भारत का सेमीकंडक्टर बाज़ार 2030 तक 110 अरब डॉलर: आत्मनिर्भर भारत
भारत में सेमीकंडक्टर मिशन के तहत एक नए युग की शुरुआत हो रही है, जिससे देश का सेमीकंडक्टर बाज़ार 2030 तक लगभग 110 अरब डॉलर तक पहुँचने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 79वें स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में घोषणा की कि 2025 के अंत तक भारत में निर्मित चिप्स बाज़ार में उपलब्ध होंगे। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में 4,600 करोड़ रुपये की चार नई सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंज़ूरी दी है, जिससे देश में लगभग 2,000 कुशल रोज़गार पैदा होंगे। यह कदम भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर एक बड़ा मील का पत्थर है। वर्तमान में ताइवान भारत के लिए लगभग 90 प्रतिशत उन्नत चिप्स का निर्माण करता है, लेकिन इन नई सुविधाओं से भारत में दूरसंचार, इलेक्ट्रिक कारों और रक्षा चिप्स की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इससे आर्थिक लचीलापन बढ़ेगा और रणनीतिक जोखिम भी कम होंगे।
- यह भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर बाज़ार में एक विश्वसनीय केंद्र बनाएगा।
- नई परियोजनाओं से लगभग 2,000 कुशल रोजगार पैदा होंगे।
- इन परियोजनाओं में लगभग 4,600 करोड़ रुपये का निवेश होगा।
मुख्य बिंदु
1. भारत का सेमीकंडक्टर बाज़ार 2030 तक 110 अरब डॉलर पहुँचने की उम्मीद, आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम।
2. प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर घोषणा की, 2025 के अंत तक भारत निर्मित चिप्स होंगे उपलब्ध।
3. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 4,600 करोड़ रुपये की चार नई परियोजनाओं को मंजूरी दी, 2,000 रोजगार सृजन होंगे।
4. ओडिशा, आंध्र प्रदेश और पंजाब में नई परियोजनाएँ, कुल 10 प्रोजेक्ट्स 1.60 लाख करोड़ निवेश तक पहुँचे।
5. 60,000 छात्रों को सेमीकंडक्टर प्रशिक्षण, 278 संस्थान और 72 स्टार्टअप डिज़ाइन क्षमताओं को मज़बूती देंगे।
6. कांग्रेस काल में लाइसेंस-परमिट राज के कारण उद्योग विकास बाधित, अब मोदी सरकार में तेजी से विस्तार।
7. ओडिशा, आंध्र और पंजाब की परियोजनाएँ ईवी, रक्षा, एआई और ऊर्जा क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करेंगी।
प्रमुख परियोजनाएँ और राज्यों की भूमिका
नई स्वीकृतियों के बाद, भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के तहत अब छह राज्यों में दस परियोजनाएँ हैं। ओडिशा को दो नई परियोजनाएँ मिलेंगी, जबकि आंध्र प्रदेश और पंजाब को एक-एक। 60,000 से अधिक छात्रों को सेमीकंडक्टर से संबंधित कौशल में प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे भारत घरेलू और वैश्विक दोनों माँगों के लिए तैयार है। ये परियोजनाएँ भारत को ‘मेक इन इंडिया’ के तहत डिज़ाइन और निर्मित चिप्स के लिए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में प्रतिस्पर्धी बनाएंगी।
- ओडिशा में SiCSem प्राइवेट लिमिटेड पहली वाणिज्यिक कंपाउंड सेमीकंडक्टर सुविधा बनाएगी।
- 3D ग्लास सॉल्यूशंस इंक. ओडिशा में एक उन्नत पैकेजिंग और एम्बेडेड ग्लास सब्सट्रेट प्लांट स्थापित करेगा।
- आंध्र प्रदेश की ASIP टेक्नोलॉजीज और पंजाब की कॉन्टिनेंटल डिवाइस इंडिया लिमिटेड भी अपने प्लांट लगाएँगी।
आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ता कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्रीय कैबिनेट ने चार नई सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंज़ूरी दी है। इन परियोजनाओं से देश का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम काफी मज़बूत होगा। सरकार के अनुसार, ये सुविधाएँ देश में उभरती चिप डिज़ाइन क्षमताओं को बढ़ावा देंगी, जिन्हें 278 शैक्षणिक संस्थानों और 72 स्टार्ट-अप्स द्वारा समर्थित किया जाएगा। इन परियोजनाओं से 2,034 कुशल पेशेवरों के लिए प्रत्यक्ष रोज़गार और अतिरिक्त अप्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर पैदा होंगे। इन नई स्वीकृतियों के बाद, ISM द्वारा अनुमोदित कुल 10 परियोजनाएँ हो गई हैं, जिनका संयुक्त निवेश 6 राज्यों में लगभग 1.60 लाख करोड़ रुपये है।
- ये परियोजनाएँ आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगी।
- इन सुविधाओं से भारत में चिप डिज़ाइन क्षमताओं को बढ़ावा मिलेगा।
- ये परियोजनाएँ इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र को भी प्रोत्साहन देंगी।
सेमीकंडक्टर विकास की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि कांग्रेस के “लाइसेंस-परमिट राज” और “नीतिगत पंगुता” के कारण भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग का विकास नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि 1964 में फेयरचाइल्ड के संस्थापक रॉबर्ट नॉयस और 2005-06 में इंटेल ने भारत में सेमीकंडक्टर इकाई स्थापित करने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें अनुमति नहीं मिली। वैष्णव ने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में सेमीकंडक्टर बाज़ार तेजी से विस्तार कर रहा है और पूरा इकोसिस्टम अब आकार ले रहा है। वैष्णव ने कहा कि मोहाली में सेमीकंडक्टर प्रयोगशाला अभी भी प्रयोगशाला स्तर पर है, जबकि व्यावसायिक स्तर की सिलिकॉन फैब 20,000 से 40,000 वेफर-स्टार्ट प्रति माह पर काम करती है।
- जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी के दावों को भ्रामक बताया।
- मोहाली में सेमीकंडक्टर कॉम्प्लेक्स लिमिटेड ने 1983 में परिचालन शुरू किया था।
- यह कॉम्प्लेक्स प्रयोगशाला स्तर पर ही काम करता रहा।
प्रमुख परियोजनाएँ और उनका प्रभाव
- SiCSem प्राइवेट लिमिटेड: यह ओडिशा में एक एकीकृत सिलिकॉन कार्बाइड सुविधा है जो मिसाइल, ईवी और रेलवे के लिए उपकरण बनाएगी।
- 3D ग्लास सॉल्यूशंस इंक.: यह भी ओडिशा में है, जो AI, संचार और फोटोनिक्स के लिए उन्नत पैकेजिंग तकनीक प्रदान करेगी।
- ASIP टेक्नोलॉजीज: यह आंध्र प्रदेश में मोबाइल फोन और ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स के लिए उत्पादन करेगी।
- कॉन्टिनेंटल डिवाइस (CDIL): यह पंजाब में अपनी इकाई का विस्तार कर रही है, जो नवीकरणीय ऊर्जा और ईवी के लिए MOSFETs और IGBTs का उत्पादन करेगी।
भारत का सेमीकंडक्टर बाज़ार परिपक्व-नोड फैब्स पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जो ऑटो, दूरसंचार और औद्योगिक क्षेत्रों की मांग को पूरा करेगा। भारत की इस रणनीति से आयात पर निर्भरता कम होगी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में इसकी स्थिति मजबूत होगी। सेमीकंडक्टर बाज़ार में यह बदलाव देश के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।



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