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भाई जगताप को नोटिस: BMC चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद कलह

भाई जगताप को नोटिस

मुंबई कांग्रेस के पूर्व प्रमुख और पार्टी विधायक भाई जगताप को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने एक कड़ा कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई तब हुई जब उन्होंने BMC चुनाव 2026 में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन को लेकर मौजूदा मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ की सार्वजनिक रूप से आलोचना की और उनके इस्तीफे की मांग कर डाली। हाल ही में संपन्न हुए महाराष्ट्र नागरिक चुनावों के तुरंत बाद कांग्रेस में यह दरार खुलकर सामने आ गई है। चुनाव परिणामों के अनुसार, 227 सदस्यीय बीएमसी में कांग्रेस को महज 24 सीटों से संतोष करना पड़ा, जो 2017 की 31 सीटों के मुकाबले सात सीटें कम हैं। वरिष्ठ नेता को भाई जगताप को नोटिस थमाए जाने के पीछे मुख्य कारण अनुशासनहीनता और पार्टी के आंतरिक मामलों को मीडिया प्लेटफॉर्म पर उठाना बताया गया है।

वर्षा गायकवाड़ पर हमला और इस्तीफे की मांग

भाई जगताप ने हाल ही में संपन्न बीएमसी चुनावों के बाद वर्षा गायकवाड़ पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा, “पार्टी कभी भी इतनी बुरी स्थिति में नहीं थी। पार्टी की स्थिति बेहद चिंताजनक है, और दिल्ली नेतृत्व को स्थिति को संभालने के लिए हस्तक्षेप करना चाहिए।” जगताप ने गायकवाड़ को हार के लिए नैतिक रूप से जिम्मेदार ठहराते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति सिर्फ पद मिलने से बड़ा नहीं बन जाता, बल्कि नेतृत्व परिणाम देने से बड़ा बनता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुंबई में उम्मीदवारों का चयन गायकवाड़ की कुछ गुप्त रिपोर्टों के आधार पर किया गया था, जिससे कांग्रेस ऐतिहासिक रूप से अपने सबसे खराब प्रदर्शन पर पहुंच गई।

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अनुशासन के उल्लंघन पर एआईसीसी का सख्त रुख

जगताप के इन सार्वजनिक बयानों ने कांग्रेस के आलाकमान को नाराज कर दिया। एआईसीसी के महासचिव और महाराष्ट्र प्रभारी रमेश चेन्निथला के निर्देश पर, मुंबई और कोंकण क्षेत्र के प्रभारी सचिव यू.बी. वेंकटेश ने भाई जगताप को नोटिस सौंपा। नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि उनके ये बयान इंडियन नेशनल कांग्रेस के स्थापित नियमों, अनुशासन और नैतिक ढांचे का साफ उल्लंघन हैं। पार्टी ने साफ किया है कि संगठनात्मक कामकाज, नेतृत्व और अंदरूनी मतभेदों से जुड़े मामलों को मीडिया या सार्वजनिक मंचों पर नहीं, बल्कि केवल पार्टी के अंदरूनी मंचों पर ही उठाया जाना चाहिए। ऐसे आचरण को पार्टी की सामूहिक लीडरशिप को कमजोर करने वाला माना गया है।

नोटिस की शर्तें और भाई जगताप की मुश्किलें

शनिवार को जारी किए गए इस कारण बताओ नोटिस में भाई जगताप को सात दिनों के भीतर अपनी सफाई देने का निर्देश दिया गया है। नोटिस में पूछा गया है कि पार्टी अनुशासन तोड़ने और नैतिकता का उल्लंघन करने के लिए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। एआईसीसी ने चेतावनी दी है कि यदि जगताप तय समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब देने में विफल रहते हैं, तो पार्टी बिना किसी पूर्व सूचना के उचित दंडात्मक कार्रवाई करने के लिए मजबूर होगी। फिलहाल जगताप की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं, क्योंकि पार्टी ने उनके बयानों को “गंभीर चिंता” के साथ देखा है, जो विशेष रूप से एकता की आवश्यकता वाले समय में अनावश्यक भ्रम और अनुशासनहीनता पैदा करते हैं।

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बीएमसी चुनाव 2026: कांग्रेस के शर्मनाक आंकड़े

इस पूरे विवाद की जड़ में बीएमसी चुनाव के नतीजे हैं। कांग्रेस ने 227 में से 152 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उसे केवल 24 सीटों पर ही जीत मिल सकी, जो पार्टी का अब तक का सबसे कम आंकड़ा है। 2017 में पार्टी के पास 31 सीटें थीं। चुनाव नतीजों के बाद विपक्षी खेमे में सिर फुटव्वल तेज हो गई है। एक तरफ जहां बीजेपी 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और एकनाथ शिंदे की पार्टी भी गदगद है, वहीं कांग्रेस में हार के साइड इफेक्ट के तौर पर नेताओं में आपसी लड़ाई शुरू हो गई है। जगताप का दावा है कि जब उन्होंने उम्मीदवारों के चयन के सर्वे मांगे थे, तो उन्हें नहीं दिखाए गए, जिससे पता चलता है कि सांगठनिक ढांचा चरमरा गया है।

नेतृत्व का बचाव और महायुति पर आरोप

जहां एक ओर भाई जगताप आलोचना कर रहे हैं, वहीं मुंबई कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सचिन सावंत ने पार्टी के प्रदर्शन का बचाव किया है। सावंत ने कहा कि प्रतिकूल परिस्थितियों को देखते हुए पार्टी का प्रदर्शन संतोषजनक था। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के नेतृत्व वाली सत्ताधारी महायुति ने पुलिस, प्रशासन और चुनाव मशीनरी का दुरुपयोग किया। सावंत के अनुसार, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने “लालच, डराने-धमकाने और फूट डालने” की राजनीति के बावजूद दृढ़ संकल्प के साथ लड़ाई लड़ी। उन्होंने सत्ता पक्ष पर दबाव बनाने का आरोप लगाया, फिर भी भाई जगताप को नोटिस जारी होने की खबर ने पार्टी के भीतर इस बचाव पक्ष को कमजोर कर दिया है।

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महाराष्ट्र कांग्रेस की आगामी बैठक और भविष्य की रणनीति

29 नगरपालिकाओं में से केवल लातूर को छोड़कर बाकी जगह मिली करारी हार के बाद अब महाराष्ट्र कांग्रेस रविवार को एक अहम बैठक करने वाली है। लातूर में कांग्रेस ने 70 में से 43 सीटें जीतकर अपनी लाज बचाई है। यह बैठक प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल की अध्यक्षता में होगी, जिसमें जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों की रणनीति पर चर्चा होगी। उम्मीद जताई जा रही है कि इस बैठक में बीएमसी हार के सबक और भाई जगताप द्वारा उठाए गए मुद्दों पर भी बात हो सकती है। हालांकि, जगताप को नोटिस मिलने के बाद अब पार्टी के अन्य नेता भी सार्वजनिक बयानबाजी करने से बच रहे हैं।

क्या जगताप पर होगी कार्रवाई?

पॉलिटिकल सर्कल में यह बड़ी खबर बनी हुई है कि क्या भाई जगताप का जवाब कांग्रेस नेतृत्व को संतुष्ट कर पाएगा। यदि जवाब संतोषजनक नहीं रहा, तो जगताप पर बड़ी कार्रवाई होना तय है। भाई जगताप को नोटिस मिलना कांग्रेस की उस पुरानी समस्या को फिर से उजागर करता है, जहां चुनावी हार के बाद जवाबदेही तय करने के बजाय आपसी कलह तेज हो जाती है। अब सभी की नजरें भाई जगताप के जवाब और आज होने वाली राज्य चुनाव समिति की बैठक पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि मुंबई कांग्रेस में आने वाले दिनों में नेतृत्व परिवर्तन होगा या असंतुष्टों के खिलाफ शिकंजा और कसा जाएगा।

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