रिंकू सिंह के पिता का निधन: भारतीय क्रिकेटर के लिए दुखद पल
क्रिकेट के मैदान पर छक्कों की बरसात करने वाले रिंकू सिंह के जीवन में आज एक ऐसा कठिन समय आया है जिसे कोई भी खिलाड़ी कभी नहीं देखना चाहता। रिंकू सिंह के पिता के निधन की दुखद खबर ने न केवल उनके परिवार को, बल्कि पूरे क्रिकेट जगत को गहरे शोक में डाल दिया है।
खनचंद सिंह, जो रिंकू के सबसे बड़े समर्थक और प्रेरणास्रोत थे, ने ग्रेटर नोएडा के यथार्थ अस्पताल में अपनी अंतिम सांसें लीं। पिछले कुछ हफ्तों से वे लीवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, लेकिन जीवन की इस कठिन जंग में वे हार गए।
यह खबर तब आई जब टीम इंडिया टी20 वर्ल्ड कप के सुपर-8 जैसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर है, जिससे हर भारतीय क्रिकेट प्रेमी का दिल बैठ गया है। एक सीनियर जर्नलिस्ट के नाते मैंने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन परिवार के प्रति ऐसी क्षति की भरपाई न तो कोई शतक कर सकता है और न ही कोई जीत।
कैंसर से लंबी जंग और पिता का संघर्ष
रिंकू सिंह के पिता खनचंद सिंह का संघर्ष केवल एक बीमारी से नहीं था, बल्कि उन्होंने जीवन भर अपने बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिए कड़ी मेहनत की थी। एलपीजी सिलेंडर डिलीवरी का काम करने वाले खनचंद जी ने कभी रिंकू के सपनों को अपनी आर्थिक स्थिति के आड़े नहीं आने दिया।
वे रिंकू की हर सफलता पर उतनी ही खुशी मनाते थे जितनी कोई बड़ा सेलिब्रिटी मनाता है। पिछले कुछ समय से उनका स्वास्थ्य तेजी से गिर रहा था, जिसके चलते उन्हें 21 फरवरी, 2026 को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वेंटिलेटर और तमाम चिकित्सा प्रयासों के बावजूद, उनका शरीर इस बीमारी को नहीं झेल सका। रिंकू सिंह पिता निधन का यह समाचार उस पिता के त्याग को भी याद दिलाता है, जिसने बिना किसी तामझाम के एक विश्वस्तरीय खिलाड़ी को गढ़ा था।
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खेल और परिवार के बीच रिंकू का कठिन सफर
किसी भी खिलाड़ी के लिए यह कल्पना करना भी मुश्किल है कि वह एक तरफ देश के लिए वर्ल्ड कप जैसे टूर्नामेंट में खेल रहा हो और दूसरी तरफ अस्पताल में अपने पिता की स्थिति पर नजर रखे हो। रिंकू सिंह ने पिछले कुछ दिन इसी मानसिक द्वंद्व में बिताए हैं।
उन्होंने चेन्नई के कैंप से बीच में ही छुट्टी ली और अपने पिता के पास वापस लौटे ताकि अंतिम समय में उनके साथ रह सकें। यह एक बहुत ही चुनौतीपूर्ण दौर है, जहाँ जिम्मेदारी और कर्तव्य के बीच का संतुलन टूटता हुआ दिखता है।
हालांकि, रिंकू ने जिस परिपक्वता का प्रदर्शन किया है, वह काबिले तारीफ है। उन्होंने न केवल अपने पिता का ख्याल रखा, बल्कि पूरे परिवार को भी संभाला है, जो उनकी उस सादगी और परवरिश को दर्शाता है जो उन्हें अपने पिता से मिली थी।
विराट कोहली का संदेश और टीम का साथ
सोशल मीडिया पर जैसे ही यह खबर आई, क्रिकेट की दुनिया एकजुट हो गई। विराट कोहली ने एक बेहद भावुक संदेश साझा करते हुए रिंकू के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने लिखा कि रिंकू का यह नुकसान बहुत गहरा है और ईश्वर उन्हें इस कठिन समय में शक्ति प्रदान करे।
कोहली ही नहीं, बल्कि युवराज सिंह और हरभजन सिंह जैसे दिग्गजों ने भी रिंकू को अपना साथ देने का वादा किया है। खेल के मैदान पर भले ही हम एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी हों, लेकिन मैदान के बाहर एक टीम इंडिया के तौर पर हम एक परिवार हैं। रिंकू सिंह पिता निधन के बाद टीम का यह समर्थन रिंकू को यह महसूस कराता है कि वे इस दुख की घड़ी में बिल्कुल अकेले नहीं हैं।
जमीन से जुड़े इंसान की सादगी भरी विरासत
खनचंद सिंह के बारे में सबसे खास बात उनकी सादगी थी। रिंकू आज भारत के सबसे चर्चित क्रिकेटरों में से एक हैं, लेकिन उनके पिता अपनी पुरानी दिनचर्या और अपने काम के प्रति उसी लगन से जुड़े रहे। वे कभी भी अपनी सफलता का ढिंढोरा नहीं पीटना चाहते थे।
जब हम रिंकू के खेल में वह ‘गर्व’ और ‘दृढ़ता’ देखते हैं, तो हमें उनके पिता की छवि दिखती है। उन्होंने सिखाया कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता। रिंकू का फिनिशर के रूप में उभरना, अंतिम ओवरों में धैर्य रखना, ये सब गुण उन्हें अपने पिता से विरासत में मिले हैं। रिंकू सिंह पिता निधन से एक युग का अंत हुआ है, लेकिन उनकी दी हुई सीख रिंकू के हर शॉट में हमेशा जीवित रहेगी।
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वेस्टइंडीज के खिलाफ मैच और रिंकू की वापसी
अब हर किसी के मन में यह सवाल है कि क्या रिंकू सिंह वेस्टइंडीज के खिलाफ सुपर-8 मैच के लिए उपलब्ध होंगे? रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिंकू अंतिम संस्कार की सभी रस्में पूरी करने के लिए अलीगढ़ अपने घर गए हैं। फिलहाल उनके लिए क्रिकेट से ज्यादा परिवार की प्राथमिकता है।
BCCI और टीम प्रबंधन ने भी उन्हें पूरा समय और स्पेस दिया है ताकि वे इस दुख से उबर सकें। टीम इंडिया कोलकाता पहुंच चुकी है, लेकिन रिंकू का वहां पहुंचना उनके व्यक्तिगत स्थिति पर निर्भर करेगा। प्रशंसकों को भी धैर्य रखना चाहिए और इस बात का सम्मान करना चाहिए कि एक खिलाड़ी के लिए उसका पिता सबसे ऊपर होता है।
खिलाड़ियों का मानसिक स्वास्थ्य और समर्थन तंत्र
इस घटना ने एक बार फिर से इस बात पर बहस छेड़ दी है कि एक पेशेवर खिलाड़ी के जीवन में मानसिक स्वास्थ्य और इमोशनल सपोर्ट कितना महत्वपूर्ण है। हम अक्सर देखते हैं कि खिलाड़ी दबाव में होते हैं, लेकिन पर्दे के पीछे जो उनका निजी दुख होता है, वह कई बार उससे कहीं ज्यादा बड़ा होता है।
टीम इंडिया का यह समर्थन तंत्र, जहाँ खिलाड़ियों को उनके कठिन समय में छुट्टी दी जाती है और उन्हें भावनात्मक सहारा दिया जाता है, आधुनिक क्रिकेट की एक बहुत बड़ी खूबी है। रिंकू सिंह के साथ जो कुछ भी हुआ, वह किसी भी खिलाड़ी के लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं है, लेकिन जिस तरह से पूरी टीम और बोर्ड उनके साथ खड़ा है, वह एक मिसाल है।
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एक कठिन दौर और भविष्य की ओर उम्मीद
अंत में, मैं यही कहना चाहूंगा कि रिंकू सिंह के लिए यह सबसे बड़ी परीक्षा है। क्रिकेट के मैदान पर तो वे दबाव झेलना जानते हैं, लेकिन जीवन की इस सच्चाई का सामना करना सबसे बड़ा चैलेंज है।
उनके पिता चाहते थे कि वे देश के लिए खेलें और नाम रोशन करें। मुझे यकीन है कि रिंकू अपने पिता के सपनों को पूरा करने के लिए एक बार फिर उसी जोश के साथ मैदान पर लौटेंगे। हम सभी रिंकू के साथ हैं और उम्मीद करते हैं कि वे जल्द ही इस दुख से उबरकर एक बार फिर अपने बल्ले से कमाल दिखाएंगे। ईश्वर उन्हें इस असहनीय दर्द को सहने की शक्ति दे।
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