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हरियाणा न्याय व्यवस्था: दलित आईएएस विधवा अमनीत का दमन

हरियाणा न्याय व्यवस्था

हरियाणा न्याय व्यवस्था के आईने में, यह घटना भारतीय लोकतंत्र के लिए एक काला धब्बा है। व्यवस्थागत दलित उत्पीड़न का यह मामला हरियाणा की भाजपा सरकार के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के नारे की पोल खोलता है, जब एक दलित आईएएस विधवा की आवाज को कुचलने के लिए सत्ता की तानाशाही दिखाई जा रही है।

सत्ता का अहंकार और विधवा का दमन: चंडीगढ़ में क्या हुआ?

मामला वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमनीत पी. कुमार से जुड़ा है, जो स्वयं 2001 बैच की अधिकारी हैं और दिवंगत आईपीएस अधिकारी वाई. पूरण कुमार की पत्नी हैं। पूरण कुमार, जो राष्ट्रपति मेडल प्राप्त अधिकारी थे, ने आत्महत्या कर ली थी। उनकी पत्नी अमनीत ने आरोप लगाया है कि इसके पीछे जातिगत उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना जिम्मेदार थी।

उन्होंने इस सच्चाई को उजागर करने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई, लेकिन चंडीगढ़ पुलिस ने उनके सेक्टर-24 ए स्थित घर को पूरी तरह घेर लिया, प्रभावी ढंग से उन्हें हाउस अरेस्ट कर दिया। यह कोई संयोग नहीं, बल्कि सत्ता की तानाशाही का खुला प्रदर्शन है, जहां एक विधवा की आवाज को कुचलने के लिए पुलिस को हथियार बनाया जा रहा है।

अमनीत को ‘कैद’ जैसा महसूस हो रहा है, क्योंकि पुलिस का घेराव उन्हें बाहर निकलने नहीं दे रहा। यह लोकतंत्र का गला घोंटना है।

सुसाइड नोट और एफआईआर: सबूतों से छेड़छाड़ के आरोप

पूरण कुमार की आठ पेज की ‘फाइनल नोट’, जिसे डाइंग डिक्लेरेशन माना जा रहा है, ने मामले की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। इस नोट में उन्होंने नौ सर्विंग आईपीएस, एक रिटायर्ड आईपीएस और तीन रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों के नाम लिए, जो पाँच साल से जातिगत भेदभाव, सार्वजनिक अपमान और प्रशासनिक उत्पीड़न के दोषी थे।

आईएएस अमनीत ने सीधे तौर पर डीजीपी शत्रुजीत सिंह कपूर और रोहतक एसपी नरेंद्र बिजरनिया के खिलाफ एफआईआर की मांग की। लेकिन, चंडीगढ़ पुलिस ने एफआईआर नंबर 156/2025 में नामों को अस्पष्ट रखा और एससी/एसटी एक्ट के सेक्शन को भी ‘डाइल्यूट’ कर दिया।

अमनीत की शिकायत में नामजद कपूर और बिजरनिया को ‘सभी नामित’ कहकर छिपा दिया गया। इन बातों से यह साफ दिखता है कि सिस्टम आरोपी अधिकारियों को बचाने के लिए प्रशासन सबूतों से छेड़छाड़ कर रहा है, जबकि अमनीत को लगातार धमकियां मिल रही हैं। हरियाणा न्याय व्यवस्था पर यह सीधा सवाल है कि क्या वह उच्चाधिकारियों के दबाव में काम कर रही है?

पूरण कुमार को मंदिरों से बाहर किया गया, उनके पिता के बीमार होने पर छुट्टी तक नहीं दी गई, और अंत में उन्हें झूठी एफआईआर से फंसाने की साजिश रची गई।

मुख्यमंत्री से मुलाकात और पुलिस की चुप्पी

अमनीत कुमार ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मिलकर आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, निलंबन और अपने परिवार की सुरक्षा की मांग की। लेकिन, जवाब में क्या मिला? दिवंगत आईपीएस अधिकारी की विधवा को हाउस अरेस्ट करना और प्रेस कॉन्फ्रेंस को रोकना। नायब सिंह सैनी, आपकी सरकार का यह रवैया दलित समुदाय के लिए अपमानजनक है।

अमनीत ने यह भी बताया कि परिवार द्वारा न्याय की शर्त रखने के कारण पोस्टमॉर्टम को भी 60 घंटे से ज्यादा लटका दिया गया। एफआईआर में सेक्शन 3(2)(v) एससी/एसटी एक्ट की मांग को नजरअंदाज किया गया, और अमनीत को फ़ाइल नोटिंग की कॉपी तक नहीं दी गई।

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सैनी को पत्र लिखा, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। अमनीत की बेटियां डर में जी रही हैं, और सिस्टम की चुप्पी व्यवस्थागत अपराध को बढ़ावा दे रही है।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी प्रशासन में दलित और ओबीसी अधिकारियों की सीमित भागीदारी का मुद्दा उठाते हैं, पर जो भी सीमित अधिकारी प्रशासन में मौजूद हैं, वे बीजेपी सरकारों में व्यवस्थागत जातीय उत्पीड़न के शिकार हैं। पहले इन्हें जातीय उत्पीड़न से सुरक्षित करना ज़रूरी है।

सोशल मीडिया पर #JusticeForAmneet ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग पूछ रहे हैं कि जहाँ आईपीएस अधिकारी जैसों को ही न्याय के लिए आत्महत्या करने को मजबूर होना पड़ रहा हो, तो वहां आम आदमी का क्या होगा? हरियाणा न्याय व्यवस्था की यह मिलीभगत शर्मनाक है।

भाजपा की यह तानाशाही रवैया सिर्फ अमनीत तक सीमित नहीं है, यह पूरे दलित और पिछड़े वर्ग के खिलाफ है। अब एक एसआईटी गठित हुई है, लेकिन क्या यह निष्पक्ष होगी जब आरोपी हरियाणा के टॉप अधिकारी हैं?

यह समय है कि विपक्ष और सिविल सोसाइटी आवाज़ उठाए, वरना भाजपा का यह ‘दमन मॉडल’ पूरे देश में फैल रहा है। सैनी जी, आपको शर्म आनी चाहिए आपका डर सच्चाई उजागर होने का है, वरना एक विधवा को क्यों दबाया जा रहा?

यह सत्ता का अहंकार है जो सिस्टम को सड़ाने पर तुला है। हरियाणा न्याय व्यवस्था पर से लोगों का भरोसा उठता जा रहा है।

न्याय की मांग: अमनीत कुमार का संघर्ष

आईपीएस वाई. पूरण कुमार की पत्नी आईएएस अमनीत कुमार का संघर्ष हर उस व्यक्ति का है जो सत्ता के जुल्म के आगे झुकने से इंकार करता है।

सैनी सरकार, अगर आपको लोकतंत्र में यकीन है, तो अमनीत कुमार के प्रेस कॉन्फ्रेंस पर पुलिस की बंदिश मत लगाओ, उसे देश की जनता को बताने दो कि उसके पति के साथ क्या क्या हुआ, आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार करो, और सच्चाई सामने लाओ। अन्यथा, यह घटना भाजपा के ‘असली और भयावह चेहरे’ को बेनकाब करेगी, सांप्रदायिकता के अलावा जातिवाद, भ्रष्टाचार और दमन का भी। समाज जागेगा, न्याय होकर रहेगा, इसके लिए जनता को सड़क पर ही क्यों उतरना पड़े, चाहे देर से ही सही!

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