दिल्ली के एक न्यायालय कर्मचारी ने जमानत के लिए रिश्वत के आरोप में गिरफ्तारी के बाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मुकेश कुमार नामक यह कर्मचारी एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक शाखा) के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग कर रहा है। उसका आरोप है कि एसीबी अधिकारियों ने एक सत्र न्यायाधीश को “फंसाने” की साजिश रची।
जमानत के लिए रिश्वत मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद एक जीएसटी चोरी केस से जुड़ा है, जिसमें कम से कम छह आरोपी शामिल हैं। अगस्त 2024 में वकील बबीता शर्मा को इसी मामले में गिरफ्तार किया गया। उन्होंने सत्र न्यायालय में जमानत याचिका दायर की, लेकिन आवेदन लंबे समय तक लटका रहा। बाद में, आरोप लगा कि जमानत के लिए रिश्वत मांगी गई। शर्मा के वकील प्रसून वशिष्ठ ने एसीबी को शिकायत दर्ज कराई।
मुकेश कुमार के अनुसार, एसीबी अधिकारी न्यायाधीश के “प्रतिकूल आदेशों” से नाराज थे। 16 मई को, जिस दिन उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई, उसी दिन न्यायाधीश ने एसीबी के एक वरिष्ठ अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया। यह नोटिस एक अलग मामले में अवमानना की कार्यवाही से जुड़ा था। कुमार का दावा है कि यही वजह है कि न्यायाधीश और उन्हें निशाना बनाया गया।
ऑडियो क्लिप: मामले में नया मोड़
आरोपों का समर्थन करने के लिए एक ऑडियो रिकॉर्डिंग सामने आई है। इसमें एसीबी के जांच अधिकारी कथित तौर पर “न्यायाधीश को फंसाने” की बात स्वीकार करते दिखे। वकील आयुष जैन के अनुसार, यह रिकॉर्डिंग एसीबी की “प्रतिशोधी कार्रवाई” को उजागर करती है। उन्होंने कहा, “यह कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है।”
एसीबी का पक्ष और आगे की कार्यवाही
एसीबी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि एफआईआर में पर्याप्त सबूत हैं। उनके वकीलों ने दावा किया कि सभी जानकारी दिल्ली सरकार और हाईकोर्ट को सौंपी जा चुकी है। हालांकि, याचिकाकर्ता की टीम ने जोर देकर कहा कि जमानत के लिए रिश्वत का आरोप झूठा है और इसे न्यायाधीश के खिलाफ प्रतिशोध के तौर पर गढ़ा गया।
यह मामला न्यायपालिका और जांच एजेंसियों के बीच तनाव को उजागर करता है। जमानत के लिए रिश्वत के आरोपों ने एक बार फिर भ्रष्टाचार निरोधक तंत्र की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं। अब सभी की निगाहें दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, जो इस जटिल विवाद का समाधान करेगा।
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