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बीजेपी डबल वोटिंग: लोकतंत्र की खुली लूट, ECI पर बड़ा सवाल!

बीजेपी डबल वोटिंग

बीजेपी डबल वोटिंग के गंभीर आरोपों ने भारतीय लोकतंत्र में एक बड़ा भूचाल ला दिया है। यह चूक नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) की कथित ‘ऑपरेशन लोटस’ की तर्ज़ पर ‘ऑपरेशन डुप्लिकेट’ का एक जीता-जागता प्रमाण है। दिल्ली पूर्वांचल मोर्चा के अध्यक्ष संतोष कुमार ओझा इस ‘ऑपरेशन’ का पहला चेहरा बने।

उन्होंने 5 फरवरी 2025 को दिल्ली के द्वारका में बूथ नं. 123 पर वोट डाला और इंस्टाग्राम पर फोटो डालकर “विकसित दिल्ली” का हैशटैग लगाया। ठीक 9 महीने बाद, 6 नवंबर 2025 को, उन्होंने बिहार के बक्सर के बूथ न. 456 पर फिर से वोट किया, जहाँ उनकी उंगली पर स्याही लगी, और उन्होंने पोस्ट किया: “समृद्ध बक्सर, सशक्त बिहार” का हैशटैग लगाया।

आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता सौरभ भारद्वाज ने 7 नवंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में 12 स्क्रीनशॉट दिखाए, जिसके बाद संतोष ओझा ने 8 घंटे में अपनी पोस्ट डिलीट कर दी और ‘भाग गए’, लेकिन तब तक 4.2 लाख लोग उनके पोस्ट को देख चुके थे।

जुबैर द्वारा उजागर किए गए EPIC कार्डों के अनुसार, दिल्ली वाला EPIC नंबर REM-0987654 जनवरी 2025 में जारी हुआ था, जबकि बिहार वाला REM-1123456 28 अगस्त 2025 को SIR (Special Summary Revision) की अतिरिक्त लिस्ट में ‘घुसाया गया’ था। ECI पोर्टल पर आज भी ओझा के दोनों EPIC एक्टिव हैं।

SIR के दौरान BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) को घर-घर जाकर फॉर्म-6 भरवाना था, मगर ओझा का दिल्ली एड्रेस (द्वारका फ्लैट 7बी) कभी डिलीट नहीं हुआ।

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प्रोफेसर से सांसद: राकेश सिन्हा का ‘ट्रांसप्लांट’ और दो एक्टिव वोट

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के विचारक और राज्यसभा सांसद प्रो. राकेश सिन्हा का मामला और भी चौंकाने वाला है। वैसे तो RSS में केवल प्रचारक होते हैं, लेकिन प्रो. सिन्हा दिल्ली यूनिवर्सिटी के मोतीलाल नेहरू कॉलेज में 34 साल से पढ़ाते हैं, उनकी सैलरी दिल्ली के बैंक अकाउंट में जाती है और PF दिल्ली कोड से कटता है।

इसके बावजूद, उन्होंने 28 अप्रैल 2025 को बिहार के बेगुसराय के मंसरपुर गांव में नया EPIC (नंबर REM-2233445) बनवाया। कमाल देखिए, 4 सितंबर 2025 को उन्होंने DU टीचर्स एसोसिएशन के चुनाव में वोट मांगा, और 6 नवंबर को बेगुसराय के बूथ न. 289 पर वोट भी डाला, जिसका पोस्ट उन्होंने सोशल मीडिया पर किया।

उनकी पुरानी दिल्ली EPIC (REM-1122334) आज भी एक्टिव है! पकड़े जाने पर सिन्हा का जवाब था: “कानूनी ट्रांसफर करवाया”। मगर कानून कहता है कि ट्रांसफर पर पुराना EPIC 30 दिन में डिलीट होना चाहिए। ऐसा लगता है कि ECI के ERONET-2.0 सॉफ्टवेयर में ‘डुप्लिकेट फ्लैग’ ऑटो आने के बजाय, बीजेपी सांसद राकेश सिन्हा के लिए ‘स्पेशल फिल्टर’ लगा है।

राहुल गांधी ने संसद में 10 फोटो दिखाए, जिसमें सिन्हा का DU ID कार्ड और बिहार वोटर स्लिप भी शामिल था। मजेदार बात यह है कि 7 नवंबर को सिन्हा ने राहुल गांधी को मानहानि की धमकी का पत्र भेजा, मगर ECI चुप है। यह ‘ट्रांसफर’ नहीं, ‘ट्रांसप्लांट’ है, जो डबल वोट बीजेपी को दान कर रहा है।

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कलाई की घड़ी और अंगूठी ने खोला ‘डुप्ली-आर्मी’ का राज

बीजेपी कार्यकर्ता नागेंद्र कुमार का मामला स्पष्ट रूप से दिखाता है कि यह कोई इकलौती घटना नहीं है, बल्कि बीजेपी की कथित “डुप्ली-आर्मी” का सबूत है। नागेंद्र कुमार ने 5 फरवरी को दिल्ली के द्वारका बूथ न. 111 पर वोट डाला और 6 नवंबर को बिहार के सिवान के बूथ न. 333 पर फिर से वोट किया। दोनों जगह फिंगरप्रिंट मैच हो रहे हैं, फोटो भी मैच है, मगर EPIC अलग हैं।

आम आदमी पार्टी ने हाई-रेजोल्यूशन फोटो ज़ूम करके दिखाया, जिसमें नागेंद्र कुमार की कलाई में वही घड़ी और उंगली में वही अंगूठी थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उन्होंने चुनाव आयोग को ‘अंगूठा’ दिखाया।

SIR के दौरान BLO ने नागेंद्र का दिल्ली फ्लैट खाली पाया, फिर भी बिहार में उनका नया नाम जोड़ा गया। रिपोर्टर्स कलेक्टिव ने 15 विधानसभाओं में 67,826 डुप्लिकेट वोटर पकड़े, जिनमें बीजेपी डबल वोटिंग के कार्यकर्ता नागेंद्र कुमार टॉप-10 में थे। तेजस्वी यादव ने प्रेस में कहा: “SIR का मतलब Special BJP Revision”।

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डिप्टी CM विजय सिन्हा का ‘क्लेरिकल एरर’ और एक्टिव EPIC

बिहार के उप-मुख्यमंत्री विजय सिन्हा के पास कथित तौर पर दो EPIC थे: एक लखीसराय में (REM-4455667, उम्र 57 वर्ष) और दूसरा बैंकिपुर में (REM-7788990, उम्र 60 वर्ष)। SIR के ड्राफ्ट में ये दोनों नाम दिखे।

13 अगस्त 2025 को ECI ने सिन्हा को नोटिस भेजकर “16 अगस्त तक स्पष्टीकरण दो” का निर्देश दिया। सिन्हा ने ज़वाब में इसे “क्लेरिकल एरर” बताकर पल्ला झाड़ लिया, और 17 अगस्त को फाइल “क्लोज्ड” कर दी गई।

मगर voters.eci.gov.in पर आज भी विजय सिन्हा के दोनों REM एक्टिव हैं! कांग्रेस ने इस तरह के 5 लाख डुप्लिकेट का PDF जारी किया, जिसमें सिन्हा का नाम पेज न. 42 पर मौजूद है।

यह दिखाता है कि यह शुद्धिकरण नहीं, बल्कि “ECI की वोटर हार्वेस्टिंग” है, जो बीजेपी के लिए ‘गोल्ड माइन’ और बाकी के लिए ‘कब्रिस्तान’ साबित हो रही है।

ECI की ‘वोटर हार्वेस्टिंग’: 65 लाख ‘डिलीटेड’ और 5.24 लाख ‘बचे’

चुनाव आयोग ने 27 जुलाई को दावा किया कि 7 लाख डुप्लिकेट वोटर हटाए गए हैं। मगर 30 सितंबर की फाइनल लिस्ट में कांग्रेस के डेटा एनालिटिक्स ने 5.24 लाख डुप्लिकेट वोटर पकड़े, जिनके नाम, पिता का नाम, उम्र और पता 100% मैच थे। रिपोर्टर्स कलेक्टिव ने 15 AC में 67k डुप्लिकेट फोटो-मैच किए।

कुल 65 लाख डिलीटेड वोटरों में से 28 लाख “माइग्रेटेड” श्रेणी के थे, जिनमें ज्यादातर मुस्लिम बहुल सीटों से थे (धाका AC में 80 हजार मुस्लिम नाम तो सिरे से ही गायब कर दिए गए)।

सुप्रीम कोर्ट ने 24 अगस्त को 65 लाख डिलीटेड वोटरों की लिस्ट पब्लिश करने को कहा, और ECI ने कोर्ट के आदेश पर 1 सितंबर को लिस्ट अपलोड की, जिसमें 35% महिलाएं, 43% SC/ST वर्ग के थे।

ECI ने 1.32 करोड़ वोटरों का पता “संदिग्ध” बताया, जिसमें ‘एक मकान नं. पर 500 लोग रजिस्टर’ होने की बात सामने आई। हरियाणा में 2024 में यही फॉर्मूला इस्तेमाल करके बीजेपी ने 10 सीटें चुराईं। बिहार में 60% टर्नआउट का रिकॉर्ड रहा, मगर 15% बूथों पर 80% वोट बीजेपी को ‘बोतलबंद ईवीएम’ में मिले।

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ECI की चुप्पी और ‘स्पेशल कोड-99’ का लीक

उत्तराखंड के बीजेपी समर्थक प्रभात कुमार 2018 से 2025 तक 9 चुनावों में डबल वोटिंग करते पकड़े गए। पुणे की उर्मी ने 2024 लोकसभा और 2025 बिहार दोनों में वोट डाला और ‘X’ पर खुल्ला पोस्ट भी वायरल किया।

राहुल गांधी ने 7 नवंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में 8 और नाम पढ़े, जिनमें ‘पिता-पुत्र हरियाणा-UP डुएट’ शामिल थे। जुबैर ने 10 नवंबर तक 47 बीजेपी नेताओं के डबल EPIC की लिस्ट ट्वीट की।

बीजेपी डबल वोटिंग के इस खेल में BLO की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। BLO को 50 रुपए प्रति फॉर्म मिलता था, और बीजेपी कैडर ने 10 लाख फर्जी फॉर्म-6 भरे।

बिहार CEO ऑफिस का WhatsApp लीक बताता है कि “BJP लीडर्स के डुप्लिकेट को ‘स्पेशल कोड-99’ से पास करो”। यह कोई संयोग नहीं, बल्कि “ऑपरेशन लोटस 2.0” है, जिसका लक्ष्य वोटर लिस्ट से पहले लोकतंत्र को लूटना है।

‘वोट बचाओ मार्च’: लोकतंत्र की आखिरी लड़ाई

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, सुखबीर संधू, विवेक जोशी, आप सबने SIR को “BJP Intensive Revision” बना दिया है। 65 लाख गरीब, अल्पसंख्यक, महिलाएं लिस्ट से गायब किए गए, जबकि 5.24 लाख बीजेपी डुप्लिकेट बचे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने 14 अगस्त को सर्चेबल लिस्ट मांगी, मगर आयोग ने 10 GB का PDF ठूंस दिया, ताकि लिस्ट ओपन न हो सके। 10 नवंबर तक एक भी FIR बीजेपी नेता पर नहीं हुई है।

तेजस्वी यादव ने कहा है: “ECI = Extremely Compromised Institution” बन चुका है। राहुल गांधी ने संसद में कहा: “वोट चोरी से सरकार, और फिर देश की संपत्ति की चोरी”। जनरेशन Z, 18-25 वाले 1.8 करोड़ नए वोटर, तुम्हारा वोट चोरी हो रहा, तुम्हारा भविष्य लूटा जा रहा। 15 नवंबर को देशव्यापी “वोट बचाओ मार्च” में शामिल हो जाओ।

सड़क पर उतरो, हैशटैग #DoubleVoterExposed ट्रेंड कराओ, ECI दफ्तर घेरो। अगर आज नहीं लड़े, तो कल तुम्हारा नाम भी “माइग्रेटेड” हो जाएगा। यह लोकतंत्र की आखिरी लड़ाई है, या तो बीजेपी की डबल वोटिंग मशीन बंद करो, या अपने प्यारे से भारत को अलविदा कह दो!

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