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डीके शिवकुमार का आरएसएस गान विवाद: राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया।

शिवकुमार आरएसएस गान विवाद

शिवकुमार आरएसएस गान विवाद कर्नाटक विधानसभा में बीते हफ़्ते एक अप्रत्याशित घटना हुई, जिसने पूरे राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया। भाजपा विधायक आर. अशोक ने बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ को लेकर सरकार पर हमला बोला। इसके जवाब में उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार ने अचानक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का प्रसिद्ध गान “नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमि” गा दिया।

उनका यह कदम भाजपा को चिढ़ाने के लिए था, लेकिन यह कांग्रेस के लिए उल्टा पड़ गया और एक बड़े शिवकुमार आरएसएस गान विवाद में बदल गया।

कांग्रेस में गुटबाज़ी हुई उजागर

इस घटना के बाद कांग्रेस नेताओं के बीच गहरी मतभेद सामने आए।

  • समर्थन करने वाले: कुनिगल विधायक एच.डी. रंगनाथ ने कहा कि गान मधुर और देशभक्ति से प्रेरित है।
  • विरोध करने वाले: बी.के. हरिप्रसाद, सतीश जरकीहोली और के.एन. राजन्ना जैसे वरिष्ठ नेताओं ने इसे आरएसएस की विचारधारा का महिमामंडन बताया।
  • दिलचस्प टिप्पणी: मंत्री प्रियांक खड़गे ने हॉलीवुड फ़िल्म द गॉडफ़ादर का हवाला देते हुए कहा, “अपने दोस्तों को पास रखो, लेकिन अपने दुश्मनों को और भी करीब रखो।”

यह बयान कांग्रेस के भीतर वैचारिक और रणनीतिक असहमति को और उजागर करता है।

शिवकुमार का बचाव और माफ़ी

डी.के. शिवकुमार ने शुरुआत में अपने कदम का बचाव करते हुए कहा कि यह उनके शोध का हिस्सा था। उन्होंने बताया कि उन्होंने राजनीति और विभिन्न संगठनों पर लंबे समय तक अध्ययन किया है।

हालाँकि, तीखी आलोचना के बाद उन्होंने मंगलवार को माफ़ी माँग ली। उन्होंने कहा—

  • उनका मक़सद केवल भाजपा विधायकों को चिढ़ाना था।
  • किसी की भावना आहत करना उनका उद्देश्य नहीं था।
  • गांधी परिवार के प्रति अपनी वफ़ादारी दोहराते हुए उन्होंने कहा कि वे “जन्मजात कांग्रेसी हैं और कांग्रेसी ही मरेंगे।”
  • गांधी परिवार को “भगवान” और खुद को उनका “भक्त” बताया।

भाजपा का हमला और देशद्रोही मानसिकता का आरोप

शिवकुमार की माफ़ी पर भाजपा ने तीखा हमला बोला।

  • विपक्ष के नेता आर. अशोक ने सवाल उठाया कि अगर “नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमि” कहने के लिए माफ़ी माँगनी पड़े, तो कांग्रेस किसकी जयकार चाहती है—“भारत माँ की या इटली माँ की?”
  • भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर देशद्रोही मानसिकता रखने का आरोप लगाया।
  • उनका कहना था कि कांग्रेस “पाकिस्तान ज़िंदाबाद” के नारे लगाने वालों का बचाव करती है, लेकिन भारत माता के गान पर माफ़ी माँगती है।
  • अशोक ने यहाँ तक कहा कि अगर शिवकुमार में आत्मसम्मान होता, तो वे इस्तीफ़ा देते।

ऐतिहासिक और राजनीतिक संदर्भ

आरएसएस का यह गान 1930 के दशक से संगठन की पहचान है और शाखाओं में गाया जाता है। महात्मा गांधी की हत्या के बाद से कांग्रेस और आरएसएस के बीच गहरी वैचारिक खाई बनी रही है।

ऐसे में, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष द्वारा इस गान का उल्लेख करना स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े करता है। यह कदम कांग्रेस की विचारधारा और आंतरिक राजनीति पर गंभीर असर डालता है।

शिवकुमार आरएसएस गान विवाद सिर्फ़ एक विधानसभा की बहस से कहीं आगे निकल गया।

  • इसने कांग्रेस की गुटबाज़ी को उजागर किया।
  • भाजपा को कांग्रेस पर राष्ट्रवाद और निष्ठा को लेकर हमला करने का अवसर दिया।
  • और शिवकुमार को अपनी राजनीतिक निष्ठा बार-बार दोहराने की स्थिति में ला दिया।

यह विवाद साबित करता है कि भारतीय राजनीति में प्रतीक और प्रतीकात्मक कार्यवाही कितनी संवेदनशील होती है। एक गान से उपजा यह विवाद अब आने वाले समय में कर्नाटक कांग्रेस और राष्ट्रीय राजनीति दोनों पर असर डाल सकता है।

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