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“आचार्य देवव्रत बने महाराष्ट्र राज्यपाल, उपराष्ट्रपति चुनाव के बाद नया सियासी

आचार्य देवव्रत महाराष्ट्र राज्यपाल

भारत के उपराष्ट्रपति के रूप में सीपी राधाकृष्णन के चुनाव के बाद, आचार्य देवव्रत महाराष्ट्र राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार संभालने जा रहे हैं। 9 सितंबर को, सीपी राधाकृष्णन 452-300 के मतों के भारी अंतर से भारत के नए उपराष्ट्रपति चुने गए थे। उनकी जीत के बाद, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में उनके पद छोड़ने के बाद गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को महाराष्ट्र के राज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा। यह कदम राजनीतिक गलियारों में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। सीपी राधाकृष्णन ने संयुक्त विपक्षी दल इंडिया ब्लॉक के उम्मीदवार और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी सुदर्शन रेड्डी को 152 मतों से हराया। राधाकृष्णन को 452 वोट मिले, जबकि रेड्डी को 300 वोट मिले, जिससे विजयी उम्मीदवार के पक्ष में क्रॉस वोटिंग के संकेत मिले।

यह चुनाव पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के 21 जुलाई को अचानक इस्तीफे के बाद आवश्यक हो गया था। राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि सीपी राधाकृष्णन के उपराष्ट्रपति चुने जाने के बाद, उन्हें महाराष्ट्र के राज्यपाल का पद छोड़ना पड़ा। इसके परिणामस्वरूप, राष्ट्रपति ने गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को अपने कर्तव्यों के अलावा, महाराष्ट्र के राज्यपाल के कार्यों का निर्वहन करने के लिए नियुक्त किया।

कौन हैं आचार्य देवव्रत?

आचार्य देवव्रत, जिन्हें आचार्य देवव्रत महाराष्ट्र राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है, 2019 से गुजरात के राज्यपाल के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले, वे अगस्त 2015 से जुलाई 2019 तक हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल भी रह चुके हैं। भारत के राष्ट्रीय पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, देवव्रत की कई शैक्षणिक योग्यताओं में इतिहास और हिंदी में स्नातकोत्तर, शिक्षा में स्नातक और योग विज्ञान में डिप्लोमा शामिल है। वे प्राकृतिक चिकित्सा और योग विज्ञान के डॉक्टर भी हैं।

वे वैदिक मानवीय मूल्यों और वैदिक दर्शन पर व्याख्यान भी देते हैं और इन्हें लोकप्रिय बनाने के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन करते हैं। उन्होंने प्राकृतिक खेती और गाय-नस्ल सुधार के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए भी बड़े पैमाने पर काम किया है। वर्तमान में, देवव्रत गुजरात के कई विश्वविद्यालयों जैसे गुजरात विश्वविद्यालय, हेमचंद्राचार्य उत्तर गुजरात विश्वविद्यालय, सरदार पटेल विश्वविद्यालय, सौराष्ट्र विश्वविद्यालय और गुजरात प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के रूप में कई प्रमुख पदों पर हैं।

सीपी राधाकृष्णन: एक संक्षिप्त परिचय

तमिलनाडु के अनुभवी राजनेता, 67 वर्षीय सीपी राधाकृष्णन की जड़ें बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी रही हैं और वे दशकों तक पहले जनसंघ और फिर भाजपा में रहे। उनकी जीत सदन में सत्तारूढ़ गठबंधन की संख्याबल में बढ़त के कारण निश्चित थी। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास 427 सांसद थे, साथ ही वाईएसआरसीपी के 11 सांसदों का समर्थन भी था। कुछ छोटे दलों के सांसदों ने भी उनका समर्थन किया, जिससे राधाकृष्णन की जीत सुनिश्चित हो गई।

नव-निर्वाचित उपराष्ट्रपति ने अपनी जीत को राष्ट्रवादी विचारधारा की जीत बताया है और 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए काम करने का संकल्प लिया है। उन्होंने उपराष्ट्रपति चुनाव 152 मतों के अंतर से जीता। श्री राधाकृष्णन को 452 मत मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी बी. सुदर्शन रेड्डी को 300 मत मिले। अपनी पहली सार्वजनिक संबोधन में, उन्होंने कहा कि यह प्रत्येक भारतीय की जीत है और लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही महत्वपूर्ण हैं।

मृदुभाषी और गैर-टकराववादी नेता माने जाने वाले राधाकृष्णन जगदीप धनखड़ का स्थान लेंगे, जिन्होंने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया था। वह इस प्रतिष्ठित पद पर आसीन होने वाले तमिलनाडु के तीसरे नेता हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी है। हारे हुए उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी ने विनम्रतापूर्वक परिणाम स्वीकार करते हुए राधाकृष्णन को शुभकामनाएं दी हैं।

सीपी राधाकृष्णन का राजनीतिक सफर

चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन, जिनका जन्म 20 अक्टूबर, 1957 को तमिलनाडु के तिरुप्पुर में हुआ था, एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में नामित होने से पहले जुलाई 2024 से महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में कार्यरत थे। इससे पहले उन्होंने झारखंड के राज्यपाल के रूप में कार्य किया और तेलंगाना तथा पुडुचेरी का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला। कोयंबटूर से दो बार सांसद रहे, उन्होंने भाजपा में शामिल होने से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनसंघ के साथ अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की। उन्होंने भाजपा के तमिलनाडु प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया।

2016 से 2020 के बीच, उन्होंने एमएसएमई मंत्रालय के अंतर्गत कॉयर बोर्ड की अध्यक्षता की। 2020 से 2022 तक, वे केरल के लिए भाजपा के प्रभारी रहे। खेलों के प्रति उत्साही होने के कारण, वे टेबल टेनिस में उत्कृष्ट थे और क्रिकेट तथा वॉलीबॉल में गहरी रुचि रखते थे। उन्होंने एशिया, यूरोप और उत्तरी अमेरिका में कई अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों में भारत का प्रतिनिधित्व भी किया है।

सीपी राधाकृष्णन इस पद को धारण करने वाले 15वें व्यक्ति हैं, लेकिन इस पद के संदर्भ में उन्हें 17वें उपराष्ट्रपति के रूप में गिना जाता है। इस पूरे घटनाक्रम में, आचार्य देवव्रत महाराष्ट्र राज्यपाल के रूप में एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं।

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