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ब्रिटेन में संजय भंडारी के प्रत्यर्पण पर मानवाधिकार का मसला: क्या भारत की न्याय व्यवस्था विश्वास योग्य है?

भारत में आर्थिक अपराधियों के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया हमेशा एक गंभीर विषय रही है। विशेषकर तब जब विदेशों में छिपे हुए अपराधियों के मामलों की बात आती है। ब्रिटेन के उच्च न्यायालय द्वारा संजय भंडारी के प्रत्यर्पण को रोकने का निर्णय यह दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था में मानवाधिकार की चिंता और भारतीय न्याय प्रणाली की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

संजय भंडारी का प्रत्यर्पण: एक विवादास्पद मुद्दा

भारत में हथियार डीलर के रूप में पहचाने जाने वाले संजय भंडारी पर मनी लॉन्ड्रिंग और काले धन से संबंधित गंभीर आरोप हैं। 2016 में लंदन भागने के बाद, भारतीय सरकार ने भंडारी के प्रत्यर्पण के लिए ब्रिटेन के उच्च न्यायालय में दो बार आवेदन किया था। हालांकि, ब्रिटेन के न्यायालय ने 28 फरवरी 2025 को एक फैसले में भंडारी के प्रत्यर्पण को रोक दिया। अदालत ने यह निर्णय लिया कि भंडारी को प्रत्यर्पित करने से उसके मानवाधिकारों का उल्लंघन होगा और उसे तिहाड़ जेल में “भयावह स्थिति” का सामना करना पड़ेगा।

मानवाधिकार का हवाला: तिहाड़ जेल की स्थिति पर सवाल

ब्रिटेन के न्यायालय ने भंडारी के प्रत्यर्पण को इस आधार पर रोका कि तिहाड़ जेल में उसकी सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए “वास्तविक जोखिम” था। अदालत के अनुसार, तिहाड़ जेल में बंद अपराधियों के लिए उपयुक्त सुरक्षा, चिकित्सा देखभाल, और मानवाधिकारों की रक्षा की गारंटी नहीं दी जा सकती। विशेष रूप से संजय भंडारी जैसे व्यक्ति के लिए जो उच्चतम श्रेणी के अपराधियों में शुमार हैं, यह सुरक्षा और अन्य सुविधाओं को लेकर गंभीर चिंता थी।

उच्च न्यायालय ने भारतीय सरकार के आश्वासनों को नकारते हुए कहा कि तिहाड़ जेल की भीड़-भाड़, हिंसा, और भ्रष्टाचार जैसी समस्याएं उसके मानवाधिकारों के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं। न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि भंडारी की तरह अमीर व्यक्ति को अधिक संभावना है कि वह जेल में जबरन वसूली और हिंसा का शिकार हो।

भारत सरकार के दावों की विश्वसनीयता पर सवाल

भारत सरकार ने अपने प्रत्यर्पण अनुरोधों को समर्थन देने के लिए तिहाड़ जेल में भंडारी की सुरक्षा को लेकर कई आश्वासनों का उल्लेख किया था। इनमें यह भी शामिल था कि जेल में उसकी सुरक्षा, चिकित्सा देखभाल, और अन्य आवश्यक सुविधाओं की पूरी गारंटी दी जाएगी। लेकिन ब्रिटेन के उच्च न्यायालय ने इन दावों को अपर्याप्त मानते हुए भंडारी के प्रत्यर्पण को रोक दिया। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि तिहाड़ जेल की भीड़-भाड़ और हिंसक घटनाओं के कारण भंडारी के जीवन को खतरा हो सकता है।

क्या यह निर्णय अन्य आर्थिक अपराधियों के लिए उदाहरण बनेगा?

इस फैसले के बाद, अन्य आर्थिक अपराधियों, जिनमें मेहुल चोकसी और विजय माल्या जैसे नाम शामिल हैं, को भी अपनी प्रत्यर्पण प्रक्रिया में इसे उदाहरण के रूप में उपयोग किया जा सकता है। संजय भंडारी के मामले में ब्रिटेन के उच्च न्यायालय द्वारा उठाए गए सवालों ने भारतीय न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

भारत में जब तक न्यायालय और जेल प्रशासन सुधार की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाते, तब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय सरकार के प्रत्यर्पण अनुरोधों को चुनौती देने वाले मामले बढ़ सकते हैं। विशेष रूप से उन मामलों में जहां अपराधी विदेशों में छिपे हुए हैं और उनके प्रत्यर्पण के लिए भारत की न्याय व्यवस्था पर भरोसा नहीं किया जाता।

संजय भंडारी का केस: एक प्रणालीगत समस्या का प्रतीक

ब्रिटेन के उच्च न्यायालय का फैसला सिर्फ संजय भंडारी के प्रत्यर्पण से संबंधित नहीं था, बल्कि इसने भारतीय जेलों और न्याय व्यवस्था की प्रणालीगत समस्याओं को भी उजागर किया। न्यायालय ने भारतीय अधिकारियों के कामकाजी तरीकों पर गंभीर सवाल उठाए। इसमें तिहाड़ जेल में हाल की हिंसक घटनाओं, जैसे कि गिरोहों के बीच संघर्ष और जेल में सुरक्षात्मक नाकामी की चर्चा की गई।

इस फैसले ने यह साबित कर दिया कि भारतीय न्याय व्यवस्था को सुधार की जरूरत है। अदालत ने यह भी बताया कि जेल अधिकारियों द्वारा किसी भी अपराधी की सुरक्षा में गहरी खामियां हैं, जिससे न्याय की प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।

न्यायपालिका के सुधार की आवश्यकता

संजय भंडारी के मामले में न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले ने यह स्पष्ट किया है कि भारत को अपनी न्यायिक प्रक्रिया और जेल प्रशासन में सुधार की आवश्यकता है। केवल नीतिगत बदलाव ही नहीं, बल्कि उन नीतियों को लागू करने के तरीके को भी संशोधित करने की जरूरत है।

भारत में ऐसे अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्यवाही करने के लिए यह जरूरी है कि न्याय व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाया जाए। न्यायिक प्रणाली को विश्वसनीय बनाने के लिए जेलों में सुधार, समुचित सुरक्षा, और निर्दोष नागरिकों के अधिकारों का सम्मान अत्यंत आवश्यक है।

निष्कर्ष: संजय भंडारी का केस भारतीय न्याय प्रणाली के लिए चेतावनी

ब्रिटेन के उच्च न्यायालय द्वारा संजय भंडारी के प्रत्यर्पण को रोकने का फैसला भारतीय न्याय प्रणाली के लिए एक चेतावनी है। यह मामला दर्शाता है कि जब तक भारतीय जेलों में सुरक्षा, कानूनी प्रक्रिया और मानवाधिकारों के बारे में गंभीर सुधार नहीं होंगे, तब तक भारत के अंतरराष्ट्रीय प्रत्यर्पण अनुरोधों को चुनौती देना आसान होगा।

भारत को अपनी न्याय व्यवस्था में सुधार करने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में इस प्रकार के मामलों को अधिक प्रभावी तरीके से निपटाया जा सके और देश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को नुकसान से बचाया जा सके।

राजेश सिंह

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