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असम भाजपा विवादित वीडियो: मलेशिया दौरे के बीच हिमंता का नफरती वार

असम भाजपा विवादित वीडियो

असम भाजपा विवादित वीडियो असम भाजपा की आधिकारिक इकाई द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया और फिर भारी विरोध के बाद तुरंत डिलीट किया गया वह वीडियो न सिर्फ सांप्रदायिक घृणा का सबसे घटिया और खुला प्रदर्शन बनकर उभरा है, बल्कि इसने केंद्र सरकार की अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

7 फरवरी 2026 को यह वीडियो उस वक्त साझा किया गया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी मलेशिया यात्रा की शुरुआत कर रहे थे। एक तरफ मोदी एक मुस्लिम-बहुल देश में भारत की डिप्लोमेसी और सहयोग की नई इबारत लिखने की कोशिश कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ उनकी अपनी ही पार्टी की राज्य इकाई का असम भाजपा विवादित वीडियो भाजपा की कथित दोहरी नीति और हिपोक्रेसी को अंतरराष्ट्रीय पटल पर बेनकाब कर रहा था।

यह महज एक तकनीकी गलती नहीं, बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक टाइमिंग मालूम होती है जिसने देश के भीतर और बाहर एक नई बहस छेड़ दी है।

AI तकनीक का खतरनाक खेल: एयर राइफल और सांप्रदायिक निशानेबाजी

इस विवादित वीडियो की संरचना बेहद आपत्तिजनक और उकसाने वाली थी। लगभग 18 सेकंड के इस क्लिप में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को एक एयर राइफल (एयर पिस्टल) से “पॉइंट ब्लैंक शॉट” मारते हुए दिखाया गया था।

वीडियो की सबसे खतरनाक बात यह थी कि इसमें सीएम सरमा के राइफल हैंडलिंग के असली फुटेज को AI-जनरेटेड इमेजेस के साथ मिक्स किया गया था। इस डिजिटल हेरफेर के जरिए टोपी (स्कलकैप) और दाढ़ी वाले पुरुषों को निशाना बनाया गया, जिन्हें गोलियां लगते हुए दिखाया गया।

वीडियो में निशाना बनाए गए एक चरित्र की शक्ल कांग्रेस विधायक गौरव गोगोई जैसी दिखाई दे रही थी। यह स्पष्ट रूप से मुस्लिम पहचान, विशेषकर बंगाली-मूल के मुसलमानों या ‘मिया’ कम्युनिटी का मखौल उड़ाने और उनके खिलाफ हिंसा को सामान्य बनाने का एक हिंसक प्रयास था।

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“पॉइंट ब्लैंक शॉट” और नफरत भरे नारों की गूँज

वीडियो का कैप्शन “पॉइंट ब्लैंक शॉट” (Point Blank Shot) रखा गया था, जो सीधे तौर पर हत्या या हिंसा का संकेत देता है। स्क्रीन पर फ्लैश होने वाले टेक्स्ट ने इस नफरत की आग में घी डालने का काम किया। इसमें “विदेशी मुक्त असम” (Foreigner free Assam), “कोई दया नहीं” (No mercy), “तुम पाकिस्तान क्यों नहीं गए?

” (Why did you not go to Pakistan?), और “बांग्लादेशियों के लिए कोई माफी नहीं” (There is no forgiveness to Bangladeshis) जैसे घृणित और उत्तेजक स्लोगन्स का इस्तेमाल किया गया था।

असम भाजपा विवादित वीडियो में प्रयुक्त यह भाषा हिमंता बिस्वा सरमा की लंबे समय से चली आ रही मुस्लिम-विरोधी और बांग्लादेशी घुसपैठ वाली बयानबाजी को अब एक नए हिंसक और जेनोसाइड-स्टाइल (नरसंहार की शैली) के स्तर पर ले जाती दिख रही है, जो किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है।

सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और ‘मिया’ विरोधी आक्रामक बयानबाजी

यह वीडियो अचानक पैदा नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे मुख्यमंत्री सरमा की हालिया बयानबाजी का एक लंबा इतिहास है। रिपोर्ट्स (Scroll.in, The Wire, Indian Express, News18) के मुताबिक, वीडियो में असमिया भाषा के टेक्स्ट भी थे जो “नो मर्सी” के नारे चीख रहे थे।

याद रहे कि जनवरी 2026 में दिग्बोई में दिए एक भाषण में सरमा ने “मिया” समुदाय को “सफर” (पीड़ित) बनाने की बात कही थी। उन्होंने खुले मंच से लोगों को सलाह दी थी कि वे बंगाली मुसलमानों को रिक्शा किराया कम दें, उन्हें परेशान करें और सरकारी तंत्र के जरिए वोटर लिस्ट से उनके नाम कटवाएं।

यह वीडियो उसी नफरत भरी श्रृंखला की अगली कड़ी है, जहां मुख्यमंत्री खुद को किसी वेस्टर्न ‘काउबॉय’ फिल्म के हीरो की तरह पेश कर रहे हैं, जबकि असलियत में यह एक शांतिपूर्ण आबादी के खिलाफ उत्पीड़न भड़काने का जरिया है।

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विपक्ष का कड़ा प्रहार: “यह जेनोसाइड की कॉल है”

जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, विपक्ष ने इसे आड़े हाथों लिया। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इसे बेहद खतरनाक बताते हुए कहा कि “यह अल्पसंख्यकों की टारगेटेड हत्या (Point-blank murder) को महिमामंडन करने जैसा है।

” वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रिनेट ने प्रधानमंत्री मोदी के “सबका साथ-सबका विकास” के नारे पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या सिर्फ वीडियो डिलीट करना काफी है? टीएमसी और सीपीआई (एम) ने भी इसे फासिस्ट विचारधारा का हिस्सा बताया।

विपक्ष का आरोप है कि यह वीडियो असम में पहले से ही जारी एनआरसी, सीएए और संपत्ति/वोटिंग राइट्स पर हमलों के तनाव को और अधिक हिंसक बनाने के लिए जानबूझकर फैलाया गया है।

डिप्लोमेसी और हिपोक्रेसी: मलेशिया में शांति, घर में ‘नो मर्सी’

इस पूरे घटनाक्रम ने मोदी सरकार की अंतरराष्ट्रीय छवि को गहरी चोट पहुँचाई है। प्रधानमंत्री जिस समय मलेशिया में शांति और सहयोग की बात कर रहे थे, उसी समय उनकी पार्टी के एक रसूखदार मुख्यमंत्री “नो मर्सी” के नारे के साथ हिंसा का प्रोपगैंडा फैला रहे थे।

कांग्रेस की केरल यूनिट ने इस पर तीखा प्रहार करते हुए पूछा कि “एक तरफ मुस्लिम नेतृत्व से ग्रैंड रिसेप्शन लिया जा रहा है, तो दूसरी तरफ घर में ‘मुस्लिम जेनोसाइड’ जैसे पोस्ट क्यों किए जा रहे हैं?

” सुप्रिया श्रिनेट ने इसे “जहर, नफरत और हिंसा” से भरा हुआ करार दिया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को इस्लामोफोबिक और असहिष्णु दिखाने वाला यह असम भाजपा विवादित वीडियो भाजपा की उस चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है जिसमें ध्रुवीकरण ही एकमात्र हथियार बचा है।

संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन और कानूनी कार्रवाई की मांग

रिटायर्ड IAS, IFS और IPS अधिकारियों के ‘कॉन्स्टिट्यूशनल कंडक्ट ग्रुप’ (CCG) ने इस पर सबसे सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने अपने बयान में कहा, “देश भर में नफरत भरे भाषणों की मौजूदगी के बावजूद, सरमा के हालिया भाषण और इस वीडियो की भयावहता नागरिकों के लिए एक बड़ा झटका है।

” ग्रुप ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि वह इस हेट स्पीच पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognisance) ले, क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का सीधा उल्लंघन है।

एक्टिविस्ट हर्ष मंदर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सोशल मीडिया पर #HateSpeech और #BJPExposed जैसे ट्रेंड्स ने चुनाव आयोग और न्यायपालिका की चुप्पी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

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नफरत की आग और न्यायपालिका की जिम्मेदारी

भाजपा की यह रणनीति अब उजागर हो चुकी है—पहले घृणा फैलाओ, वोट बटोरो और फिर विवाद बढ़ने पर उसे तकनीकी भूल बताकर डिलीट कर दो। लेकिन डिलीट करने से मंशा नहीं बदलती।

बंगाली मुसलमानों को “मिया” कहकर अमानवीय (Dehumanize) बनाना और उन्हें देश छोड़ने के लिए मजबूर करना अब एक सरकारी प्रोजेक्ट जैसा नजर आने लगा है। विपक्ष की मांग है कि इस वीडियो के क्रिएटर को UAPA के तहत गिरफ्तार किया जाना चाहिए क्योंकि यह सीधा हिंसा भड़काने का मामला है।

असम भाजपा विवादित वीडियो ने यह साबित कर दिया है कि सत्ता के लिए राष्ट्रीय एकता को दांव पर लगाया जा रहा है। अब समय आ गया है कि जनता और न्यायपालिका मिलकर इस नफरत की आग को रोकें, अन्यथा यह लोकतांत्रिक ताने-बाने को पूरी तरह खाक कर देगी।

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