बी. सुदर्शन रेड्डी का संदेश: जनता के लिए मार्गदर्शन और प्रेरणा
उपराष्ट्रपति पद के लिए इंडिया ब्लॉक के उम्मीदवार, पूर्व सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी ने सांसदों को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उनका बी सुदर्शन रेड्डी का संदेश स्पष्ट है: “लोकतंत्र सहयोग से पनपता है, टकराव से नहीं।” 9 सितंबर को होने वाले इस चुनाव में रेड्डी का मुकाबला एनडीए के उम्मीदवार और महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन से होगा। अपने संदेश में रेड्डी ने सांसदों से कहा कि यह चुनाव केवल एक व्यक्ति के बारे में नहीं है, बल्कि “भारत की भावना के लिए वोट” है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इस चुनाव में कोई पार्टी व्हिप नहीं है, जिसका मतलब है कि पार्टियां अपने सदस्यों को कोई बाध्यकारी निर्देश जारी नहीं कर सकतीं। उन्होंने सांसदों से अपील की कि “देश के प्रति प्रेम ही आपकी पसंद का मार्गदर्शन करेगा।” रेड्डी ने अपने नामांकन को “उन मूल्यों के लिए वोट” के रूप में पेश किया जो भारत को एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में परिभाषित करते हैं। उन्होंने पीटीआई को बताया, “मैं आपका समर्थन अपने लिए नहीं, बल्कि उन मूल्यों के लिए चाहता हूँ।”
राज्यसभा का महत्व और लोकतांत्रिक सिद्धांतों की लड़ाई
इस चुनाव के जरिए राज्यसभा के अगले अध्यक्ष का भी चुनाव होगा, क्योंकि उपराष्ट्रपति ही राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं। जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे के कारण यह चुनाव आवश्यक हो गया था। रेड्डी ने अपने संदेश में इस पद के महत्व पर जोर देते हुए कहा, “राज्यसभा एक ऐसा सदन होना चाहिए जहाँ राष्ट्रीय हितों को दलगत चिंताओं से ऊपर रखा जाए।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत में लोकतांत्रिक स्थान सिकुड़ रहा है, और “गणतंत्र की आत्मा की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है।” उन्होंने अपनी उम्मीदवारी को व्यक्तिगत आकांक्षा नहीं, बल्कि “लोकतांत्रिक ताने-बाने की रक्षा के लिए एक सामूहिक प्रयास” बताया। यह चुनाव भले ही प्रतीकात्मक हो क्योंकि एनडीए के पास सी.पी. राधाकृष्णन के लिए पर्याप्त संख्या है, लेकिन रेड्डी की उम्मीदवारी के जरिए इंडिया ब्लॉक ने विपक्षी एकता का संदेश दिया है। अगले उपराष्ट्रपति को पूरे पांच साल का कार्यकाल मिलेगा, न कि केवल धनखड़ के कार्यकाल का बचा हुआ हिस्सा। धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया था, लेकिन उनके इस्तीफे का “असली” कारण अभी भी चर्चा और अटकलों का विषय बना हुआ है।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री का आभार: एआईएमआईएम का समर्थन
एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने रविवार को एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का आभार व्यक्त किया। ओवैसी ने विपक्ष के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को अपनी पार्टी का समर्थन देने की घोषणा की। रेवंत रेड्डी ने X (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा, “असदुद्दीन ओवैसी भाई, धन्यवाद। लोकसभा सांसद और एआईएमआईएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष, एक साझा राष्ट्रीय हित पहल के साथ उपराष्ट्रपति पद के लिए न्यायमूर्ति सुदर्शन रेड्डी के समर्थन में आगे आने के लिए।” ओवैसी ने शनिवार को अपनी एक पोस्ट में बताया कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री कार्यालय ने उनसे बात की थी और 9 सितंबर को होने वाले चुनाव में बी. सुदर्शन रेड्डी की उम्मीदवारी का समर्थन करने का अनुरोध किया था। ओवैसी ने कहा, “@aimim_national न्यायमूर्ति रेड्डी, एक हैदराबादी और सम्मानित न्यायविद, को अपना समर्थन देगा।” उन्होंने यह भी कहा कि “साथी हैदराबादियों का समर्थन करेंगे।” यह बी सुदर्शन रेड्डी का संदेश विपक्ष की एकजुटता को और मजबूती देता है।
चुनावी प्रक्रिया और उम्मीदवारों का परिचय
यह चुनाव 9 सितंबर को होगा, जबकि नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 21 अगस्त थी। संविधान के अनुच्छेद 66(1) के अनुसार, उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व और गुप्त मतदान के माध्यम से किया जाता है। बी सुदर्शन रेड्डी का संदेश केवल सांसदों के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए है। संयुक्त विपक्षी दलों ने 19 अगस्त को बी. सुदर्शन रेड्डी को अपना उम्मीदवार घोषित किया था। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे “वैचारिक लड़ाई” बताया और रेड्डी को “गरीबों के हितैषी और आर्थिक व सामाजिक हितों के पैरोकार” के रूप में पेश किया। आंध्र प्रदेश में वकालत करने वाले और गुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रह चुके रेड्डी को जनवरी 2007 में सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था और वे जुलाई 2011 में सेवानिवृत्त हुए। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने 12 अगस्त को महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन के नाम की घोषणा एनडीए के उम्मीदवार के रूप में की थी। संसद में संख्यात्मक लाभ को देखते हुए एनडीए के लिए अपने उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करना आसान होगा। उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति के रूप में भी कार्य करते हैं, जिससे यह पद राजनीतिक रूप से और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।



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