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बलूचिस्तान में BLA बनाम पाकिस्तानी सेना के बीच खूनी जंग, 200 मौतें

BLA बनाम पाकिस्तानी सेना

BLA बनाम पाकिस्तानी सेना के बीच छिड़ी इस ताज़ा जंग ने बलूचिस्तान के 14 शहरों को दहला दिया है। प्रतिबंधित संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) द्वारा शुरू किए गए ‘ऑपरेशन हेरोफ़ फेज टू’ के तहत विद्रोहियों ने महज 10 घंटों के भीतर 84 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों को मार गिराने और 18 को जिंदा पकड़ने का दावा किया है।

बलूचिस्तान के क्वेटा, ग्वादर, मस्तुंग और कलात समेत 48 अलग-अलग ठिकानों पर हुए इन रेगुलर हमलों ने पाकिस्तान के सैन्य और प्रशासनिक ढांचे को हिलाकर रख दिया है। दुश्मन के मिलिट्री, इंटेलिजेंस एजेंसियों और CTD को एक साथ निशाना बनाकर विद्रोही गुटों ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है।

मुख्यमंत्री का बड़ा दावा: 40 घंटों में 145 उग्रवादियों का सफाया

बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री मीर सरफराज बुगती ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बेहद गंभीर स्थिति बयां की है। बुगती के मुताबिक, पिछले 40 घंटों में सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में 145 संदिग्ध आतंकवादी मारे गए हैं, जिनके शव अधिकारियों के कब्जे में हैं।

हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि मिलिटेंट्स के साथ हुई इन झड़पों में सुरक्षा बलों के 17 जवान भी शहीद हुए हैं। मुख्यमंत्री ने इसे आतंक के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई बताया है। सेना के जनसंपर्क विंग (ISPR) ने भी पुष्टि की है कि जवाबी ऑपरेशन में 92 मिलिटेंट्स को मार गिराया गया है, जिनमें तीन सुसाइड बॉम्बर भी शामिल थे।

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आम नागरिकों का कत्लेआम और ग्वादर में मासूमों की हत्या

इस हिंसा की सबसे दर्दनाक तस्वीर ग्वादर से सामने आई है, जहां मिलिटेंट्स ने एक ही परिवार की पांच महिलाओं और तीन बच्चों को मौत के घाट उतार दिया। ये सभी मासूम खुजदार और बलूच के रहने वाले थे। मुख्यमंत्री बुगती ने इन हत्याओं के पीड़ितों के वीडियो बयान भी जारी किए।

आंकड़ों के अनुसार, 31 जनवरी को हुए हमलों में कुल 31 आम नागरिक मारे गए, जबकि ISPR ने 18 आम नागरिकों की मौत की बात कही है। विद्रोहियों ने कई सरकारी इमारतों और बैंकों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे पूरे प्रांत में दहशत का माहौल है।

विद्रोही गुटों का एकजुट मोर्चा और ‘ऑपरेशन हेरोफ़ 2.0’ का समर्थन

बलूचिस्तान में जारी इस गृहयुद्ध जैसी स्थिति में BLA बनाम पाकिस्तानी सेना के संघर्ष को अब अन्य गुटों का भी साथ मिल रहा है। ‘यूनाइटेड बलूच आर्मी’ (UBA) ने आधिकारिक तौर पर ऑपरेशन हेरोफ़ 2.0 को अपना नैतिक और व्यावहारिक समर्थन देने का ऐलान किया है।

UBA के प्रवक्ता मज़ार बलूच ने कहा कि यह लड़ाई अब किसी एक संगठन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बलूच ज़मीन की आज़ादी और संप्रभुता का सवाल है। वहीं, BLA के कमांडर-इन-चीफ बशीर ज़ेब बलूच ने एक वीडियो जारी कर जनता से अपने घरों से बाहर निकलकर इस ‘राष्ट्रीय मुक्ति संघर्ष’ का हिस्सा बनने की अपील की है।

विदेशी हाथ के आरोप और नई दिल्ली का कड़ा जवाब

पाकिस्तानी सेना ने पंजगुर और हरनाई में मारे गए विद्रोहियों को “भारत और खवारिज का दुश्मन” करार दिया है। सेना अक्सर BLA और TTP जैसे समूहों के लिए ‘फितना-अल-हिंदुस्तान’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करती है। हालांकि, भारत ने इन बेबुनियाद आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक कमियों और मानवाधिकार उल्लंघन के रिकॉर्ड से ध्यान हटाने के लिए ऐसी मनगढ़ंत कहानियां गढ़ता है। नई दिल्ली ने साफ किया है कि पाकिस्तान को दूसरों पर आरोप लगाने के बजाय अपनी जनता की मांगों को सुनना चाहिए।

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CPEC और आर्थिक शोषण: विद्रोह की असली वजह

बलूचिस्तान भले ही $46 बिलियन के चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) का केंद्र हो, लेकिन स्थानीय लोगों के लिए यह सिर्फ एक ‘बेफायदे का विकास’ साबित हुआ है। 70% बहुआयामी गरीबी दर और 33% बेरोजगारी से जूझ रहे बलूच लोगों का आरोप है कि पंजाब और चीन मिलकर उनके संसाधनों (गैस, कोयला, सोना) को लूट रहे हैं।

ग्वादर पोर्ट जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स से स्थानीय युवाओं को नौकरियां नहीं मिलीं। BLA बनाम पाकिस्तानी सेना का यह संघर्ष इसी आर्थिक असमानता और सांस्कृतिक दमन का परिणाम है, जहां लोग पाकिस्तान के सुरक्षा बलों को एक ‘कब्जे वाली ताकत’ के रूप में देखते हैं।

ऐतिहासिक टीस: कलात रियासत के विलय से आज़ादी की मांग तक

बलूच विद्रोह की जड़ें 1948 के कलात रियासत के विलय विवाद में छिपी हैं। 11 अगस्त 1947 को कलात एक स्वतंत्र राष्ट्र बना था, लेकिन दबाव में आकर 1948 में इसे पाकिस्तान में शामिल कर लिया गया। तब से शुरू हुआ यह संघर्ष आज ‘ऑपरेशन हेरोफ़’ के रूप में और भी हिंसक हो गया है।

निर्वासन में रह रहे बलूच नेता मेहरान मर्री ने कहा कि अब बलूच किसी ‘ट्रंप’ या बाहरी ताकत का इंतजार नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपने बलिदान से अपनी ज़मीन की रक्षा कर रहे हैं। उनके अनुसार, पाकिस्तान एक अस्थिर देश है जो चीनी और अमेरिकी प्रभाव के बीच झूल रहा है।

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मौजूदा स्थिति और भविष्य की अनिश्चितता

प्रांत में हालात इतने चिंताजनक हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री सरदार अख्तर मेंगल ने गृह मंत्री मोहसिन नकवी के उस बयान पर तंज कसा है जिसमें उन्होंने कहा था कि मिलिटेंट्स से निपटने के लिए एक SHO ही काफी है। मेंगल ने पूछा कि अब वह SHO कहां है?

अमेरिका ने भी BLA के इन हमलों की निंदा की है, लेकिन ज़मीन पर हालात लगातार बदल रहे हैं। BLA बनाम पाकिस्तानी सेना के बीच छिड़ी इस जंग ने बलूचिस्तान को एक ऐसे चौराहे पर खड़ा कर दिया है, जहां सुरक्षा बलों का भारी दबाव और मिलिटेंट्स की बदलती रणनीति के बीच आम नागरिक पीस रहे हैं।

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