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“बिजली बिल में मनमानी ” अडानी स्मार्ट मीटर से जनता की जेब पर डाका

बिजली बिल में मनमानी

बिजली बिल में मनमानी देश की जनता आज अडानी इलेक्ट्रिसिटी की लूट के जाल में फंसकर त्रस्त है, जहाँ बिजली जैसे जीवनरेखा को हथियार बनाकर जेबें काटी जा रही हैं। यह कहानी केवल एक शहर की नहीं, बल्कि ‘स्मार्ट मीटर’ के नाम पर हो रही एक व्यापक ‘स्मार्ट लूट’ की है।

2020 से ही मुंबई में 48,000 से अधिक शिकायतें दर्ज हुईं, जहाँ लॉकडाउन के नाम पर औसत बिलों के बहाने वास्तविक खपत से दोगुने-तिगुने बिल थोपे गए। MERC ने भी 2018 में आदेश दिया था कि चार लाख उपभोक्ताओं को गलत औसत बिलों का रिफंड किया जाए, लेकिन क्या हुआ? कुछ नहीं!

यह लूट का सिलसिला है, जहाँ गरीब घरों में एक पंखा और बल्ब चलाने पर भी लाखों का बिल आ जाता है। उन्नाव के उस युवक की कहानी इसका सबसे दुखद उदाहरण है, जिसने 1.9 लाख के बिल से तंग आकर जान दे दी।

2024 में मुंबई में स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिलों में 50% तक की वृद्धि देखी गई, जबकि X पर एक यूजर ने लिखा, “बिना AC के बिल 10,000 पार, अडानी का जवाब, गर्मी की वजह!” यह अत्याचार है, न कि सेवा, एक ऐसा सिस्टम जो गरीबों को कंगाली की ओर धकेल रहा है।

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स्मार्ट मीटर की तेज़ दौड़ और उपभोक्ता की खाली जेब

स्मार्ट मीटर को तकनीकी क्रांति बताकर थोपा गया यह जाल अब जनता का सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुका है। मुंबई में अडानी उपभोक्ताओं के स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिल में मनमानी वृद्धि हुई, जिससे दैनिक इंस्टॉलेशन 1,200 से गिरकर मात्र 250 रह गया। BEST के उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि लोग मीटर हटाने की धमकी दे रहे हैं।

यह सिर्फ मुंबई तक सीमित नहीं है; बिहार से गुजरात तक, स्मार्ट मीटर सर्वर से कनेक्ट न होने पर एवरेज बिल थोपे जाते हैं, जो पाँच-छह दिनों में ही हजारों में बदल जाते हैं। साफ है, मीटर की रीडिंग तेज दौड़ती है और उपभोक्ता की जेब खाली होती जाती है।

टेंडर रद्द, फिर भी केंद्र की RDSS स्कीम से बोझ क्यों?

स्मार्ट मीटर की ऊंची कीमत और संदिग्ध डिलीवरी शेड्यूल को लेकर कई राज्यों में सवाल उठे हैं। 2024 में तमिलनाडु सरकार ने अडानी का 8.2 मिलियन मीटर टेंडर रद्द कर दिया, क्योंकि प्रति मीटर 10,000 रुपये की ऊंची कीमत थी। उत्तर प्रदेश में भी 25,000 करोड़ का अडानी टेंडर कैंसल हुआ, लेकिन केंद्र की RDSS स्कीम के तहत 25 करोड़ मीटर थोपे जा रहे हैं, जहाँ उपभोक्ता ₹30,000 का बोझ उठाने को मजबूर है।

2025 में आंध्र प्रदेश में TDP-JSP-BJP गठबंधन ने भी ₹30,000 प्रति मीटर थोप दिया, जिससे उपभोक्ताओं पर 100% टैरिफ बढ़ोतरी का बोझ पड़ा। इन सब के बीच, अडानी को 2025 में 750 मिलियन डॉलर का बॉन्ड मिला, जो सवाल खड़े करता है।

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बिल में देरी पर ब्लैकआउट: यह अत्याचार है या सेवा?

बिल भरने में एक हफ्ते की देरी पर स्मार्ट मीटर से बिजली काट देना, यह तो खुला अत्याचार है! अडानी की पॉलिसी में डिस्कनेक्शन का प्रावधान है, लेकिन MERC के नियमों के बावजूद, बिना नोटिस के जीवनोपयोगी सुविधा ठप कर दी जाती है।

मुंबई जैसे शहर में बिजली के बिल भुगतान में देरी पर ब्लैकआउट, फिर बच्चों की पढ़ाई, मरीजों का इलाज, सब ठप! 2025 में केरल में 16 पैसे प्रति यूनिट हाइक के खिलाफ कांग्रेस ने विरोध किया, आरोप लगाया कि यह अडानी को फायदा पहुंचाने के लिए है।

महाराष्ट्र में कांग्रेस ने 2024 में BKC मार्च निकाला, लेकिन पुलिस ने रोका; फिर भी शिकायतें 48,000 पार हो चुकी हैं। यह केवल बिजली नहीं, बल्कि गरीबों का जीना हराम कर रहा है।

पब्लिक मनी पर अडानी का हक़: SBI, LIC और क्रोनी कैपिटलिज्म

भाजपा की केंद्र और राज्य सरकारें अडानी के लिए दलाल बनकर जनता को सब्जेक्ट के रूप में बेच रही हैं! बिजली बिल में मनमानी तो एक तरफ है, देश के बैंकों में जमा जनता के पैसे पर भी इसका सीधा असर दिख रहा है। 2020-22 में अडानी को 48,000 करोड़ के लोन मिले, जिनमें 40% सिर्फ SBI से। क्या यह संयोग है?

वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट कहती है कि फाइनेंस मिनिस्ट्री ने LIC को अडानी में 3.9 बिलियन डॉलर निवेश करने को मजबूर किया, जबकि ग्लोबल बैंक ब्राइबरी के आरोपों से पीछे हट रहे थे। 2025 में अडानी का कर्ज 20% बढ़कर 2.6 लाख करोड़ हो गया, जिसमें 50% अब घरेलू बैंकों से है, और SBI का एक्सपोजर 27,000 करोड़ है!

राहुल गांधी ने सही कहा था, “पैसा आपका, फायदा अडानी का!” यह क्रोनी कैपिटलिज्म का नंगा नाच है, जहाँ 2024 के US ब्राइबरी केस ($265 मिलियन) के बावजूद मोदी सरकार लगातार अडानी को बचा रही है।

‘हेयरकट’ का खेल और टैक्सपेयर्स का पैसा

जनता के द्वारा बैंकों में जमा पैसे अडानी को लोन के रूप में सौंप दिए जाते हैं, लेकिन रिकवरी में ‘हेयरकट’ का खेल हो जाता है! कांग्रेस के अनुसार, 10 तनावग्रस्त कंपनियों के 62,000 करोड़ के दावों को अडानी ने खरीदकर मात्र 16,000 करोड़ में सेटल करा दिया, यानी 74% का हेयरकट!

LIC का 3.9 बिलियन निवेश, जो मिडिल क्लास की सेविंग्स हैं, अडानी के कर्ज चुकाने में लगाया गया। मई 2025 में DFS, MoF और NITI Aayog ने मिलकर 3.9 बिलियन का प्लान बनाया, जहाँ LIC ने 3.4 बिलियन बॉन्ड्स और 507 मिलियन अडानी की इक्विटी में झोंक दिया।

इतना ही नहीं, बिहार में ज़मीन ₹1 प्रति एकड़ पर दे दी गई, एयरपोर्ट्स का प्राइवेटाइजेशन रिग्ड हुआ, और ED-CBI का दुरुपयोग किया गया। यह लूट का चक्र है, जहाँ टैक्सपेयर्स का पैसा कॉर्पोरेट्स को मिलता है, और उसी जनता को बिलों के भरने में देरी पर सताया जाता है। 2025 Q1 में अडानी का EBITDA 8.2% ऊपर, लेकिन जनता का कर्ज 20%!

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कोयला घोटाला: बिलों की आग में घी

अडानी का कोयला घोटाला जनता के बिजली बिल में मनमानी की आग में घी डाल रहा है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट और OCCRP की जाँच से खुलासा हुआ कि अडानी ने लो-ग्रेड कोयला हाई-ग्रेड कीमतों पर NTPC को बेचा, जिससे बिजली उत्पादन महंगा हुआ।

2014 में अडानी ने इंडोनेशिया से $28/टन पर लो-ग्रेड कोयला (3500 kcal/kg) खरीदा, उसे $92/टन पर हाई-ग्रेड (6000 kcal/kg) बताकर NTPC को बेच दिया और ₹3,000 करोड़ का प्रॉफिट बना लिया, जिससे प्रदूषण भी बढ़ा। 2025 में बांग्लादेश को $1.3 बिलियन का बकाया और 2% मासिक ब्याज का पैटर्न भी यही है।

2024-25 में मुंबई में टैरिफ 9.52% से 24.09% हाइक हुआ, जिसे MERC ने अडानी के प्रपोजल से भी ज्यादा अप्रूव किया! इससे सरकार की मिलीभगत साफ दिख रही है।

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जनता की पुकार: क्या यह ‘विकसित भारत’ या ‘विकसित लूट’?

बिजली बिल में मनमानी के साथ-साथ यह सवाल भी है कि सरकारें चुप क्यों हैं? क्योंकि यह ‘स्मार्ट’ लुटेरों का राज है! भाजपा की केंद्र और राज्य सरकारें अडानी के लिए दलाल बनकर जनता को बेच रही हैं। आंध्र में TDP-JSP-BJP-YSRCP सब अडानी के साथ स्मार्ट मीटर थोप रहे हैं। कांग्रेस और CPI(M) जैसे दल संघर्ष में उतर चुके हैं।

2025 में दमोह (MP) में BSP ने कलेक्ट्रेट घेरा, नारे लगाए “अडानी मुर्दाबाद!” केरल में कांग्रेस ने प्रोटेस्ट किया। यह ‘विकसित भारत’ है या विकसित लूट? देश की जनता को अब चुप्पी तोड़नी ही होगी, क्योंकि यह लूट और अत्याचार का अंत केवल जन आंदोलन से ही संभव है।

उठो, पुकारो, आंदोलन करो, JPC द्वारा इस ज़नलूट के जाँच की मांग करो, अन्यथा यह ‘नया भारत’ अडानीस्तान में तब्दील किया जा रहा है। भारत की जनता उठो, जागो और देश को अडानी-अम्बानी, शाह-मोदी जैसे स्मार्ट लुटेरों की चांडाल चौकड़ी से बचाओ!

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