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लखनऊ ड्रम मर्डर केस: नीट परीक्षा के दबाव में खूनी वारदात

लखनऊ ड्रम मर्डर केस

लखनऊ ड्रम मर्डर केस ने आज पूरे देश को सन्न कर दिया है, जहाँ एक 19 साल के किशोर ने अपने ही पिता की बेरहमी से हत्या कर दी और लाश को एक नीले ड्रम में छिपाने की कोशिश की। मंगलवार, 24 फरवरी 2026 को सामने आई पुलिस जांच के अनुसार, यह हत्याकांड केवल गुस्से का परिणाम नहीं था, बल्कि इसके पीछे करियर का भारी दबाव और पारिवारिक डार्क सीक्रेट्स छिपे हुए थे।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी किशोर पर उसके पिता की ओर से NEET परीक्षा पास करने का जबरदस्त दबाव था, जबकि वह पिता के शराब के कारोबार और पैथोलॉजी लैब्स को संभालना चाहता था।

यह टकराव इस हद तक बढ़ गया कि बेटे ने पहले पिता को गोली मारी और फिर अपनी बहन के सामने ही शव के टुकड़े कर दिए। यह घटना आधुनिक समाज में माता-पिता की उम्मीदों और बच्चों की मानसिक स्थिति के बीच बढ़ती खाई का एक भयावह उदाहरण है।

नीले ड्रम का खौफनाक राज: कैसे एक किशोर ने रची पिता के अंत की साजिश?

इस लखनऊ ड्रम मर्डर केस की सबसे डरावनी बात वह तरीका है जिससे लाश को ठिकाने लगाने की कोशिश की गई। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी ने अपने पिता की हत्या करने के बाद लाश को एक बड़े नीले प्लास्टिक ड्रम में डालने के लिए उसे आरी से कई टुकड़ों में काट दिया।

पुलिस को जांच के दौरान घर से खून से सने कपड़े और वह आरी भी बरामद हुई है जिसका इस्तेमाल शव को खंडित करने के लिए किया गया था।

सबसे ज्यादा चौंकाने वाला तथ्य यह है कि आरोपी ने यह सब अपनी छोटी बहन की मौजूदगी में किया, जिसे उसने डरा-धमक कर चुप करा दिया था। यह ठंडा और नपा-तुला मर्डर प्लान किसी पेशेवर अपराधी जैसा नजर आता है, जिसने पुलिस और फोरेंसिक विशेषज्ञों के भी होश उड़ा दिए हैं।

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नीट का दबाव या कारोबार का लालच: आखिर क्यों खूनी बन गया इकलौता बेटा?

लाइव मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ ड्रम मर्डर केस के पीछे का मुख्य कारण पिता और पुत्र के बीच करियर को लेकर चल रहा वैचारिक युद्ध था। पिता चाहते थे कि उनका बेटा डॉक्टर बने और इसके लिए वे उसे लगातार नीट की कोचिंग और पढ़ाई के लिए मजबूर कर रहे थे।

दूसरी ओर, बेटा पिता के सफल पैथोलॉजी लैब नेटवर्क और शराब की दुकानों के साम्राज्य को तुरंत संभालना चाहता था। उसे लगा कि डॉक्टर बनने की लंबी प्रक्रिया उसके ऐशो-आराम की जिंदगी में बाधा है।

आरोपी को शराब और सिगरेट की लत भी लग चुकी थी, जिसे लेकर अक्सर घर में झगड़े होते थे। पिता की डांट और पढ़ाई के बोझ ने किशोर के मन में इस कदर नफरत भर दी कि उसने अपने ही जन्मदाता को रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया।

बहन के सामने लाश के टुकड़े: उस रात की पूरी कहानी जो रूह कंपा देगी

एनडीटीवी की रिपोर्ट में इस हत्याकांड की उस रात का सिलसिलेवार ब्यौरा दिया गया है जो किसी हॉरर फिल्म से कम नहीं है। रात के वक्त जब पिता सो रहे थे, आरोपी ने पास रखी पिस्तौल से उनके सिर में गोली मार दी। गोली की आवाज सुनकर जब उसकी छोटी बहन कमरे में आई, तो वह मंजर देखकर चीख पड़ी।

आरोपी ने बहन को जान से मारने की धमकी दी और उसे लाश के पास बैठने पर मजबूर किया। इसके बाद उसने घंटों तक शव को आरी से काटा ताकि उसे ड्रम में भरकर घर से बाहर निकाला जा सके।

पड़ोसियों को कोई शक न हो, इसलिए उसने कमरे में तेज आवाज में म्यूजिक चला दिया था। यह मानसिक विक्षिप्तता की वह पराकाष्ठा है जो दिखाती है कि कैसे लंबे समय तक दबा हुआ गुस्सा एक इंसान को हैवान बना देता है।

पैथोलॉजी लैब और शराब की दुकानों का साम्राज्य: क्या संपत्ति थी असली मोटिव?

द हिंदू की एक रिपोर्ट संकेत देती है कि लखनऊ ड्रम मर्डर केस केवल नीट के दबाव तक सीमित नहीं था। पुलिस इस एंगल की भी जांच कर रही है कि क्या आरोपी ने संपत्ति हड़पने के लिए यह कदम उठाया। मृतक एक सफल व्यवसायी थे जिनकी कई पैथोलॉजी लैब्स और शराब के ठेके थे।

आरोपी को डर था कि अगर वह नीट में फेल हो गया या पिता की बात नहीं मानी, तो उसे इस संपत्ति से बेदखल किया जा सकता है। वह जल्द से जल्द इस बिजनेस पर अपना नियंत्रण चाहता था ताकि वह अपनी महंगी जरूरतों और शौक को पूरा कर सके। पुलिस आरोपी के बैंक ट्रांजैक्शन और उसके दोस्तों के सर्कल की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इस साजिश में कोई और भी शामिल था।

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जेन-जी और करियर स्ट्रेस: क्या हम अपने बच्चों को प्रेशर कुकर बना रहे हैं?

आज के दौर में लखनऊ ड्रम मर्डर केस सोशल मीडिया पर एक बड़ी बहस का केंद्र बन गया है। जेन-जी और मिलेनियल्स इस घटना को लेकर सवाल उठा रहे हैं कि क्या परीक्षाओं का दबाव बच्चों को इस हद तक ले जा सकता है? विशेषज्ञों का कहना है कि जब बच्चों पर उनकी क्षमता से अधिक बोझ डाला जाता है और उनके निजी शौक को कुचला जाता है, तो उनमें एक ‘साइलेंट रेज’ (मौन क्रोध) पैदा होता है।

यह घटना एक चेतावनी है उन माता-पिताओं के लिए जो अपने अधूरे सपनों को बच्चों के जरिए पूरा करना चाहते हैं। हालांकि हत्या का कोई बहाना नहीं हो सकता, लेकिन यह केस समाज को यह सोचने पर मजबूर करता है कि मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज करने की कीमत कितनी बड़ी हो सकती है।

लखनऊ पुलिस की कार्रवाई: फोरेंसिक सबूतों ने खोला आरोपी का झूठ

शुरुआत में आरोपी ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की और इसे एक डकैती या बाहरी हमला बताने का नाटक किया। लेकिन लखनऊ पुलिस ने जब घर की बारीकी से तलाशी ली, तो उन्हें नीले ड्रम के पास से ऐसे सबूत मिले जिन्होंने आरोपी के झूठ की पोल खोल दी।

फोरेंसिक टीम को फर्श पर खून के निशान मिले जिन्हें मिटाने की कोशिश की गई थी। साथ ही, आरोपी के नाखूनों और कपड़ों पर मिले जैविक साक्ष्यों ने उसे सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा कर दिया। कड़ी पूछताछ के बाद आरोपी टूट गया और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस अब हत्या में इस्तेमाल हथियार के स्रोत का पता लगा रही है और यह देख रही है कि किशोर के पास पिस्तौल कहाँ से आई।

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एक परिवार की तबाही और समाज के लिए कड़ा सबक

अंततः, लखनऊ ड्रम मर्डर केस एक ऐसे परिवार की दुखद दास्तां है जो बाहर से खुशहाल दिखता था लेकिन अंदर से खोखला हो चुका था। एक पिता ने अपने बेटे के लिए जो सपना देखा था, वही सपना उसकी मौत का वारंट बन गया। एक बेटा जिसने सफलता का शॉर्टकट चुना, अब अपनी पूरी जिंदगी सलाखों के पीछे बिताएगा।

यह मामला न्याय प्रणाली के लिए एक चुनौती है और अभिभावकों के लिए एक सबक कि संवाद (Communication) की कमी कितनी घातक हो सकती है। हमें एक ऐसा माहौल बनाने की जरूरत है जहाँ बच्चे अपनी विफलता और पसंद के बारे में खुलकर बात कर सकें, ताकि भविष्य में किसी और पिता को अपने ही बेटे के हाथों इस तरह का अंत न देखना पड़े।

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