Loading Now

गोरेगांव गुब्बारा हादसा: लिफ्ट में हाइड्रोजन गैस बने आग का गोला, दो घायल

गोरेगांव गुब्बारा हादसा

मुंबई के पश्चिमी उपनगर गोरेगांव से एक ऐसी खौफनाक खबर सामने आई है जिसने रिहायशी इमारतों में सुरक्षा मानकों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। गोरेगांव गुब्बारा हादसा उस वक्त हुआ जब एक बहुमंजिला इमारत की लिफ्ट में रोजाना की तरह लोग आवाजाही कर रहे थे, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि एक गुब्बारे बेचने वाले की छोटी सी लापरवाही किसी की जान पर बन आएगी।

गोरेगांव वेस्ट में पेट्रोल पंप के सामने स्थित ‘अनमोल टावर्स’ नामक रिहायशी इमारत में यह डरावनी घटना घटी, जहां एक लिफ्ट के अंदर ले जाए जा रहे गुब्बारों के गुच्छे ने अचानक आग की लपटों का रूप ले लिया।

इस हादसे में लिफ्ट के भीतर मौजूद एक महिला और एक गुब्बारा बेचने वाला बुरी तरह झुलस गए हैं। यह पूरी घटना वहां लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरे में कैद हो गई है, जिसके विजुअल्स अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।

सीसीटीवी फुटेज में कैद हुआ खौफनाक मंजर: एक सेकंड में लिफ्ट बनी आग का दरिया

लिफ्ट के भीतर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज को जब फ्रेम दर फ्रेम देखा गया, तो घटना की गंभीरता साफ नजर आई। वीडियो की शुरुआत में सफेद शर्ट पहने एक महिला अपनी छोटी ट्रॉली बैग के साथ लिफ्ट में दाखिल होती है। वह अपने फ्लोर का बटन दबाती है और दरवाजे खुले रहने के दौरान किसी और के आने का इंतजार करती है।

तभी एक आदमी (राजू कुमार महतो) एक बड़ी पॉलिथीन की बोरी लेकर अंदर घुसने की कोशिश करता है, जिसमें एक दर्जन से अधिक गैस से भरे गुब्बारे ठुसे हुए थे। महिला शालीनता दिखाते हुए उसे जगह देने के लिए एक कोने में हट जाती है।

जैसे ही काले शर्ट वाला एक तीसरा युवक अंदर आने की कोशिश करता है, अचानक गुब्बारों के गुच्छे से एक तेज रोशनी निकलती है और पलक झपकते ही पूरा केबिन आग के गोले में तब्दील हो जाता है। कुछ सेकंड के लिए आग की लपटें इतनी तेज थीं कि कैमरे का व्यू पूरी तरह ढक गया।

इसे भी पढ़े : पुराना मुंबई बनाम आधुनिक मुंबई: पारले-जी फैक्ट्री का पुनर्विकास

भयानक विस्फोट और घायलों की चीख-पुकार: मौके पर मची अफरा-तफरी

विस्फोट इतना अचानक और तीव्र था कि लिफ्ट के अंदर मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। आग लगते ही महिला और गुब्बारा बेचने वाला घबराकर बाहर की ओर भागे। फुटेज में देखा जा सकता है कि गुब्बारा बेचने वाला राजू कुमार बाहर निकलते समय संतुलन खोकर लड़खड़ा जाता है।

वहीं, तीसरा आदमी जो अंदर आने वाला था, वह सौभाग्यशाली रहा कि धमाके के वक्त वह पूरी तरह अंदर नहीं था और बाल-बाल बच गया। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, इस गोरेगांव गुब्बारा हादसा में दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

घायलों की पहचान 21 वर्षीय छात्रा हिमानी गगन टापरिया और 25 वर्षीय राजू कुमार महतो के रूप में हुई है। हिमानी मूल रूप से गुजरात के सूरत की रहने वाली है और वह मुंबई में एक एडमिशन इंटरव्यू के लिए आई थी।

मेडिकल रिपोर्ट और चोटों की गंभीरता: छात्रा के हाथ, गर्दन और पेट झुलसे

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दोनों घायलों को तुरंत मेडिकल सहायता उपलब्ध कराई गई है। पीड़िता हिमानी टापरिया अनमोल टावर की 10वीं मंजिल पर अपनी मौसी के घर जा रही थी। धमाके की वजह से उसके दाहिने हाथ, गर्दन और पेट पर जलने के गहरे निशान आए हैं।

दूसरी ओर, गुब्बारा बेचने वाले राजू कुमार महतो का चेहरा आग की चपेट में आने से झुलस गया है। राजू अंधेरी पश्चिम का रहने वाला है और एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी में काम करता है।

हालांकि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई, लेकिन जिस तरह से आग ने लिफ्ट जैसे बंद और कम वेंटिलेशन वाले हिस्से को घेरा, वह किसी बड़े हादसे का संकेत था। दोनों घायलों का फिलहाल अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है।

इसे भी पढ़े : सेंट्रल रेलवे का तोहफा: हार्बर लाइन पर AC लोकल, यात्री नाराज

पुलिसिया कार्रवाई और लापरवाही का मामला: नियोक्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज

इस घटना के बाद गोरेगांव पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए जांच शुरू कर दी है। हिमानी टापरिया के बयान के आधार पर, पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

जांच में सामने आया कि राजू कुमार महतो जिस इवेंट मैनेजमेंट कंपनी के लिए काम करता था, उसके मालिक त्रिपुरारी कुमार जायसवाल ने उसे गुब्बारों को संभालते समय कोई भी सुरक्षा उपकरण या ट्रेनिंग नहीं दी थी।

पुलिस ने नियोक्ता के खिलाफ लापरवाही और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने का मामला दर्ज किया है। इसके साथ ही, यह भी पता चला है कि ये गुब्बारे अनमोल टावर के कमरा नंबर 1003 के निवासी अर्पित जैन ने मंगवाए थे।

पुलिस अब इस कोण से भी जांच कर रही है कि क्या रिहायशी परिसर में इस तरह की खतरनाक सामग्री ले जाने पर रोक के बावजूद सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किया गया।

हाइड्रोजन गैस का जानलेवा इस्तेमाल: सस्ते विकल्प ने दांव पर लगाई सुरक्षा

जांचकर्ता अब गुब्बारों में भरी गई गैस के प्रकार का पता लगाने के लिए फॉरेंसिक सैंपल ले रहे हैं। विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि स्टैंडर्ड हीलियम गैस ज्वलनशील नहीं होती और वह सुरक्षित मानी जाती है। हालांकि, मुनाफे के चक्कर में कई वेंडर हीलियम की जगह सस्ती और बेहद ज्वलनशील हाइड्रोजन गैस का इस्तेमाल करते हैं।

हाइड्रोजन गैस जरा सी चिंगारी, घर्षण या स्टैटिक बिजली (Static Electricity) के संपर्क में आते ही फट जाती है। गोरेगांव गुब्बारा हादसा भी इसी खतरनाक गैस के इस्तेमाल का परिणाम लगता है।

लिफ्ट जैसे बिजली से चलने वाले बंद स्थान में वेंटिलेशन की कमी और संभावित इलेक्ट्रिक स्पार्क ने इन गुब्बारों को एक बम की तरह सक्रिय कर दिया। पुलिस अब जले हुए गुब्बारों के मटीरियल का परीक्षण करा रही है ताकि पुष्टि हो सके कि इसमें प्रतिबंधित हाइड्रोजन का प्रयोग हुआ था।

लिफ्ट सुरक्षा और हाउसिंग सोसायटियों के लिए चेतावनी

इस रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना ने मुंबई की हाउसिंग सोसायटियों में सुरक्षा मानकों की पोल खोल दी है। अक्सर गैस सिलेंडर या रसायनों को पैसेंजर लिफ्ट में ले जाने पर पाबंदी होती है, लेकिन पार्टी डेकोरेशन के सामान और गुब्बारों को हानिरहित मानकर छोड़ दिया जाता है।

फायर सेफ्टी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि गोरेगांव गुब्बारा हादसा एक सबक है कि ऐसी वस्तुओं को लिफ्ट में ले जाना कितना जोखिम भरा हो सकता है।

इस हादसे के बाद मुंबई के कई रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स ने अपनी सुरक्षा गाइडलाइन की समीक्षा शुरू कर दी है। अब इवेंट डेकोरेटर्स और वेंडर्स की एंट्री के वक्त सख्त जांच की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे कोई ज्वलनशील सामग्री तो अंदर नहीं ले जा रहे हैं।

इसे भी पढ़े : मुंबई में पानी कटौती: 4 दिसंबर पानी कटौती से 14 वार्ड और कांदिवली प्रभावित

आम जनता के लिए जरूरी सावधानी: सुरक्षित समारोह के लिए रखें ध्यान

अधिकारियों और नागरिक प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी घरेलू कार्यक्रम या हल्दी सेरेमनी जैसे समारोहों के लिए गुब्बारा विक्रेताओं को हायर करते समय सावधानी बरतें। यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि गुब्बारे केवल अधिकृत सप्लायर से प्राप्त हीलियम गैस से भरे हों।

पूर्व में भी ऐसी घटनाएं देखी गई हैं, जैसे पिछले साल एक हल्दी सेरेमनी के दौरान एंट्री गन की चिंगारी से हाइड्रोजन गुब्बारे फट गए थे और दूल्हा-दुल्हन झुलस गए थे।

इसी तरह वियतनाम में केक की मोमबत्तियों के संपर्क में आने से गुब्बारे फटने की घटना हुई थी। गोरेगांव की यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि उत्सव की चीजें भी अगर सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर इस्तेमाल की जाएं, तो वे मौत का जाल बन सकती हैं।

इसे भी पढ़े : धारावी में भीषण आग: मुंबई धारावी हार्बर लाइन आग से ट्रेन सेवा ठप

Spread the love

Post Comment

You May Have Missed