भारत बंद से बैंकिंग और ट्रांसपोर्ट ठप, राहुल गांधी ने किया समर्थन
आज 12 फरवरी 2026 को देशव्यापी हड़ताल के चलते कई हिस्सों में बैंकिंग और ट्रांसपोर्ट ठप हो गए हैं, जिससे जनजीवन पर गहरा असर पड़ा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस भारत बंद को अपना पूर्ण समर्थन देते हुए मज़दूरों और किसानों के लिए मज़बूती से आवाज़ उठाई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि आज देश भर में लाखों मज़दूर और किसान अपने हक़ के लिए सड़कों पर हैं।
राहुल गांधी ने चिंता जताई कि मज़दूरों को डर है कि चार नए लेबर कोड उनके अधिकारों को कमज़ोर कर देंगे, वहीं किसानों का मानना है कि भारत-US ट्रेड एग्रीमेंट उनकी रोज़ी-रोटी को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है। विपक्ष के नेता ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब उनकी बात सुनेंगे या उन पर किसी की बहुत मज़बूत ‘पकड़’ है?
मज़दूरों और किसानों की आवाज़ को नज़रअंदाज़ करने का आरोप
राहुल गांधी ने चेतावनी दी कि महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट (MNREGA) को कमज़ोर करने या खत्म करने से गाँवों का आखिरी सपोर्ट सिस्टम भी छिन सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब इन वर्गों के भविष्य के बारे में बड़े फ़ैसले लिए गए, तब उनकी आवाज़ को पूरी तरह नज़रअंदाज़ किया गया।
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के बैनर तले किसान यूनियनों ने अंतरिम भारत-US ट्रेड फ्रेमवर्क को “भारतीय खेती, डेयरी और ग्रामीण रोज़ी-रोटी के लिए सीधा खतरा” करार दिया है।
हड़ताल के कारण देश के कई राज्यों में बैंकिंग और ट्रांसपोर्ट ठप होने की खबरें आ रही हैं, क्योंकि यूनियनों का तर्क है कि यह फ्रेमवर्क कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल के उन आश्वासनों के खिलाफ है, जिनमें खेती और डेयरी को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से बाहर रखने की बात कही गई थी।
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भारत-US ट्रेड डील और घरेलू खेती पर मंडराता खतरा
किसान संगठनों ने न्यूज़ीलैंड, यूरोपियन यूनियन (EU) और UK के साथ साइन किए गए हालिया FTA के नियमों पर भी गहरी चिंता जताई है। यूनियनों का कहना है कि US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रेसिप्रोकल टैरिफ लागू करने से भारतीय सामानों पर टैरिफ बढ़कर 18 परसेंट हो गया है। लोकसभा में बजट पर बहस के दौरान राहुल गांधी ने दावा किया कि भाजपा के फाइनेंशियल सिस्टम को बचाने के लिए ट्रेड डील के तहत भारतीय हितों को ‘सरेंडर’ कर दिया गया है।
उन्होंने मार्शल आर्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे पकड़ बनाने के बाद गला घोंटा जाता है, वैसे ही इन संधियों से देश की फूड सप्लाई और एनर्जी सिस्टम को अमेरिकी नियंत्रण में सौंपा जा रहा है। हड़ताल के व्यापक असर से आज कई प्रमुख शहरों में बैंकिंग और ट्रांसपोर्ट ठप देखे गए।
देशव्यापी हड़ताल में 30 करोड़ मज़दूरों के शामिल होने का दावा
यह विशाल आंदोलन 10 सेंट्रल ट्रेड यूनियनों द्वारा ऑर्गनाइज़ किया गया है, जिसमें AITUC और CITU जैसे संगठन शामिल हैं। नेताओं का दावा है कि करीब 30 करोड़ मज़दूर इस विरोध प्रदर्शन का हिस्सा हैं, जिसके कारण औद्योगिक क्षेत्रों में बैंकिंग और ट्रांसपोर्ट ठप होने जैसी स्थिति बनी हुई है। तमिलनाडु में सत्ताधारी DMK की विंग WPA ने भी इसका समर्थन किया है।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में चार नए लेबर कोड को वापस लेना, इलेक्ट्रिसिटी एक्ट में बदलाव रोकना, बैंक कर्मचारियों के लिए हफ़्ते में पांच दिन काम सुनिश्चित करना और पब्लिक सेक्टर की कंपनियों का प्राइवेटाइज़ेशन रोकना शामिल है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी पंजाब और पूरे देश में मज़दूरों, किसानों और छोटे व्यापारियों से इस शांतिपूर्ण बंद को सफल बनाने की अपील की है।
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हिमाचल के सेब किसानों का दिल्ली मार्च और क्षेत्रीय विरोध
हिमाचल प्रदेश के सेब किसानों ने भी इस हड़ताल में अपनी ताकत झोंक दी है। उन्होंने दिल्ली मार्च का ऐलान करते हुए चेतावनी दी है कि भारत-US और अन्य ट्रेड एग्रीमेंट के तहत इम्पोर्ट ड्यूटी में कटौती से पहाड़ी राज्य की सेब आधारित इकॉनमी तबाह हो जाएगी। हालांकि, नेशनल फ्रंट ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (NFITU) ने इस विरोध को “पॉलिटिकली मोटिवेटेड” बताते हुए खुद को इससे अलग रखा है।
दूसरी ओर, CPI नेता बिनॉय विश्वम ने इसे लोगों के बुनियादी अधिकारों की रक्षा का आंदोलन बताया है। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि अगर INDIA ब्लॉक की सरकार होती, तो वह डोनाल्ड ट्रंप से बराबरी के स्तर पर बात करती, न कि हितों का सरेंडर करती।
फिल्म इंडस्ट्री पर भारत बंद का साया और शूटिंग में देरी
भारत बंद का असर केवल सड़कों और बैंकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने ग्लैमर वर्ल्ड की रफ्तार भी रोक दी। मुंबई के गोरेगांव फिल्म सिटी और मड आइलैंड जैसे हब में क्रू मेंबर्स और जूनियर आर्टिस्ट के न पहुँच पाने के कारण शूटिंग शेड्यूल में भारी देरी हुई। मल्टीप्लेक्स में दर्शकों की संख्या में 20-30% की गिरावट दर्ज की गई है।
शाहिद कपूर की फिल्म ‘ओ रोमियो’ की रिलीज़ से ठीक पहले आई इस रुकावट ने डिस्ट्रीब्यूटर्स की चिंता बढ़ा दी है। मुंबई पुलिस ने अंधेरी और जुहू जैसे संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी है ताकि किसी भी अनहोनी को टाला जा सके।
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PSU बैंकों में कामकाज प्रभावित और ग्राहकों की परेशानी
बैंकिंग क्षेत्र में SBI, बैंक ऑफ़ बड़ौदा और UCO बैंक जैसे बड़े संस्थानों ने रेगुलेटर्स को सूचित किया है कि AIBEA, AIBOA और BEFI जैसे यूनियनों के हड़ताल पर जाने से सेवाओं पर असर पड़ सकता है। हालांकि बैंकों ने वैकल्पिक इंतज़ाम किए हैं, लेकिन चेक क्लियरेंस और ओवर-द-काउंटर ट्रांज़ैक्शन में दिक्कतें आ रही हैं।
ट्रेड यूनियनों का कहना है कि ये लेबर कोड संगठन बनाने और हड़ताल करने के अधिकार पर कड़ा प्रहार हैं। वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ ट्रेड यूनियंस (WFTU) ने भी भारत के वर्किंग क्लास के साथ एकजुटता दिखाते हुए नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों की आलोचना की है और हड़ताल की सफलता की कामना की है।
भारत बंद के मुख्य कारण और सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम
इस देशव्यापी चक्का जाम के पीछे मुख्य कारण चार लेबर कोड, ड्राफ्ट सीड बिल और इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2025 का विरोध है। यूनियनों का तर्क है कि ये नीतियां नौकरी की सुरक्षा कम करती हैं और मालिकों को ज़रूरत से ज़्यादा फायदा पहुँचाती हैं। यद्यपि एयरपोर्ट और एयरलाइंस सामान्य रूप से काम कर रहे हैं, लेकिन यात्रियों को सड़क पर होने वाली देरी के लिए पहले से प्लान करने की सलाह दी गई है।
स्कूल और कॉलेज हर जगह बंद नहीं हैं, लेकिन भारी विरोध वाले राज्यों में स्थानीय स्तर पर छुट्टियां घोषित की गई हैं। यह हड़ताल सरकार को एक कड़ा संदेश देने के लिए आयोजित की गई है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो आने वाले समय में और भी कड़े कदम उठाए जाएंगे।
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