एयर इंडिया अहमदाबाद विमान हादसा क्या जानबूझकर किया गया क्रैश था?
अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया फ़्लाइट AI 171 के भयानक हादसे की जांच कर रहे जांचकर्ताओं ने एक ऐसा नतीजा निकाला है जो पूरी दुनिया को चौंका सकता है। इटली के प्रतिष्ठित डेली अखबार ‘कोरिएरे डेला सेरा’ ने नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच हुई ताज़ा बातचीत से वाकिफ सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि यह हादसा किसी तकनीकी खराबी की वजह से नहीं, बल्कि एक जानबूझकर किया गया क्रैश था।
रिपोर्ट के अनुसार, 12 जून, 2025 को इंजन में फ्यूल कट-ऑफ के बाद हुआ यह हादसा किसी मैकेनिकल फेलियर का परिणाम नहीं था, बल्कि इंजन फ्यूल कंट्रोल स्विच को मैनुअली बंद करने की वजह से हुआ था। हालांकि, भारत के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की आधिकारिक रिपोर्ट जारी होने से पहले अंतिम निष्कर्ष पर पहुँचना जल्दबाज़ी होगी, लेकिन इस रिपोर्ट ने एविएशन सेक्टर में हड़कंप मचा दिया है।
इंजन फ्यूल स्विच और कॉकपिट की आखिरी बातचीत का सच
जांच में मदद कर रहे अमेरिकी विशेषज्ञों ने इन नतीजों को एक “बड़ी कामयाबी” बताया है। ब्लैक बॉक्स डेटा के आधार पर शुरुआती तकनीकी आकलन ने पहले ही मैकेनिकल खराबी को खारिज कर दिया था और इसके बजाय इंजन इग्निशन और शटडाउन को रेगुलेट करने वाले स्विच के मैनुअल मूवमेंट की ओर इशारा किया था। क्रैश के समय दोनों इंजन बंद पाए गए थे।
भारत के एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की जुलाई 2025 की शुरुआती रिपोर्ट में भी कॉकपिट की उस रहस्यमयी बातचीत का ज़िक्र था, जिसमें एक पायलट को दूसरे से पूछते हुए सुना गया, “तुमने (फ्यूल) क्यों बंद किया?” और दूसरे ने जवाब दिया, “मैंने ऐसा नहीं किया।” इटली के अखबार ने इसी बात को दोहराते हुए दावा किया है कि जानबूझकर किया गया क्रैश होने की संभावना इसलिए प्रबल है क्योंकि किसी ने स्विच को ‘रन’ से ‘कटऑफ’ पोजीशन पर कर दिया था।
इसे भी पढ़े :- भारत बंद से बैंकिंग और ट्रांसपोर्ट ठप, राहुल गांधी ने किया समर्थन
कैप्टन सुमीत सभरवाल और को-पायलट पर उठते सवाल
इस हादसे में एयर इंडिया का बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरने के महज 32 सेकंड बाद ही क्रैश हो गया था। विमान में सवार 242 लोगों (जिसमें 12 क्रू मेंबर शामिल थे) के अलावा ज़मीन पर मौजूद 19 लोग भी मारे गए, क्योंकि विमान एक मेडिकल स्टूडेंट हॉस्टल पर जा गिरा था। कुल 260 लोगों की जान चली गई। रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य संदिग्ध कैप्टन सुमीत सभरवाल हैं, जो पायलट-इन-कमांड थे।
अखबार का दावा है कि वह कथित तौर पर डिप्रेशन से जूझ रहे थे। वहीं फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर को-पायलट थे। जांचकर्ताओं का मानना है कि इंजन एक-एक करके बंद हुए—पहले बायां इंजन (जहां कैप्टन बैठते हैं) और फिर दायां। डेटा यह भी दिखाता है कि आखिरी पलों में फर्स्ट ऑफिसर ने विमान को ऊपर उठाने की कोशिश की थी, जबकि कैप्टन का कंट्रोल कॉलम न्यूट्रल रहा।
पायलट एसोसिएशन और परिवार ने जांच को बताया पक्षपाती
जैसे ही यह खबर फैली कि यह जानबूझकर किया गया क्रैश हो सकता है, इंडियन पायलट्स एसोसिएशन और कैप्टन सभरवाल के परिवार ने इसकी तीखी आलोचना शुरू कर दी। सभरवाल के पिता पुष्करराज सभरवाल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे किसी को दोषी ठहराने की “सोची-समझी कोशिश” बताया है।
उन्होंने अपने बेटे की मेंटल हेल्थ और व्यक्तिगत जीवन (तलाक की खबरें) से जुड़ी अटकलों को गलत बताया और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर न्यायिक जांच की मांग की है। फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) भी इस याचिका में शामिल है।
उनका तर्क है कि AAIB की रिपोर्ट ने कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग को चुनकर पेश किया है ताकि सारा दोष पायलटों पर मढ़ा जा सके, जबकि एयरक्राफ्ट बनाने वाली कंपनी बोइंग और एयरलाइन की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
इसे भी पढ़े :- भारत-पाकिस्तान महामुकाबला 2026: तिलक वर्मा ने भरी हुंकार
अमेरिकी दबाव और सुरक्षा रेटिंग्स का अंतरराष्ट्रीय मुद्दा
इटैलियन रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। सूत्रों का कहना है कि भारतीय जांचकर्ताओं के रुख में बदलाव अमेरिका के दबाव और पश्चिमी देशों की उन धमकियों के कारण आया है, जिनमें भारतीय एयरलाइंस के सिक्योरिटी लेवल को कम करने की बात कही गई थी। दिसंबर में भारतीय जांचकर्ता वाशिंगटन गए थे, जहाँ नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) की लैब में ब्लैक बॉक्स डेटा का फिर से विश्लेषण किया गया।
बोइंग 787 के सिम्युलेटर टेस्ट में अमेरिकी विशेषज्ञों को ऐसा कोई परिदृश्य नहीं मिला जिसमें दोनों इंजन अपने आप बंद हो जाएं। विशेषज्ञों का मानना है कि जानबूझकर किया गया क्रैश ही एकमात्र तार्किक व्याख्या रह गई है, जिसे स्वीकार करना भारत के लिए अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि बचाने का एक “टिकाऊ त्याग” माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट का दखल और सरकार का संसद में जवाब
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से अब तक अपनाए गए “प्रोसिजरल प्रोटोकॉल” पर एक रिपोर्ट मांगी है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि AAIB की जांच अंतिम चरण में है और इसका कुछ हिस्सा विदेशों में होना अभी बाकी है। वहीं, संसद में सिविल एविएशन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने स्पष्ट किया कि AAIB एक स्वतंत्र संस्था है और जांच अंतरराष्ट्रीय मानकों (ICAO) के अनुसार हो रही है।
सरकार ने यह भी जानकारी दी कि फ्लाइट रिकॉर्डर्स (EAFR) पूरी तरह सुरक्षित कस्टडी और CCTV निगरानी में हैं। विपक्ष के सांसद मनीष तिवारी के सवालों के जवाब में सरकार ने किसी भी अलग रिव्यू की ज़रूरत से इनकार किया है, क्योंकि AAIB को पहले से ही कार्यात्मक स्वायत्तता प्राप्त है।
इसे भी पढ़े :- सोनम वांगचुक की हिरासत पर सुप्रीम कोर्ट की केंद्र को सख्त फटकार
मरने वालों के आंकड़े और सोशल मीडिया पर उपजा आक्रोश
इस हादसे में मरने वाले 241 यात्रियों में 169 भारतीय, 52 ब्रिटिश, सात पुर्तगाली नागरिक और एक कनाडाई शामिल थे। इटैलियन अखबार की इस रिपोर्ट पर सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई यूज़र्स विदेशी मीडिया की कहानियों पर सवाल उठा रहे हैं और इसे पायलटों को बदनाम करने की साजिश बता रहे हैं।
यूज़र्स का कहना है कि जब तक DGCA और आधिकारिक एजेंसियां अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश नहीं कर देतीं, तब तक इस तरह के सनसनीखेज दावों पर विश्वास करना ठीक नहीं है। लोगों ने यह भी तर्क दिया कि अगर कैप्टन केवल मॉनिटरिंग कर रहा था, तो उसने ऐसे घातक इनपुट क्यों दिए होंगे?
भविष्य की जांच और मेंटल हेल्थ मॉनिटरिंग के सुझाव
कोरिएरे डेला सेरा के मुताबिक, फाइनल जांच रिपोर्ट में केवल हादसे की वजह ही नहीं, बल्कि भविष्य के लिए बड़े सुझाव भी शामिल होंगे। इसमें पायलटों के नियमित साइकोलॉजिकल इवैल्यूएशन (मानसिक स्वास्थ्य मूल्यांकन) और लगातार मॉनिटरिंग पर ज़ोर दिया जा सकता है।
अंतिम रिपोर्ट के ड्राफ्ट में संभवतः “सावधानी भरा वर्जन” अपनाया जाए ताकि बड़े राष्ट्रीय विवादों से बचा जा सके, लेकिन यह तय है कि इस रिपोर्ट के बाद वैश्विक विमानन सुरक्षा के नियमों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। जांचकर्ता अब भी केबिन ऑडियो और फ्लाइट डेटा के हर सेकंड का बारीकी से मिलान कर रहे हैं ताकि इस मानवीय त्रासदी के असली कारणों से पर्दा उठाया जा सके।
इसे भी पढ़े :- SBI मार्केट कैप रिकॉर्ड: TCS को पछाड़कर बनी चौथी सबसे मूल्यवान कंपनी



Post Comment