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कर्नल कुरैशी टिप्पणी: मंत्री शाह को सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार

कर्नल कुरैशी टिप्पणी

कर्नल कुरैशी टिप्पणी मामले में मध्य प्रदेश के मंत्री कुंवर विजय शाह को सुप्रीम कोर्ट से तगड़ी फटकार मिली है। शीर्ष अदालत ने सार्वजनिक माफी मांगने में उनकी विफलता पर नाराजगी व्यक्त की है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, “यह आदमी हमारे धैर्य की परीक्षा ले रहा है।”

  • मंत्री की ऑनलाइन माफी को अदालत ने किया खारिज।
  • जांच पूरी करने के लिए एसआईटी को मिला समय।
  • मामले की अगली सुनवाई अब 18 अगस्त को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने मंत्री के आचरण पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके इरादों और ईमानदारी पर भी संदेह जताया गया है।कर्नल कुरैशी टिप्पणी: मंत्री शाह को सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार

एसआईटी जांच में तेजी: 13 अगस्त तक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश

मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ कर्नल कुरैशी टिप्पणी की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) को सुप्रीम कोर्ट ने 13 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। एसआईटी ने अदालत को सूचित किया कि उसने 27 लोगों के बयान दर्ज किए हैं। कुछ वीडियो क्लिप की भी गहन जांच की जा रही है।

  • जांच 90 दिनों की वैधानिक सीमा में होगी पूरी।
  • एसआईटी में तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी शामिल हैं।
  • इनमें से एक महिला अधिकारी भी जांच दल का हिस्सा है।

जांच दल ने 87 लोगों से पूछताछ की है। वे वर्तमान में बयानों की जांच कर रहे हैं।

विवाद का घटनाक्रम: हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक की यात्रा

यह विवाद 11 मई को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में एक हलमा कार्यक्रम से शुरू हुआ। वहां शाह ने कथित तौर पर कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसके बाद, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 14 मई को शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। उच्च न्यायालय ने पुलिस को चेतावनी दी कि यदि 14 मई की शाम तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई, तो अवमानना कार्रवाई होगी।

  • विजय शाह पर बीएनएस की धारा 152, 196(1)(बी), 197(1)(सी) लगी।
  • हाई कोर्ट ने 15 मई को पुलिस को कड़ी आलोचना की।
  • अदालत ने इसे राज्य सरकार की ओर से “घोर छल” कहा।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया। उच्च न्यायालय की कार्यवाही को बंद कर दिया गया।

मंत्री के इस्तीफे की मांग और सुप्रीम कोर्ट का रुख

कांग्रेस नेता जया ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट में एक अधिकार-पृच्छा याचिका दायर की है। इसमें मंत्री विजय शाह को पद से हटाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया है कि शाह की टिप्पणियां संविधान के अनुच्छेद 164(3) के तहत शपथ का उल्लंघन करती हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सीधे विचार करने से इनकार कर दिया।

  • जया ठाकुर ने 28 मई को सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर की।
  • याचिकाकर्ताओं ने एसआईटी के आचरण पर भी सवाल उठाए।
  • उन्होंने सरकार पर शाह को बचाने का आरोप भी लगाया।

अदालत ने नई याचिका दायर करने का सुझाव दिया। इसके बाद औपचारिक रूप से एक नई याचिका दायर की गई।

आपत्तिजनक टिप्पणी का विवरण: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और कर्नल कुरैशी

विजय शाह ने 11 मई को महू के रायकुंडा गांव में अपने भाषण में ‘ऑपरेशन सिंदूर‘ का जिक्र किया था। उन्होंने कहा, “मोदी जी ने अपनी बहन को उनके घर भेजकर उन्हें उन्हीं की दवा चखा दी।” उन्होंने आगे कहा कि “हम अपनी इज्जत का बदला तुम्हारी जाति की महिलाओं को पाकिस्तान भेजकर ले सकते हैं।” यह टिप्पणी सीधे तौर पर कर्नल सोफिया कुरैशी पर लक्षित थी। उन्होंने विंग कमांडर व्योमिका सिंह और विदेश सचिव विक्रम मिस्री के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी।

  • एसआईटी ने 19 जुलाई को मंत्री विजय शाह से पूछताछ की थी।
  • उनसे लगभग 25 मिनट तक पूछताछ हुई, 8-10 सवाल पूछे गए।
  • एसआईटी ने 20 मई को इंदौर के बाणगंगा थाना क्षेत्र में जांच शुरू की।

21 मई को, टीम रायकुंडा गांव पहुंची। उन्होंने वहां भाषण की रिकॉर्डिंग करने वाले पत्रकारों से बात की।

एसआईटी जांच का विस्तार: 125 से अधिक बयान दर्ज

एसआईटी ने 22 मई से पांच दिनों तक बयान दर्ज किए। 125 से अधिक लोगों को बुलाया गया, जिनमें पत्रकार, छात्र और पूर्व मंत्री भी शामिल थे। एनसीसी कैडेट्स और विभिन्न संगठनों के स्वयंसेवकों ने भी गवाही दी। महू की वर्तमान विधायक और पूर्व मंत्री उषा ठाकुर, जो भाषण के दौरान मंच पर मौजूद थीं, उनके भी बयान लिए गए।

  • डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति से बात की गई।
  • जनपद पंचायत अध्यक्ष और कार्यक्रम आयोजक से भी पूछताछ हुई।
  • इंदौर पुलिस ने एसआईटी को जांच में पूरी सहायता दी।

सभी बयानों को दर्ज करके 28 मई को अदालत में पेश किया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने शाह को चेताया: “देश आप पर शर्मिंदा है”

सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी कर्नल कुरैशी टिप्पणी को “घिनौना, अशिष्ट और शर्मनाक” बताया था। पीठ ने मंत्री द्वारा मांगी गई सार्वजनिक माफी को निष्ठाहीन बताते हुए खारिज कर दिया था। न्यायमूर्ति कांत ने कड़े शब्दों में कहा था, “देश आप (शाह) पर शर्मिंदा है। आपको ही इससे मुक्ति चाहिए।” पिछली सुनवाई में, अदालत ने टिप्पणी की थी कि मंत्री की टिप्पणियां “अशिष्ट और विचारहीन” थीं।

  • मंत्री विजय शाह ने वीडियो के माध्यम से माफी मांगी थी।
  • यह 15 मई, 2025 को भोपाल में जारी किया गया था।
  • फिर भी सुप्रीम कोर्ट ने इसे नाकाफी माना।

मंत्री का आचरण अदालत को उनकी ईमानदारी पर और संदेह करा रहा है।

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