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BJP महिला MP की चिट्ठी: क्या सस्पेंड होंगे प्रधानमंत्री की सीट घेरने वाले?

BJP महिला MP

भारतीय जनता पार्टी की महिला सांसदों ने मंगलवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक पत्र लिखकर पिछले हफ्ते सदन की कार्यवाही के दौरान विपक्षी सांसदों द्वारा किए गए कथित “घिनौने काम” पर सख्त नाराजगी जताई है। BJP महिला MP की चिट्ठी में उन विपक्षी सदस्यों के खिलाफ नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की अपील की गई है, जिन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं को बदनाम किया है।

यह विवाद पिछले हफ्ते लोकसभा में हुई उस अभूतपूर्व रुकावट के बाद पैदा हुआ है, जिसके कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का अपना तय जवाब कैंसिल करना पड़ा। 22 साल में यह पहली बार हुआ जब कोई प्रधानमंत्री निचले सदन में बहस का जवाब नहीं दे सका और बाद में हंगामे के बीच ही वॉयस वोट से प्रस्ताव पास कराया गया।

लोकसभा चैंबर के अंदर घटी दुर्भाग्यपूर्ण और अफसोसनाक घटना

सत्ताधारी दल की महिला सांसदों ने स्पीकर को लिखे पत्र में 4 फरवरी, 2026 की घटनाओं को संसद के इतिहास की सबसे बुरी घटनाओं में से एक बताया है। सांसदों ने कहा कि पूरे देश ने देखा कि विपक्षी सदस्य न केवल सदन के वेल में घुसे, बल्कि वे स्पीकर की टेबल पर चढ़ गए, कागज फाड़े और उन्हें आसन की ओर फेंका।

BJP महिला MP की चिट्ठी में विस्तार से बताया गया है कि किस तरह कुछ महिला विपक्षी सदस्य बैनर और प्लेकार्ड लेकर मर्यादा की सीमाओं को लांघकर दूसरी तरफ चली गईं। उन्होंने न केवल प्रधानमंत्री की खाली सीट को घेरा, बल्कि वे ट्रेजरी बेंच के उस हिस्से में भी घुस गईं जहाँ वरिष्ठ मंत्री बैठते हैं। सांसदों ने इस व्यवहार को “संसदीय लोकतंत्र के इतिहास के सबसे काले पलों” में से एक करार दिया है।

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प्रधानमंत्री की सुरक्षा और ‘अचानक होने वाली घटनाओं’ का डर

स्पीकर ओम बिरला ने खुद इस मामले पर गंभीर टिप्पणी की थी। उन्होंने बताया कि उन्हें “पक्की खुफिया जानकारी” मिली थी कि जब प्रधानमंत्री बोलने वाले होंगे, तो कुछ कांग्रेस सांसद उनकी सीट तक पहुँच सकते हैं और “अचानक होने वाली अप्रिय घटनाएं” कर सकते हैं। इसी डर और सुरक्षा कारणों से स्पीकर ने प्रधानमंत्री को उस समय सदन में न आने की सलाह दी थी।

हालांकि, विपक्ष इन आरोपों को खारिज कर रहा है। कांग्रेस की महिला सांसदों ने दावा किया कि उनका विरोध शांतिपूर्ण और नियमों के मुताबिक था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने स्पीकर को उनके खिलाफ “झूठे और बेबुनियाद” दावे करने के लिए मजबूर किया ताकि प्रधानमंत्री की सदन से गैरमौजूदगी को सही ठहराया जा सके।

विपक्ष का पलटवार और राहुल गांधी के भाषण पर जारी गतिरोध

सदन में इस गतिरोध की मुख्य वजह विपक्ष की वह मांग है, जिसमें वे राहुल गांधी को पूर्व आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण और भारत-चीन संबंधों पर बोलने की अनुमति चाहते हैं। BJP महिला MPs की चिट्ठी आने से एक दिन पहले कांग्रेस सांसदों ने भी स्पीकर को पत्र लिखा था।

विपक्ष का आरोप है कि राहुल गांधी को लगातार चार दिनों तक बोलने का मौका नहीं दिया गया, जबकि एक भाजपा सांसद को पूर्व प्रधानमंत्रियों के बारे में “अश्लील और भद्दी” बातें करने की इजाजत दी गई।

विपक्ष का कहना है कि जब उन्होंने इस पर आपत्ति जताई, तो स्पीकर ने इसे “बड़ी गलती” माना लेकिन बाद में सरकार के दबाव में आकर स्वतंत्र रूप से काम करना बंद कर दिया। अब विपक्ष स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) लाने की तैयारी कर रहा है।

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स्पीकर के चैंबर के पास आक्रामक व्यवहार और शोर-शराबा

भाजपा सांसदों ने पत्र में एक और गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सदन के भीतर की घटना के बाद स्थिति तब और खराब हो गई जब विपक्षी सांसद आक्रामक तरीके से स्पीकर के चैंबर की ओर बढ़े। सांसदों ने दावा किया कि वे चैंबर के अंदर से आने वाली तेज आवाजें सुन सकते थे।

BJP महिला MP की चिट्ठी में कहा गया है कि हालांकि वे विपक्षी पार्टी की तरफ से “गंभीर उकसावे” के कारण बहुत गुस्से में थीं, लेकिन उन्होंने अपने वरिष्ठ नेताओं के निर्देश पर संयम बनाए रखा और कोई जवाबी कार्रवाई नहीं की। सांसदों ने चेतावनी दी कि यदि उन्होंने संयम नहीं बरता होता, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती थी।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की निष्पक्षता और नेतृत्व पर जताया भरोसा

सत्तारूढ़ दल की 11 महिला सांसदों ने ओम बिरला के पिछले सात साल के कार्यकाल की जमकर तारीफ की है। उन्होंने पत्र में लिखा कि स्पीकर ने हमेशा सदन की प्रतिष्ठा बढ़ाने की कोशिश की है और बिना किसी भेदभाव के सभी सदस्यों को बराबर मौके दिए हैं। सांसदों ने कहा, “हमें आपकी लीडरशिप पर पूरा भरोसा है और लोकसभा खुशकिस्मत है कि आप इसके कस्टोडियन हैं।”

यह समर्थन ऐसे समय में आया है जब विपक्ष लगातार स्पीकर पर ट्रेजरी बेंच का पक्ष लेने का आरोप लगा रहा है। विवाद तब और गहरा गया जब भाजपा सांसद निशिकांत दुबे को गांधी परिवार पर निशाना साधने वाली किताबों से पढ़ने की अनुमति दी गई, लेकिन राहुल गांधी को चीन सीमा विवाद पर किताब का हवाला देने से रोक दिया गया।

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संसदीय लोकतंत्र की गरिमा और अनुशासन का सवाल

भाजपा सांसदों ने इस पूरी घटना को लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रहार बताया है। उन्होंने स्पीकर से अपील की है कि उन सांसदों के खिलाफ “सख्त से सख्त” कार्रवाई की जाए जिन्होंने सदन की पवित्रता को भंग किया है। पत्र में गेनीबेन ठाकोर, वर्षा गायकवाड़, ज्योतिमती, आर. सुधा, के. काव्या और शोभा बच्छव जैसी महिला सांसदों के नामों का जिक्र किया गया है जो कथित तौर पर प्रधानमंत्री की सीट के आसपास जमा हुई थीं।

सांसदों का कहना है कि ऐसी घटनाओं से देश की जनता के बीच संसद की छवि खराब होती है। दूसरी ओर, निलंबित कांग्रेस सांसदों, जिनमें हिबी ईडन और अमरिंदर राजा वारिंग शामिल हैं, का कहना है कि उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है ताकि वे राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर सवाल न उठा सकें।

बजट सत्र में जारी तनाव और भविष्य की अनिश्चितता

संसद का यह बजट सत्र लगातार दूसरे हफ्ते भी हंगामे की भेंट चढ़ता दिख रहा है। सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच अविश्वास की खाई इतनी गहरी हो गई है कि अब यह लड़ाई व्यक्तिगत आरोपों और पत्रों के दौर तक पहुँच गई है। BJP महिला MP ने साफ कर दिया है कि वे सदन की मर्यादा के साथ समझौता नहीं करेंगी और दोषियों को सजा दिलाकर ही दम लेंगी।

वहीं राहुल गांधी ने भी स्पीकर को पत्र लिखकर इसे “लोकतंत्र पर धब्बा” बताया है। अब सबकी नजरें स्पीकर ओम बिरला पर टिकी हैं कि वे इस मामले में क्या फैसला लेते हैं और क्या 4 फरवरी की घटनाओं के लिए जिम्मेदार सांसदों पर गाज गिरेगी या सदन में शांति बहाल करने का कोई बीच का रास्ता निकाला जाएगा।

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