कांदिवली बीएमसी बुलडोजर कार्रवाई: 65 अवैध निर्माण ध्वस्त से हड़कंप
कांदिवली बीएमसी बुलडोजर कार्रवाई ने आज मुंबई के पश्चिमी उपनगर में उस समय हलचल मचा दी जब बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के दस्ते ने कांदिवली वेस्ट में एक बड़ा अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया। शनिवार, 21 फरवरी 2026 को हुई इस कार्रवाई में कुल 65 अवैध ढांचों को पूरी तरह से जमींदोज कर दिया गया।
यह ऑपरेशन सुबह-सुबह शुरू हुआ ताकि किसी भी बड़े विरोध या भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। बीएमसी के आर-साउथ (R-South) वार्ड के अधिकारियों के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य सड़कों को फेरीवालों और अवैध कब्जों से मुक्त कराना था, जो स्थानीय निवासियों और वाहनों की आवाजाही के लिए बड़ी मुसीबत बन चुके थे।
भारी पुलिस बल की तैनाती और तनावपूर्ण माहौल: स्थानीय लोगों में दिखा डर
इस कांदिवली बीएमसी बुलडोजर कार्रवाई के दौरान स्थिति को बिगड़ने से बचाने के लिए स्थानीय पुलिस के करीब 100 से अधिक जवानों को तैनात किया गया था। जैसे ही बुलडोजर ने अवैध दुकानों और अस्थायी ढांचों को गिराना शुरू किया, कुछ फेरीवालों और निवासियों ने विरोध करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस की मौजूदगी के कारण मामला शांत रहा।
बीएमसी अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई किसी को डराने के लिए नहीं, बल्कि कानून का राज स्थापित करने के लिए की गई है। कई दुकानदार ऐसे थे जिन्होंने बार-बार नोटिस दिए जाने के बावजूद फुटपाथों को खाली नहीं किया था, जिसके बाद प्रशासन को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा।
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कांदिवली वेस्ट की सड़कों पर सालों से था कब्जा: ट्रैफिक जाम से मिलेगी मुक्ति?
मुंबई के कांदिवली वेस्ट इलाके में रहने वाले लाखों लोगों के लिए यह कांदिवली बीएमसी बुलडोजर कार्रवाई एक राहत की खबर की तरह है। स्टेशन रोड और लिंक रोड के आसपास के फुटपाथों पर अवैध रूप से बनी दुकानों के कारण पैदल चलने वालों को सड़कों पर आना पड़ता था, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं और ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती थी।
बीएमसी का दावा है कि इस सफाई अभियान के बाद सड़कों की चौड़ाई बढ़ जाएगी और पीक आवर्स के दौरान होने वाली भीड़ में कमी आएगी। हालांकि, स्थानीय लोगों का एक बड़ा वर्ग यह भी सवाल उठा रहा है कि क्या यह जगह कुछ दिनों बाद फिर से अवैध फेरीवालों के कब्जे में नहीं चली जाएगी?
कमर्शियल हब और रिहायशी इलाकों पर फोकस: बीएमसी का बढ़ा हुआ अभियान
प्रशासन ने इस कांदिवली बीएमसी बुलडोजर कार्रवाई के तहत केवल छोटी दुकानों को ही निशाना नहीं बनाया, बल्कि उन कमर्शियल ढांचों को भी तोड़ा जो नियमों का उल्लंघन कर बढ़ाया गया था। बीएमसी के सहायक आयुक्त ने स्पष्ट किया कि कांदिवली के कई कीमती कमर्शियल प्लॉटों पर भू-माफियाओं ने अवैध रूप से शेड और गोडाउन बना लिए थे।
इस अभियान के जरिए बीएमसी ने करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया है। बीएमसी की टीम ने आधुनिक मशीनों और ‘गैस कटर्स’ का उपयोग करके कंक्रीट और लोहे के अवैध ढांचों को कुछ ही घंटों में मलबे में तब्दील कर दिया।
जेन-जी और मिलेनियल्स की राय: क्या यह कार्रवाई ‘अर्बन प्लानिंग’ का हिस्सा है?
सोशल मीडिया पर मुंबई के युवाओं के बीच यह मुद्दा काफी चर्चा में है। रेडिट और एक्स (X) पर युवा निवासी पूछ रहे हैं कि बीएमसी केवल चुनाव या विशेष अभियानों के समय ही क्यों जागती है? कांदिवली के निवासियों का कहना है कि वे टैक्स देते हैं और उन्हें चलने के लिए साफ फुटपाथ चाहिए।
वहीं, युवाओं का एक बड़ा वर्ग उन गरीब फेरीवालों के प्रति भी सहानुभूति रखता है जिनकी रोजी-रोटी इस बुलडोजर के नीचे दब गई। उनके लिए यह लड़ाई ‘नियम’ बनाम ‘आजीविका’ की है। युवा पीढ़ी चाहती है कि शहर में ‘हॉकिंग जोन’ (Hawking Zones) का सही क्रियान्वयन हो ताकि न तो ट्रैफिक बाधित हो और न ही किसी गरीब का चूल्हा बुझे।
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बुलडोजर की दहाड़ और मलबे का ढेर: प्रशासन ने दिया सख्त चेतावनी संदेश
बीएमसी की इस कार्रवाई ने मुंबई के अन्य वार्डों के अतिक्रमणकारियों को भी एक साफ संदेश दे दिया है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि तोड़े गए ढांचों पर फिर से निर्माण करने की कोशिश की गई, तो न केवल सामान जब्त किया जाएगा बल्कि आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज होगा।
कांदिवली वेस्ट में जमा हुए टन मलबे को हटाने के लिए करीब 15 से अधिक ट्रकों को लगाया गया है। प्रशासन का कहना है कि अब इन खाली कराई गई जगहों पर लोहे की रेलिंग या छोटे बगीचे विकसित किए जा सकते हैं ताकि भविष्य में दोबारा कब्जा न हो सके।
विपक्ष का पलटवार: क्या यह गरीबों को जानबूझकर परेशान करने की साजिश है?
राजनीतिक हलकों में भी इस बुलडोजर एक्शन की गूँज सुनाई दे रही है। विपक्षी दलों के नेताओं ने आरोप लगाया है कि बीएमसी चयनात्मक कार्रवाई कर रही है। उनका कहना है कि बड़े बिल्डरों और रसूखदारों के अवैध निर्माणों को हाथ नहीं लगाया जाता, जबकि छोटे दुकानदारों पर बुलडोजर चला दिया जाता है।
उन्होंने मांग की है कि प्रशासन को पहले इन दुकानदारों के पुनर्वास की व्यवस्था करनी चाहिए थी। हालांकि, बीएमसी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनके पास हर एक ढांचे के अवैध होने के पर्याप्त दस्तावेजी सबूत मौजूद हैं और यह कार्रवाई पूरी तरह से निष्पक्ष है।
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एक स्वच्छ और व्यवस्थित मुंबई का सपना कितना करीब?
अंततः, कांदिवली में हुई यह कार्रवाई यह दिखाती है कि प्रशासन अब शहर की अव्यवस्था को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहा है। एक सीनियर न्यूज एडिटर के तौर पर मेरा मानना है कि शहर के विकास के लिए कड़े फैसलों की जरूरत होती है, लेकिन इसके साथ ही मानवीय संवेदनाओं और वैकल्पिक समाधानों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
कांदिवली की सड़कों का अब बदला हुआ स्वरूप यह तय करेगा कि बीएमसी का यह ‘बुलडोजर मॉडल’ कितना सफल रहा है। क्या मुंबई वाकई एक वैश्विक स्तर का व्यवस्थित शहर बन पाएगा या यह सब कुछ दिनों बाद फिर से पुरानी स्थिति में लौट आएगा? यह आने वाला वक्त ही बताएगा।
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