बिहार IAS चार्टर्ड प्लेन विवाद: IAS नीलेश देवरे की शाही उड़ान पर संग्राम
बिहार IAS चार्टर्ड प्लेन विवाद इस समय राज्य की राजनीति का सबसे गर्म मुद्दा बन गया है, जब विपक्ष ने एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की ‘शाही’ हवाई यात्रा को लेकर नीतीश सरकार को घेरा।
बिहार कैडर के 2011 बैच के आईएएस अधिकारी नीलेश रामचंद्र देवरे, जो वर्तमान में पर्यटन और नागरिक उड्डयन विभाग में सचिव हैं, अपनी पत्नी और बच्चों के साथ एक निजी चार्टर जेट (Dassault Falcon 2000) से पटना उतरे। आरजेडी विधायक राहुल शर्मा ने विधानसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए पूछा कि क्या एक सरकारी अधिकारी की आय इतनी है कि वह लाखों रुपये का चार्टर जेट निजी इस्तेमाल के लिए ले सके?
यह सवाल केवल एक यात्रा का नहीं, बल्कि सरकारी मर्यादा और जवाबदेही का है जिसने पूरे प्रशासन को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।
नीलेश रामचंद्र देवरे: एक काबिल अफसर की बेदाग छवि पर ‘चार्टर’ का दाग
इस पूरे विवाद के केंद्र में मौजूद अधिकारी नीलेश देवरे नासिक के एक मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं और एमबीबीएस की पढ़ाई के बाद यूपीएससी में सफल हुए थे।
बिहार में अपनी सख्त कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले देवरे ने मधुबनी और छपरा जैसे जिलों में सराहनीय कार्य किया है। उन्हें केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का निजी सचिव भी बनाया गया था, जो उनके प्रशासनिक रसूख को दर्शाता है।
हालांकि, बिहार IAS चार्टर्ड प्लेन विवाद ने उनके अब तक के करियर पर एक ऐसा सवालिया निशान लगा दिया है, जिसका जवाब अब न केवल उन्हें बल्कि राज्य सरकार को भी देना पड़ रहा है। विपक्ष अब उनके बैंक खातों और इस महंगी यात्रा के ‘स्पॉन्सर’ की जांच की मांग कर रहा है।
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20 लाख का खर्च और प्रोटोकॉल का उल्लंघन: क्या यह केवल एक ‘लिफ्ट’ थी?
एविएशन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली से पटना के बीच एक प्राइवेट चार्टर जेट का किराया 15 से 20 लाख रुपये तक होता है। बिहार IAS चार्टर्ड प्लेन विवाद में मुख्य कानूनी पेंच यह है कि क्या एक अधिकारी अपनी निजी यात्रा के लिए सरकारी या किसी निजी कंपनी के विमान का उपयोग कर सकता है?
आरजेडी का आरोप है कि पटना एयरपोर्ट के हाई-सिक्योरिटी वीआईपी हैंगर में निजी परिवार का उतरना सीधे तौर पर प्रोटोकॉल का उल्लंघन है।
यदि यह यात्रा आधिकारिक नहीं थी, तो इसका बिल किसने चुकाया? यह सवाल बिहार के गलियारों में गूंज रहा है, क्योंकि एक लोक सेवक के लिए किसी भी निजी कंपनी से इतना बड़ा ‘फेवर’ लेना भ्रष्टाचार की श्रेणी में आ सकता है।
नीतीश सरकार का ‘अजीब’ तर्क: खाली विमान और दलित अस्मिता का मेल
जब विधानसभा में बिहार IAS चार्टर्ड प्लेन विवाद चरम पर पहुँचा, तो सरकार की ओर से मंत्री अशोक चौधरी ने एक विवादित बचाव पेश किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली गए थे और वह विमान वापस पटना खाली लौट रहा था, इसलिए सचिव नीलेश देवरे और उनका परिवार उसमें बैठ गया।
चधरी ने इसे ‘दलित अस्मिता’ से जोड़ते हुए पूछा कि क्या एक दलित अधिकारी को विमान में बैठने का हक नहीं है? इस ‘दलित कार्ड’ ने मामले को और भी विवादास्पद बना दिया है।
विपक्ष का कहना है कि भ्रष्टाचार के आरोपों को जाति के पीछे छुपाना जनता के साथ धोखा है और नियमों का उल्लंघन किसी भी जाति के अधिकारी के लिए समान होना चाहिए।
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ब्यूरोक्रेसी में मची खलबली: क्या सर्विस रूल्स की धज्जियां उड़ाई गईं?
इस विवाद ने बिहार के प्रशासनिक खेमे में भी दरार पैदा कर दी है। कई सेवानिवृत्त अधिकारियों का मानना है कि सरकारी विमान का उपयोग निजी पारिवारिक उद्देश्यों के लिए करना ‘ऑल इंडिया सर्विसेज (कंडक्ट) रूल्स’ का स्पष्ट उल्लंघन है।
बिहार IAS चार्टर्ड प्लेन विवाद ने यह डर पैदा कर दिया है कि अगर इस पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह एक गलत परंपरा शुरू कर देगा। नियम कहते हैं कि सरकारी संसाधनों का उपयोग केवल लोकहित के कार्यों में होना चाहिए।
नागरिक उड्डयन विभाग के सचिव होने के नाते नीलेश देवरे पर नैतिकता की जिम्मेदारी और भी ज्यादा थी, क्योंकि वे खुद इन संसाधनों के संरक्षक (Custodian) हैं।
सोशल मीडिया का गुस्सा: ‘गरीब बिहार और अफसर की शाही सवारी’
जैसे ही इस चार्टर उड़ान की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, आम जनता और टैक्सपेयर्स का गुस्सा फूट पड़ा। फेसबुक और एक्स (X) पर लोग पूछ रहे हैं कि बिहार जैसे राज्य में जहाँ बुनियादी सुविधाओं की कमी है, वहाँ एक अधिकारी का परिवार के साथ चार्टर जेट में उड़ना क्या जायज है?
बिहार IAS चार्टर्ड प्लेन विवाद अब जेन-जी (Gen Z) के बीच ‘ब्यूरोक्रेटिक प्रिविलेज’ की बहस बन गया है। युवाओं का कहना है कि एक तरफ छात्र रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सिस्टम के शीर्ष पर बैठे लोग जनता के पैसे या रसूख के दम पर लक्जरी लाइफस्टाइल का आनंद ले रहे हैं।
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विपक्ष की मांग: ‘ऑफिस ऑफ प्रॉफिट’ और आय से अधिक संपत्ति की जांच
आरजेडी और कांग्रेस ने अब इस मामले में राज्यपाल के दखल और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। विपक्ष का तर्क है कि यदि सरकार इसे केवल ‘खाली विमान’ की बात कहकर रफा-दफा करती है, तो वे इसे सड़क तक ले जाएंगे।
बिहार IAS चार्टर्ड प्लेन विवाद में यह भी पूछा जा रहा है कि क्या उस चार्टर जेट का संबंध किसी ऐसे ठेकेदार या कंपनी से है जिसे विभाग द्वारा काम दिया गया है? यदि हितों का टकराव (Conflict of Interest) साबित होता है, तो यह केवल अनुशासनहीनता नहीं बल्कि एक बड़ा घोटाला साबित हो सकता है।
जवाबदेही और सुशासन की अग्निपरीक्षा
अंततः, बिहार IAS चार्टर्ड प्लेन विवाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ‘सुशासन’ के दावों की परीक्षा है। क्या सरकार एक अधिकारी को बचाने के लिए नियमों की अनदेखी करेगी या पारदर्शिता का उदाहरण पेश करेगी?
लोकतंत्र में जनता का विश्वास तभी बना रहता है जब नियम सबके लिए बराबर हों। नीलेश देवरे को स्वयं सामने आकर इस यात्रा का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करना चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
इस विवाद ने यह साफ कर दिया है कि आधुनिक भारत में अब कोई भी रसूखदार ‘पब्लिक स्क्रूटनी’ से बच नहीं सकता। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि बिहार की राजनीति इस ‘उड़ान’ को कहाँ ले जाती है।
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