“बी नागेंद्र का इस्तीफा” कैबिनेट से इस्तीफा, वाल्मीकि निगम घोटाले में चार्जशीट
बी नागेंद्र का इस्तीफा कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित वित्तीय अनियमितताओं और 89 करोड़ रुपये के घोटाले को लेकर राज्य की कर्नूल/कर्नाटक राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। चौतरफा राजनीतिक दबाव और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दाखिल चार्जशीट के बाद कर्नाटक के योजना मंत्री बी. नागेंद्र ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
बेल्लारी रूरल सीट से विधायक बी. नागेंद्र ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली कैबिनेट में फिर से शामिल होने के महज 25 दिनों के भीतर ही अपने पद से त्यागपत्र सौंप दिया। अपने फैसले का ऐलान करते हुए नागेंद्र विधान सौधा में मीडिया के सामने भावुक हो गए और उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर गंभीर आरोप लगाए।
भावुक हुए नागेंद्र: ‘दलित और आदिवासी होने के कारण निशाना बनाया गया’
संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बी. नागेंद्र ने कहा कि उन पर लगाए जा रहे आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका इस्तीफा किसी अपराध की स्वीकारोक्ति नहीं, बल्कि अपनी पार्टी और सरकार की साख बचाए रखने के लिए उठाया गया कदम है।
दलित कार्ड और आरोप: नागेंद्र ने सवाल उठाया, “क्या वाल्मीकि निगम के अवैध वित्तीय लेनदेन में कहीं मेरे हस्ताक्षर हैं? जब पूरा मामला बैंकों के जरिए निपटाया गया, तो सीधी जिम्मेदारी मुझ पर क्यों डाली जा रही है? मुझे केवल इसलिए बलि का बकरा बनाया जा रहा है क्योंकि मैं एक पिछड़े और आदिवासी समाज से आता हूं।”
संविधान बनाम मनुस्मृति का आरोप: उन्होंने आगे कहा कि वे भारत के संविधान में अटूट विश्वास रखते हैं, जबकि विपक्षी दल बीजेपी ‘मनुस्मृति’ की सोच को थोपने की कोशिश कर रही है और उसकी मानसिकता ‘आदिवासी-विरोधी’ है।
हजारों झूठ फैलाए गए: नागेंद्र ने आरोप लगाया कि उनके और उनकी पार्टी के खिलाफ प्रतिदिन ‘हजारों झूठ’ बोले जा रहे हैं और विधानसभा के भीतर इन मुद्दों पर चर्चा करने के बार-बार दिए गए प्रस्तावों को खारिज किया गया।
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क्या है वाल्मीकि निगम घोटाला?
यह पूरा विवाद कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम (Karnataka Maharshi Valmiki ST Development Corporation) के फंड्स में हुए कथित गबन से जुड़ा हुआ है:
खुलासा और सुसाइड नोट: मई 2024 में यह मामला तब सामने आया जब निगम के अकाउंट्स ऑफिसर पी. चंद्रशेखरन ने आत्महत्या कर ली। चंद्रशेखरन ने अपने सुसाइड नोट में निगम के बैंक खातों से करोड़ों रुपये के अनधिकृत ट्रांसफर और घोटाले का गंभीर आरोप लगाया था।
89 करोड़ रुपये की गड़बड़ी: जांच एजेंसियों के अनुसार, लगभग 89 करोड़ रुपये की सरकारी राशि को फर्जी और अनधिकृत खातों में ट्रांसफर किया गया था।
दूसरी बार इस्तीफा: इस मामले में जून 2024 में पहली बार नागेंद्र को आदिवासी कल्याण मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। हालांकि, बाद में उन्हें पुनः कैबिनेट में शामिल किया गया था, लेकिन सीबीआई की चार्जशीट के बाद विपक्षी दल लगातार उनके निष्कासन की मांग पर अड़े हुए थे।
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BJP की 200 किमी की पदयात्रा से ठीक पहले बड़ा घटनाक्रम
बी. नागेंद्र का यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी बीजेपी ने सरकार के खिलाफ एक बड़े और आक्रामक आंदोलन की घोषणा की थी।
10-दिवसीय पदयात्रा: बीजेपी ने 1 से 10 सितंबर तक रायचूर से बल्लारी तक 200 किलोमीटर लंबी ‘पदयात्रा’ आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस पदयात्रा का मुख्य लक्ष्य वाल्मीकि निगम घोटाले, भ्रष्टाचार और कांग्रेस सरकार की प्रशासनिक विफलताओं को उजागर करना है।
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राजनीतिक दबाव: नागेंद्र की दोबारा कैबिनेट में वापसी को बीजेपी ने प्रमुख मुद्दा बनाया हुआ था। ऐसे में बीजेपी के अभियान की शुरुआत से ठीक पहले मंत्री के इस्तीफे से सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी ने डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की है।
बी. नागेंद्र के इस्तीफे के बाद कर्नाटक में वाल्मीकि कॉर्पोरेशन घोटाले की जांच की आंच और तेज होने की संभावना है। जहाँ एक तरफ सीबीआई और राज्य की एजेंसियां इस वित्तीय हेराफेरी की कानूनी जांच में जुटी हैं, वहीं दूसरी तरफ इस मुद्दे को लेकर राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी बीजेपी के बीच राजनीतिक रस्साकशी और उग्र होने के आसार हैं।
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