CBSE बोर्ड परीक्षा 2026: प्रैक्टिकल मार्क्स पर बड़ा झटका
CBSE बोर्ड परीक्षा 2026 की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। CBSE के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने स्पष्ट कर दिया है कि छात्र केवल थ्योरी पेपर्स के अंकों के पुनर्मूल्यांकन (Reassessment) के लिए आवेदन कर सकते हैं, प्रैक्टिकल परीक्षाओं के लिए नहीं।
इसका सीधा मतलब यह है कि एक बार प्रैक्टिकल के नंबर बोर्ड के पोर्टल पर अपलोड हो गए, तो उनमें किसी भी स्थिति में बदलाव नहीं किया जा सकेगा।
यह निर्देश उन छात्रों के लिए एक बड़े झटके के समान है जो अक्सर थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल में भी कम नंबर आने पर सुधार की उम्मीद रखते थे। बोर्ड ने स्कूलों को साफ कर दिया है कि प्रैक्टिकल अंकों की शुद्धता सुनिश्चित करना उनकी जिम्मेदारी है, क्योंकि एक बार डेटा लॉक होने के बाद छात्र अपनी प्रैक्टिकल स्कोरिंग को बेहतर बनाने का मौका खो देंगे।
थ्योरी बनाम प्रैक्टिकल: संयम भारद्वाज ने बताया पुनर्मूल्यांकन का असली सच
परीक्षा नियंत्रक ने इस साल कीCBSE बोर्ड परीक्षा 2026 के संचालन को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। संयम भारद्वाज के अनुसार, बोर्ड की मूल्यांकन नीति में थ्योरी पेपर्स के लिए स्क्रूटनी और पुनर्मूल्यांकन का प्रावधान तो है, लेकिन प्रैक्टिकल, प्रोजेक्ट वर्क और इंटरनल असेसमेंट इस दायरे से बाहर हैं।
छात्रों को यह समझना होगा कि उनके स्कूल द्वारा दिए गए प्रैक्टिकल अंक ही अंतिम माने जाएंगे। यदि कोई छात्र प्रैक्टिकल परीक्षा के दिन अनुपस्थित रहता है, तो स्कूल उसे फिर से शेड्यूल कर सकते हैं, लेकिन एक बार परीक्षा संपन्न होने और अंक भेजने के बाद कोई भी अपील स्वीकार नहीं की जाएगी।
यह स्पष्टीकरण इसलिए जरूरी था क्योंकि पिछले सालों में कई छात्रों ने प्रैक्टिकल मार्क्स को चुनौती देने की कोशिश की थी, जिससे बोर्ड के रिजल्ट प्रोसेसिंग में देरी होती थी।
इसे भी पढ़े : CBSE बोर्ड परीक्षा 2026: फेल होने का डर अब गुजरे जमाने की बात?
पेपर एनालिसिस पर लगाम: परीक्षा खत्म होने से पहले नहीं होगा कोई पोस्टमार्टम
बोर्ड ने CBSE बोर्ड परीक्षा 2026 के दौरान होने वाली एक और बड़ी समस्या ‘समय से पहले पेपर एनालिसिस’ पर सख्त पाबंदी लगा दी है। अक्सर देखा जाता था कि पेपर खत्म होने के कुछ ही मिनटों के भीतर कई विशेषज्ञ और स्कूल पेपर का विश्लेषण सोशल मीडिया पर साझा कर देते थे।
CBSE बोर्ड ने अब सभी स्कूलों और विषय विशेषज्ञों को अलर्ट किया है कि परीक्षा पूरी होने से पहले पेपर का कोई भी विश्लेषण या फीडबैक सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए।
का मानना है कि इस तरह के जल्दबाजी में किए गए विश्लेषण से परीक्षा की गोपनीयता और छात्रों के मानसिक संतुलन पर बुरा असर पड़ता है। यदि कोई स्कूल इस निर्देश का उल्लंघन करता पाया गया, तो बोर्ड उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।
छात्रों के लिए नया ड्रेस कोड और आचरण नियमावली: क्या है एसेंशियल लिस्ट?
CBSE बोर्ड परीक्षा 2026 में बैठने वाले उम्मीदवारों के लिए ड्रेस कोड और कंडक्ट गाइडलाइंस को लेकर भी एक विस्तृत सूची जारी की गई है। छात्रों को केवल स्कूल की अधिकृत यूनिफॉर्म में ही परीक्षा केंद्र पर प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। इसके साथ ही, पारदर्शी पानी की बोतल, एडमिट कार्ड और स्टेशनरी के अलावा कुछ भी ले जाना सख्त मना है।
बोर्ड ने एक ‘एसेंशियल लिस्ट’ जारी की है जिसमें यह बताया गया है कि डिजिटल घड़ी, मोबाइल फोन या किसी भी प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक गैजेट ले जाना यूएफएम (UFM – Unfair Means) की श्रेणी में आएगा। परीक्षार्थियों को सलाह दी गई है कि वे केंद्र पर कम से कम 45 मिनट पहले पहुँचें ताकि सुरक्षा जांच और वेरिफिकेशन में कोई देरी न हो और उनकी परीक्षा सुचारू रूप से शुरू हो सके।
इसे भी पढ़े : CBSE परीक्षा 2026: अब साल में दो बार, छात्रों को मिलेगा बेहतर मौका!
स्कूलों को विशेष छूट: प्रैक्टिकल परीक्षा फिर से शेड्यूल करने की मिली आजादी
यद्यपि अंकों में सुधार का विकल्प नहीं है, लेकिन CBSE बोर्ड परीक्षा 2026 की प्रक्रिया में स्कूलों को एक राहत दी गई है। यदि कोई छात्र किसी जायज कारण से या चिकित्सा आपातकाल की स्थिति में अपनी प्रैक्टिकल परीक्षा नहीं दे पाता है, तो स्कूल उन छात्रों के लिए परीक्षा को फिर से शेड्यूल कर सकते हैं।
यह अनुमति केवल उन्हीं छात्रों के लिए है जो आधिकारिक तौर पर अनुपस्थित दर्ज किए गए हैं। स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे ऐसे मामलों का पूरा रिकॉर्ड रखें और बोर्ड को इसकी जानकारी समय पर दें।
यह लचीलापन उन छात्रों के लिए जीवनदान जैसा है जो अचानक आई किसी समस्या के कारण अपना प्रैक्टिकल मिस कर देते हैं, हालांकि उन्हें यह ध्यान रखना होगा कि दोबारा मौका मिलना केवल स्कूल के विवेक और बोर्ड के नियमों के अधीन है।
विशेषज्ञों को चेतावनी: पेपर विश्लेषण में जल्दबाजी न करें, बढ़ सकती है मुश्किल
CBSE ने विषय विशेषज्ञों को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि CBSE बोर्ड परीक्षा 2026 की गरिमा बनाए रखना सबकी जिम्मेदारी है। अक्सर यूट्यूब और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर व्यूज पाने के चक्कर में गलत या भ्रामक पेपर एनालिसिस पोस्ट कर दिया जाता है।
बोर्ड ने स्कूलों को स्पष्ट रूप से सूचित किया है कि वे अपने शिक्षकों को निर्देशित करें कि वे आधिकारिक तौर पर परीक्षा संपन्न होने के बाद ही कोई फीडबैक साझा करें।
यह कदम उन अफवाहों को रोकने के लिए उठाया गया है जो अक्सर पेपर के कठिन होने या किसी प्रश्न के गलत होने को लेकर उड़ाई जाती हैं। बोर्ड का कहना है कि यदि किसी प्रश्न में कोई विसंगति है, तो उसे एक औपचारिक माध्यम से बोर्ड तक पहुँचाया जाना चाहिए, न कि सोशल मीडिया पर उसका प्रोपेगेंडा करना चाहिए।
जेन-जी छात्रों के लिए परीक्षा टिप्स: तनाव नहीं, तकनीक और तैयारी पर दें ध्यान
आज की डिजिटल पीढ़ी यानी जेन-जी के लिएCBSE बोर्ड परीक्षा 2026 केवल किताबों तक सीमित नहीं है। छात्र अब ऑनलाइन संसाधनों और एआई टूल्स का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन बोर्ड की नई गाइडलाइंस उन्हें याद दिलाती हैं कि परीक्षा हॉल के भीतर केवल उनकी कड़ी मेहनत और याददाश्त ही काम आएगी।
छात्रों को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी लिखावट और उत्तर देने के तरीके पर ध्यान दें, क्योंकि थ्योरी पेपर्स में ही अब नंबरों को बढ़ाने का एकमात्र रास्ता बचा है।
प्रैक्टिकल के नंबरों की चिंता करने के बजाय, छात्रों को अब अपने आने वाले थ्योरी एग्जाम्स की तैयारी को पुख्ता करना चाहिए। बोर्ड के नए नियम अनुशासन को प्राथमिकता देते हैं, इसलिए छात्रों को किसी भी प्रकार की अनुचित गतिविधि से बचना चाहिए जो उनके पूरे साल की मेहनत को बर्बाद कर सकती है।
इसे भी पढ़े : Chemistry पेपर लीक होने से क्या सच में रद्द होगी महाराष्ट्र में 12वीं की परीक्षा?
अनुशासन और पारदर्शिता के साथ ‘बोर्ड 2026’ की चुनौती
अंततः, CBSEबोर्ड परीक्षा 2026 को लेकर जारी किए गए ये नए नियम दिखाते हैं कि बोर्ड अब मूल्यांकन की पारदर्शिता और परीक्षा की सुचिता को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता करने के मूड में नहीं है। प्रैक्टिकल मार्क्स में सुधार का विकल्प बंद करके बोर्ड ने स्कूलों पर जवाबदेही तय की है, तो वहीं पेपर एनालिसिस पर पाबंदी लगाकर छात्रों को अनावश्यक तनाव से बचाने की कोशिश की है।
एक सीनियर एडिटर के रूप में मेरा मानना है कि ये बदलाव शुरुआत में कठिन लग सकते हैं, लेकिन लंबे समय में ये एक निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली का निर्माण करेंगे। छात्रों के लिए अब सबसे बड़ा मंत्र यही है कि वे नियमों का पालन करें, समय पर केंद्र पहुँचें और अपने थ्योरी पेपर्स में अपनी पूरी ताकत झोंक दें, क्योंकि अब वही उनके भविष्य का फैसला करेंगे।
इसे भी पढ़े : बिहार IAS चार्टर्ड प्लेन विवाद: IAS नीलेश देवरे की शाही उड़ान पर संग्राम



Post Comment