जबलपुर नाव हादसा: येलो अलर्ट के बीच ‘नर्मदा क्वीन’ ने भरी मौत की उड़ान,
मध्य प्रदेश के जबलपुर में स्थित बरगी बांध जलाशय में गुरुवार की शाम एक बड़ी मानवीय लापरवाही की गवाह बनी। जबलपुर नाव हादसा महज एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि नियमों की धज्जियां उड़ाने का नतीजा है। मौसम विभाग द्वारा जारी ‘येलो अलर्ट’ और 50 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से चलने वाले तूफ़ान की चेतावनी के बावजूद मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग की ‘नर्मदा क्वीन’ क्रूज को जलाशय के बीचों-बीच जाने की अनुमति दे दी गई। इस भीषण हादसे में अब तक 9 लोगों के शव बरामद हो चुके हैं, जबकि कई मासूम अब भी लापता हैं।
लाइफ जैकेट थी पर नसीब नहीं हुई: डेक के नीचे बंद थी सुरक्षा
इस हादसे में बचे लोगों ने जो आपबीती सुनाई, वह रोंगटे खड़े कर देने वाली है। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि नाव पर चढ़ते समय किसी भी यात्री को लाइफ जैकेट नहीं पहनाई गई थी। जब तूफ़ान आया और नाव डगमगाने लगी, तब कर्मचारियों ने आनन-फानन में नीचे के डेक पर बंधी हुई जैकेटों को खोलना शुरू किया। जबलपुर नाव हादसा के एक नए वायरल वीडियो में साफ़ दिख रहा है कि लोग सील की हुई जैकेटों को निकालने के लिए बेतबी से संघर्ष कर रहे थे। ‘अंतर्देशीय जलयान अधिनियम 2021’ के नियमों को ताक पर रखकर यात्रियों को बिना सुरक्षा उपकरणों के तूफ़ान के हवाले कर दिया गया।
क्षमता से अधिक यात्री और टिकटों का खेल
नर्मदा क्वीन की क्षमता 90 यात्रियों की है, लेकिन उस शाम क्रूज पर 40 से ज़्यादा लोग सवार थे। मुख्यमंत्री मोहन यादव के अनुसार, केवल 29 टिकट जारी किए गए थे, लेकिन स्थानीय बचाव कर्मियों का आरोप है कि दिन की आखिरी यात्रा होने के कारण कई लोगों को बिना टिकट या अवैध तरीके से चढ़ाया गया था। जब बांध के बीच में लहरों ने नाव को घेर लिया, तब चालक दल (क्रू) यात्रियों की मदद करने के बजाय अपनी जान बचाने के लिए पानी में कूद गया, जिससे अफरा-तफरी और बढ़ गई।
चेतावनी अनसुनी: किनारे से चिल्लाते रहे लोग
हादसे के वक्त किनारे पर मौजूद स्थानीय लोगों ने बताया कि वे 20 मिनट पहले से नाविक को वापस लौटने का इशारा कर रहे थे। मौसम तेजी से बिगड़ रहा था और विशाल लहरें नाव को झकझोर रही थीं। लेकिन पायलट ने इन चेतावनियों को अनसुना कर दिया। जबलपुर नाव हादसा के पीड़ित प्रदीप मैसी ने बताया कि जब उनकी पत्नी मरीना और 4 साल के बेटे त्रिशान का शव मिला, तो वे एक-दूसरे को कसकर पकड़े हुए थे। यह मंजर देखकर बचाव दल की आंखें भी नम हो गईं।
प्रशासन की सुस्ती: घंटों बाद पहुंची SDRF की टीम
हादसे के बाद बचाव कार्य में भी बड़ी खामियां नजर आईं। शाम 6:15 बजे संकट का संदेश (Distress Call) मिलने के बावजूद पहली सरकारी टीम 7 बजे के बाद ही रवाना हो सकी। बताया जा रहा है कि बचाव दल का वाहन भी समय पर स्टार्ट नहीं हुआ। अगर स्थानीय मछुआरे और निर्माण मजदूर तुरंत मौके पर न पहुँचते, तो मृतकों का आंकड़ा और भी भयावह हो सकता था। SDRF और NDRF की टीमों ने गैस कटर की मदद से नाव के डूबे हुए हिस्से को काटकर शवों को बाहर निकाला।
मुख्यमंत्री का कड़ा रुख: क्रूज संचालन पर पूरे राज्य में रोक
घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूरे मध्य प्रदेश में सभी क्रूज, मोटरबोट और वॉटर स्पोर्ट्स गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। उन्होंने घोषणा की है कि अब पूरे राज्य में सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, क्रूज पायलट महेश पटेल, हेल्पर छोटेलाल और टिकट इंचार्ज को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। मैनेजर सुनील मरावी को निलंबित किया गया है और क्षेत्रीय मैनेजर के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
प्रधानमंत्री ने जताया शोक, मुआवजे का ऐलान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर संवेदना व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने भी उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है जो इस बात की जांच करेगी कि मौसम के ‘ऑरेंज अलर्ट’ के बावजूद नाव को पानी में क्यों उतारा गया।
इंतजार और उम्मीद: लापता लोगों की तलाश जारी
शुक्रवार शाम भारी बारिश के कारण बचाव अभियान रोकना पड़ा, जिसे शनिवार सुबह फिर शुरू किया गया। 72 वर्षीय रियाज हुसैन जैसे कई लोग अब भी बांध के किनारे अपने परिवार के लौटने का इंतजार कर रहे हैं। जबलपुर नाव हादसा ने न केवल मध्य प्रदेश पर्यटन पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि सुरक्षा नियमों में एक छोटी सी चूक कैसे दर्जनों परिवारों को उम्र भर का गम दे सकती है।



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