शुभांशु शुक्ला की पृथ्वी वापसी: भारत के पहले ISS अंतरिक्ष यात्री की वापसी
भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की पृथ्वी वापसी आज से शुरू हो रही है, जिसमें एक्सिओम-4 मिशन के तीन अन्य क्रू सदस्य भी उनके साथ एक ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा का समापन कर रहे हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी है। अंतरिक्ष यान के अलग होने का समय आज शाम 4:30 बजे भारतीय समय के अनुसार तय किया गया है।
- क्रू सदस्य कल दोपहर लगभग 3 बजे पृथ्वी पर वापस आ जाएँगे।
- शुभांशु शुक्ला की पृथ्वी वापसी के साथ भारत का गौरव बढ़ा रहे हैं।
- यह सफल मिशन वैश्विक अंतरिक्ष अन्वेषण में भारत की बढ़ती उपस्थिति का प्रतीक है।
पृथ्वी पर लौटने के बाद, वे NASA के पुनर्वास कार्यक्रम के तहत 7 दिनों के लिए फ्लाइट सर्जनों की देखरेख में रहेंगे। यह उन्हें पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के अनुकूल होने में मदद करेगा।
मुख्य बिंदु :
- भारतीय वायुसेना अधिकारी शुभांशु शुक्ला की पृथ्वी वापसी आज शाम 4:30 बजे से प्रारंभ होगी।
- ISS पर 18 दिन रहकर शुभांशु ने जैव तकनीक, एआई, स्वास्थ्य पर 60 से अधिक प्रयोग किए।
- शुभांशु शुक्ला बने अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचने वाले भारत के पहले और दूसरे अंतरिक्ष यात्री।
- स्पेसएक्स ड्रैगन यान से चारों अंतरिक्ष यात्री कल दोपहर पृथ्वी पर ‘स्प्लैशडाउन’ करेंगे।
- मिशन में शामिल भारत-विशेष प्रयोग गगनयान जैसी भविष्य की उड़ानों के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगे।
- विदाई संदेश में उन्होंने भारत की महानता को याद करते हुए कहा – ‘भारत अभी भी सारे जहाँ से अच्छा है।’
- परिवार बेसब्री से इंतजार में, माँ ने आम रस और हलवा खाने की शुभांशु की इच्छा साझा की।
18 दिनों का ऐतिहासिक मिशन और वैज्ञानिक योगदान
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर 18 दिनों के ऐतिहासिक मिशन पर थे, हालांकि उनका मूल मिशन 14 दिनों का था। उन्होंने अपने एक्स-4 क्रूमेट्स के साथ 60 से अधिक अत्याधुनिक वैज्ञानिक प्रयोग पूरे किए। इन प्रयोगों में जैव प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, और पदार्थ विज्ञान शामिल थे।
- उन्होंने मानव स्वास्थ्य से संबंधित महत्वपूर्ण शोध भी किया।
- शुभांशु शुक्ला ISS पहुंचने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बने।
- वह 3 अप्रैल 1984 में अंतरिक्ष में गए विंग कमांडर राकेश शर्मा के बाद दूसरे भारतीय हैं।
यह मिशन भारत के आगामी गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के लिए बहुमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान करेगा। इन प्रयोगों में भारत-विशिष्ट सात प्रयोग भी शामिल थे।
प्रमुख प्रयोग और उपलब्धियाँ
अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर अपने प्रवास के दौरान, मिशन पायलट शुभांशु शुक्ला ने कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक योगदान दिए। इनमें स्प्राउट्स प्रोजेक्ट प्रमुख था, जिसने सूक्ष्मगुरुत्व में बीज के अंकुरण और पौधों के शुरुआती विकास का अध्ययन किया। उनका एक अन्य प्रमुख ध्यान सूक्ष्म शैवाल अनुसंधान पर था।
- ग्लूकोज निगरानी उपकरणों पर भी महत्वपूर्ण परीक्षण किए गए।
- उन्होंने मिशन के बाद आनुवंशिक मूल्यांकन के लिए छह किस्मों की तस्वीरें खींचीं।
- शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष में पादप जीव विज्ञान को समझने के हमारे तरीके को नया रूप दिया।
उन्होंने अंतरिक्ष वातावरण में स्वास्थ्य लाभ और उपचार में सुधार लाने के उद्देश्य से स्टेम सेल अनुसंधान के लिए विशेष उत्साह व्यक्त किया। उन्होंने शोधकर्ताओं और स्टेशन के बीच सेतु बनने पर गर्व महसूस किया।
शुभांशु शुक्ला का विदाई संदेश और पारिवारिक भावनाएँ
13 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर एक विदाई समारोह में, शुभांशु शुक्ला ने एक भावपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने अपनी अंतरिक्ष यात्रा को “अविश्वसनीय” बताया और इसरो, अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों, और भारत के लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “भारत अभी भी सारे जहाँ से अच्छा है।”
- उनकी माँ, आशा शुक्ला, और पिता, शंभू दयाल शुक्ला, उनकी वापसी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
- उन्होंने घर का खाना खाने की इच्छा व्यक्त की थी, जिसमें आम का रस और हलवा शामिल था।
- परिवार उनकी सुरक्षित वापसी की प्रार्थना कर रहा है और एक भव्य स्वागत की तैयारी में है।
उनकी वापसी भारतीय वायु सेना के अधिकारी शुभांशु शुक्ला के सफल मिशन की परिणति है, जो भारत के लिए एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक उपलब्धि है।
मिशन क्रू और वापसी की प्रक्रिया
एक्सिओम-4 मिशन 25 जून को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए रवाना हुआ था। शुभांशु शुक्ला के साथ, इस मिशन में तीन अन्य अंतरिक्ष यात्री भी शामिल थे। वे अमेरिका से कमांडर पैगी व्हिटसन, पोलैंड से मिशन विशेषज्ञ स्लावोज़ उज़्नान्स्की-विस्नीव्स्की और हंगरी से टिबोर कापू थे। यह यात्रा नासा और स्पेसएक्स के सहयोग से एक्सिओम स्पेस द्वारा किया गया चौथा निजी मिशन था। शुभांशु शुक्ला की पृथ्वी वापसी इस ऐतिहासिक मिशन का सफल समापन है।
- स्पेसएक्स फाल्कन 9 को फ्लोरिडा स्थित नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से प्रक्षेपित किया गया था।
- स्पेसएक्स ड्रैगन अंतरिक्ष यान वैज्ञानिक नमूनों और उपकरणों सहित 580 पाउंड से अधिक का सामान अपने साथ ले जाएगा।
- शुभांशु शुक्ला की पृथ्वी वापसी कैलिफ़ोर्निया तट के पास प्रशांत महासागर में ‘स्प्लैशडाउन’ के रूप में होगी।



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