागजों को चाय के पानी में डुबोते थे ताकि वे ‘सरकारी और पुराने’ लगें।

इनके पास राशनिंग विभाग के असली जैसे दिखने वाले रबर स्टैंप और फॉरगेट सिग्नेचर के नमूने भी मिले हैं। गिरोह का एक सदस्य तो खुद राशनिंग ऑफिस का कर्मचारी बताया जा रहा है, जो अंदरूनी जानकारी और जरूरी फॉर्म्स उपलब्ध कराता था। यह पूरा नेटवर्क इतनी सफाई से काम कर रहा था कि आम आदमी के लिए असली और नकली कार्ड में फर्क करना नामुमकिन था।

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343 फर्जी कार्ड और करोड़ों का अनाज: गरीबों की थाली से गायब हुई रोटियां

पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि मुंबई राशन कार्ड घोटाला के तहत बनाए गए इन 343 कार्डों का इस्तेमाल प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKY) के तहत मिलने वाले अनाज को हड़पने के लिए किया जाता था। ये फर्जी कार्ड उन लोगों के नाम पर थे जो या तो अस्तित्व में ही नहीं थे या फिर उन झुग्गी बस्तियों के थे जहाँ लोग शिक्षित नहीं हैं।

राशन दुकान के मालिक की मिलीभगत से यह अनाज खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा था। पुलिस का अनुमान है कि इस घोटाले की जड़ें सिर्फ दिंडोशी तक नहीं, बल्कि पूरे उत्तरी मुंबई में फैली हो सकती हैं। जब्त किए गए कार्डों के डेटा से पता चला है कि पिछले दो सालों में इस गिरोह ने लाखों रुपये का अनाज डकार लिया है।

एमएमआरडीए अलॉटमेंट और बैंक फ्रॉड: राशन कार्ड तो सिर्फ एक जरिया था

इस मुंबई राशन कार्ड घोटाला का एक और डरावना पहलू यह है कि इन फर्जी राशन कार्डों का इस्तेमाल एमएमआरडीए (MMRDA) के घरों के अलॉटमेंट के लिए भी किया जा रहा था। आरोपियों ने फर्जी अलॉटमेंट लेटर और राशन कार्ड के जरिए कई लोगों को मुफ्त घर दिलाने का झांसा देकर लाखों की ठगी की है।

इसके अलावा, इन्हीं फर्जी पहचान पत्रों के आधार पर दर्जनों बैंक खाते खोले गए और सैकड़ों सिम कार्ड खरीदे गए। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इन सिम कार्डों का इस्तेमाल साइबर क्राइम या किसी अन्य राष्ट्रविरोधी गतिविधि में तो नहीं किया गया। यह मामला अब केवल राशन की चोरी का नहीं, बल्कि एक बड़े संगठित अपराध का हिस्सा नजर आ रहा है।

7 गिरफ्तार, मास्टरमाइंड की तलाश: पुलिस की रडार पर और कौन हैं?

दिंडोशी पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि इस मुंबई राशन कार्ड घोटाला में गिरफ्तार किए गए 7 लोगों में एजेंट, रबर स्टैंप बनाने वाले और राशन दुकान के कर्मचारी शामिल हैं। हालांकि, पुलिस को शक है कि इस रैकेट का मास्टरमाइंड अभी भी फरार है जो शायद राशनिंग विभाग का कोई बड़ा अधिकारी या रसूखदार राजनीतिक व्यक्ति हो सकता है।

पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन और लैपटॉप जब्त कर लिए हैं, जिनसे कई व्हाट्सएप ग्रुप और डिलीट किए गए संदेशों का पता चला है। इन मैसेज में ‘रेट कार्ड’ की चर्चा थी कि एक फर्जी राशन कार्ड बनाने के लिए 5,000 से 15,000 रुपये तक वसूले जाते थे। पुलिस अब बैंक ट्रांजेक्शन की भी जांच कर रही है।

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सरकारी सिस्टम में छेद: आखिर कैसे बनते रहे सालों तक ये जाली दस्तावेज?

यह मुंबई राशन कार्ड घोटाला महाराष्ट्र सरकार के डिजिटल इंडिया और बायोमेट्रिक दावों पर एक बड़ा सवालिया निशान है। अगर राशन कार्ड आधार से लिंक हैं, तो फिर 343 फर्जी कार्ड सिस्टम की पकड़ में क्यों नहीं आए?

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली का कहना है कि जब तक राशनिंग विभाग के अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे ‘तौत’ (तस्कर) सक्रिय रहेंगे।

उन्होंने बताया कि मुंबई के कई इलाकों में राशन कार्ड को पहचान पत्र के बजाय ‘फ्री हाउसिंग’ के लिए सबूत माना जाता है, जो भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी वजह है। पुलिस ने इस मामले में संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर जवाब मांगा है कि आखिर वेरिफिकेशन की प्रक्रिया कहाँ फेल हुई।

आम जनता के लिए चेतावनी: फर्जी कार्ड रखना आपको पहुँचा सकता है जेल

पुलिस ने इस मुंबई राशन कार्ड घोटाला के बाद आम जनता के लिए एक एडवाइजरी भी जारी की है। एडिशनल कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि जो लोग एजेंटों के जरिए पैसे देकर फर्जी राशन कार्ड बनवाते हैं, वे भी इस अपराध में बराबर के भागीदार हैं। यदि किसी के पास फर्जी दस्तावेज पाया जाता है, तो उसे 7 साल तक की जेल हो सकती है।

सरकार ने अपील की है कि राशन कार्ड केवल आधिकारिक ‘महा-ई-सेवा’ केंद्रों या सरकारी कार्यालयों से ही बनवाएं। किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को अपना आधार नंबर या फिंगरप्रिंट न दें। दिंडोशी पुलिस ने एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है जहाँ लोग ऐसे संदिग्ध एजेंटों की जानकारी दे सकते हैं।

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क्या बायोमेट्रिक और आयरिश स्कैन ही इस लूट का एकमात्र समाधान है?

अंततः, मुंबई राशन कार्ड घोटाला यह सबक देता है कि तकनीक कितनी भी आगे बढ़ जाए, मानवीय लालच हमेशा उसमें सेंध लगाने का रास्ता ढूंढ लेता है। 2026 में जब हम एआई और हाई-टेक सर्विलांस की बात कर रहे हैं, तब इस तरह का कागजी घोटाला होना सिस्टम की विफलता है।

अब समय आ गया है कि महाराष्ट्र सरकार ‘आयरिश बायोमेट्रिक’ (आंखों की स्कैनिंग) को राशन वितरण के लिए अनिवार्य करे ताकि कोई भी फर्जी अंगूठे के निशान या कागज का उपयोग न कर सके।

दिंडोशी पुलिस की यह सफलता सराहनीय है, लेकिन असली जीत तब होगी जब इस घोटाले के पीछे के ‘बड़े सफेदपोश चेहरों’ को बेनकाब किया जाएगा और गरीबों को उनका हक बिना किसी दलाली के मिलेगा।

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