कांग्रेस नेता सुरेश कलमाड़ी का 81 साल की उम्र में निधन पुणे में ली अंतिम सांस
वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुरेश कलमाड़ी का मंगलवार सुबह पुणे में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। परिवार के सूत्रों और उनके कार्यालय से जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, पूर्व केंद्रीय मंत्री ने मंगलवार, 6 जनवरी, 2026 को तड़के करीब 3.30 बजे अंतिम सांस ली। वह 81 वर्ष के थे और पुणे के दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। पुणे के एक प्रमुख राजनीतिक व्यक्तित्व के रूप में पहचाने जाने वाले कलमाड़ी रेल राज्य मंत्री रह चुके थे और इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) के पूर्व अध्यक्ष के रूप में उन्होंने कई वर्षों तक राष्ट्रीय स्तर पर खेल प्रशासन का नेतृत्व किया। उनके निधन की खबर से राजनीतिक और खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है, और विभिन्न पार्टियों के नेताओं ने सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान को याद करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।
परिवार और अंतिम संस्कार का विवरण
कलमाड़ी के परिवार में उनकी पत्नी, एक विवाहित बेटा और बहू, दो विवाहित बेटियां और दामाद, साथ ही पोते-पोतियां हैं। सूत्रों ने बताया कि उनके पार्थिव शरीर को पुणे के एरंडवाने इलाके में स्थित उनके निवास ‘कलमाड़ी हाउस’ में दोपहर 2 बजे तक अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद, उनका अंतिम संस्कार मंगलवार दोपहर 3.30 बजे पुणे के नवी पेठ स्थित वैकुंठ श्मशान भूमि में किया जाएगा। उनके कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में पुष्टि की गई कि 81 वर्षीय नेता पिछले काफी समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे और उम्र के इस पड़ाव पर लंबी बीमारी उनके निधन का कारण बनी।
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भारतीय वायु सेना के पायलट से राजनीति के शीर्ष तक का सफर
1 मई, 1944 को मद्रास (अब चेन्नई) में जन्मे कांग्रेस नेता सुरेश कलमाड़ी की जड़ें मैंगलोर में थीं, लेकिन उनकी शिक्षा और कर्मभूमि पुणे रही। उन्होंने सेंट विंसेंट हाई स्कूल और फर्ग्यूसन कॉलेज से पढ़ाई की और फिर नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) में शामिल हुए। सार्वजनिक जीवन में आने से पहले वह भारतीय वायु सेना (IAF) में एक फाइटर पायलट थे। उन्होंने एयर फोर्स फ्लाइंग कॉलेज में एविएशन ट्रेनिंग ली थी। वायु सेना छोड़ने के बाद उन्होंने छात्र राजनीति में कदम रखा और 1977 में पुणे युवा कांग्रेस के अध्यक्ष बने। इसके बाद 1978 से 1980 तक वह महाराष्ट्र युवा कांग्रेस के अध्यक्ष रहे और 1981 से 1986 तक उन्होंने भारतीय युवा कांग्रेस (समाजवादी) के प्रमुख के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
संसदीय करियर और रेल मंत्रालय में भूमिका
कलमाड़ी का संसदीय करियर बेहद प्रभावशाली रहा। वह पहली बार 1982 में राज्यसभा के सदस्य चुने गए और 2004 तक उच्च सदन में कुल चार कार्यकाल (1982-1996, 1998-2004) पूरे किए। लोकसभा में उन्होंने पुणे शहर का कई बार प्रतिनिधित्व किया। वह 1996 में पहली बार लोकसभा सांसद चुने गए और फिर 2004 तथा 2009 में भी उन्होंने जीत दर्ज की। हालांकि, 1998 के लोकसभा चुनाव में वह ‘पुणे विकास अघाड़ी’ के उम्मीदवार के तौर पर हार गए थे। पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के कार्यकाल के दौरान, कलमाड़ी ने 1995 से 1996 तक रेल राज्य मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। पुणे में उनकी सांगठनिक पकड़ इतनी मजबूत थी कि 1992 से पुणे नगर निगम पर कांग्रेस का वर्चस्व उन्हीं के नेतृत्व में बना रहा।
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खेल प्रशासन और इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) का नेतृत्व
राजनीति के साथ-साथ कांग्रेस नेता सुरेश कलमाड़ी का नाम भारतीय खेल प्रशासन का पर्याय बन गया था। वह 1996 से 2012 तक लगातार इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे। इसके अलावा, वह 2000 से 2013 तक एशियन एथलेटिक्स एसोसिएशन (AAA) के चीफ भी रहे। उन्होंने 1980 में महाराष्ट्र एथलेटिक्स एसोसिएशन के अध्यक्ष के रूप में मास्को ओलंपिक के लिए चयन ट्रायल आयोजित किए थे। भारत में खेलों को बढ़ावा देने और बड़े बहु-खेल आयोजनों की मेजबानी में उनकी केंद्रीय भूमिका थी। उन्होंने 1989 में पुणे फेस्टिवल, पुणे व्यासपीठ और राष्ट्रीय खेलों जैसी पहल शुरू की थी। 2007 में उन्होंने भारत में फॉर्मूला वन ग्रैंड प्रिक्स लाने के लिए समझौता किया था, हालांकि बाद में उनके बेटे की कंपनी के शेयरों को लेकर विवाद भी उत्पन्न हुआ।
कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG) घोटाला और करियर पर ग्रहण
सुरेश कलमाड़ी के शानदार करियर पर 2010 के दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG) भ्रष्टाचार मामले से गहरा ग्रहण लग गया। आयोजन समिति के चेयरमैन के रूप में उन पर गेम्स के फंड के गलत इस्तेमाल और कॉन्ट्रैक्ट देने में अनियमितताओं के आरोप लगे। अप्रैल 2011 में CBI ने उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, आपराधिक साजिश (120B) और धोखाधड़ी (420) के तहत गिरफ्तार किया, जिसके बाद उन्हें तिहाड़ जेल में करीब 10 महीने बिताने पड़े। इस विवाद के कारण कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से सस्पेंड कर दिया और उन्हें IOA अध्यक्ष पद से भी हटना पड़ा। यह मामला विशेष रूप से टाइमिंग-स्कोरिंग-रिजल्ट (TSR) और वर्कफोर्स सर्विस के कॉन्ट्रैक्ट्स से जुड़ा था।
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कानूनी लड़ाई और क्लीन चिट का दौर
सालों तक चली कानूनी जांच के बाद, कलमाड़ी को राहत मिलने का सिलसिला शुरू हुआ। जनवरी 2014 में CBI ने कुछ आरोपों में उनके खिलाफ क्लोजर रिपोर्ट दायर की थी। पिछले साल यानी 2025 में, दिल्ली की एक स्पेशल कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कलमाड़ी को क्लीन चिट दे दी। विवादों के बावजूद, एशियन एथलेटिक्स एसोसिएशन ने 2015 में उन्हें ‘प्रेसिडेंट्स अवॉर्ड’ से सम्मानित किया। 2016 में जब IOA ने उन्हें लाइफटाइम संरक्षक बनाया, तो भारी विवाद हुआ और अंततः उन्होंने खुद यह पद ठुकरा दिया। अपने जीवन के अंतिम वर्षों में, कांग्रेस नेता सुरेश कलमाड़ी खराब स्वास्थ्य के कारण सक्रिय राजनीति और सार्वजनिक चकाचौंध से पूरी तरह दूर हो गए थे।
पुणे की राजनीति और कलमाड़ी की विरासत
पुणे की राजनीति में कलमाड़ी को एक ‘पावरब्रोकर’ और रणनीतिकार के रूप में याद किया जाएगा। राज्य कांग्रेस उपाध्यक्ष मोहन जोशी के अनुसार, पुणे नगर निगम में कांग्रेस का पतन 2011 में कलमाड़ी के अवसान के साथ ही शुरू हुआ था। वह बदलते दौर में भी अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने की क्षमता के लिए जाने जाते थे। खेल प्रशासन से लेकर रेलवे और पुणे के सांस्कृतिक उत्सवों तक, उनके कार्यों की छाप लंबे समय तक रहेगी। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए उनके आवास पर रखा गया है, जहाँ शहर के गणमान्य व्यक्ति और समर्थक उन्हें अंतिम विदाई दे रहे हैं।
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