हिमंता सरमा का बड़ा दांव, कांग्रेस नेताओं पर ठोक दिया 500 करोड़ का केस
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए मंगलवार को 500 करोड़ का केस दर्ज कराया है। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता जितेंद्र सिंह, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और असम कांग्रेस के प्रमुख गौरव गोगोई के खिलाफ मानहानि का दावा करते हुए गुवाहाटी की अदालत का दरवाजा खटखटाया है।
सरमा ने आरोप लगाया कि पिछले हफ्ते गुवाहाटी में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इन नेताओं ने उनके खिलाफ सरासर झूठे, दुर्भावनापूर्ण और उनकी छवि को धूमिल करने वाले आरोप लगाए।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर स्पष्ट किया कि उन्होंने ₹500 करोड़ के हर्जाने के लिए यह सिविल मानहानि का केस किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘हिट-एंड-रन पॉलिटिक्स’ का दौर अब खत्म हो गया है और विरोधियों को अपने दावों को अदालत में साबित करना होगा।
कांग्रेस की ‘जांच’ और 12,000 बीघा जमीन कब्जाने का गंभीर आरोप
इस कानूनी लड़ाई की शुरुआत 4 फरवरी को हुई जब असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) ने “Who Is HBS” नाम से एक वेबसाइट और एक पैम्फलेट लॉन्च किया। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने दावा किया कि उनकी पार्टी की जांच से पता चला है कि मुख्यमंत्री और उनके परिवार ने राज्यभर में लगभग 12,000 बीघा (करीब 4,000 एकड़) जमीन पर कब्जा कर रखा है।
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि खेती की जमीन को औद्योगिक उपयोग में बदलने के लिए नियमों में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया गया। भूपेश बघेल ने भी इन आरोपों को दोहराते हुए कहा कि सरमा की संपत्ति की घोषणाओं में पिछले कुछ सालों में गंभीर विसंगतियां रही हैं, जो पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़ा करती हैं।
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कोर्ट रूम में शिफ्ट हुआ चुनावी मैदान: मानहानि बनाम भ्रष्टाचार के आरोप
जैसे-जैसे अप्रैल में होने वाले 126 सदस्यीय असम विधानसभा चुनाव करीब आ रहे हैं, राजनीतिक लड़ाई रैलियों से निकलकर पुलिस थानों और अदालतों तक पहुंच गई है। हिमंता बिस्वा सरमा द्वारा किया गया यह 500 करोड़ का केस इसी रणनीतिक बदलाव का हिस्सा है। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस विधायक दल के नेता देबब्रत सैकिया के खिलाफ भी सिविल और क्रिमिनल कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
सरमा ने कहा कि वे गांधी परिवार के ‘गुलामों’ के प्रोपेगैंडा से नहीं डरेंगे। कामरूप जिला सिविल कोर्ट में शुरू हुई इस कार्रवाई पर असम के एडवोकेट जनरल देवजीत सैकिया ने पुष्टि की है कि मामला फाइलिंग के अंतिम चरण में है और जल्द ही डिस्ट्रिक्ट सिविल जज के सामने पेश किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी मांग की है कि कांग्रेस नेता अपने गैर-जिम्मेदाराना बयानों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
AI वीडियो विवाद और ‘पॉइंट ब्लैंक शॉट’ पर पुलिस शिकायत
जहाँ एक तरफ मुख्यमंत्री ने मानहानि का दांव चला, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी कानूनी जवाबी हमला किया है। APCC ने दिसपुर पुलिस स्टेशन में भाजपा और मुख्यमंत्री के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। कांग्रेस का आरोप है कि गौरव गोगोई को बदनाम करने और धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का गलत इस्तेमाल किया गया।
शिकायत के अनुसार, भाजपा द्वारा साझा किए गए एक अब डिलीट हो चुके वीडियो में मुख्यमंत्री को कथित तौर पर मुसलमानों पर करीब से गोली चलाते हुए दिखाया गया था। वीडियो में “विदेशी-मुक्त असम” और “आप पाकिस्तान क्यों नहीं गए?” जैसे भड़काऊ संदेशों का इस्तेमाल किया गया था, जिसे कांग्रेस ने सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाला और सांप्रदायिक बताया।
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हिमंता सरमा की खरी-खरी: ‘गोरा गोरा है, काला काला है’
विपक्ष की पुलिस शिकायतों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा अपने रुख पर अडिग नजर आए। उन्होंने कहा, “यह अच्छा है कि उन्होंने केस दर्ज किया है। कम्युनल का क्या मतलब है? आप सब जानते हैं कि मैं किसके खिलाफ हूं।” उन्होंने आगे कहा कि उन्हें डराया नहीं जा सकता, चाहे राहुल गांधी खुद उनके खिलाफ केस कर दें। सरमा ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि उनके लिए ‘गोरा गोरा है और काला काला है’।
हालांकि, जिस वीडियो को लेकर विवाद हुआ था, उसे भारी राजनीतिक प्रतिक्रिया के बाद सोशल मीडिया से हटा दिया गया। मुख्यमंत्री ने सोमवार को इस वीडियो के बारे में किसी भी तरह की जानकारी होने से इनकार किया था, लेकिन वे अपने विरोधियों को अदालत में घसीटने के फैसले पर डटे रहे।
पाकिस्तान कनेक्शन और व्यक्तिगत हमलों की नई सीरीज
यह राजनीतिक घमासान तब और व्यक्तिगत हो गया जब मुख्यमंत्री ने गौरव गोगोई के पाकिस्तान से कथित संबंधों का आरोप लगाया। सरमा ने दावा किया कि गोगोई, उनकी ब्रिटिश पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न और एक पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख के बीच “गहरा कनेक्शन” है और उन्होंने खुफिया जानकारी साझा करने के आरोप भी लगाए। इस पर कांग्रेस नेता जितेंद्र सिंह ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं।
उन्होंने याद दिलाया कि दिवंगत तरुण गोगोई ने ही सरमा को राजनीति में सम्मान दिया और मंत्री बनाया, लेकिन अब सरमा उसी परिवार को बदनाम करने के लिए आधारहीन कैंपेन चला रहे हैं। 500 करोड़ का केस इसी तनावपूर्ण पृष्ठभूमि का नवीनतम अध्याय है।
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संपत्ति विवाद पर कांग्रेस का विरोध और ईडी जांच की मांग
कांग्रेस की महिला विंग की अध्यक्ष मीरा बोरठाकुर ने मुख्यमंत्री के बदलते बयानों पर सवाल उठाते हुए गुवाहाटी में विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पहले दावा करते थे कि उनकी कोई प्रॉपर्टी नहीं है, लेकिन बाद में उन्होंने खुद स्वीकार किया कि उनकी पत्नी के पास 12,000 या शायद 24,000 बीघा जमीन हो सकती है। कांग्रेस ने पूछा है कि अगर सब कुछ कानूनी है, तो क्या इनकम टैक्स और प्रवर्तन निदेशालय (ED) मुख्यमंत्री की पत्नी की जांच करेंगे?
कांग्रेस नेताओं ने डिजिटल प्लेटफॉर्म whoishbs.com को इसी जवाबदेही को बढ़ावा देने का जरिया बताया। इसी बीच, सरमा ने गुवाहाटी के अखबार ‘असोमिया प्रतिदिन’ के खिलाफ भी मानहानि की कार्रवाई शुरू की है, जिसने कांग्रेस के आरोपों को प्रमुखता से छापा था।
2026 चुनाव से पहले असम में ‘पॉलिटिकल कॉलोनाइजेशन’ का आरोप
कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता गोपाल सरमा ने भाजपा पर 2026 के चुनावों से पहले असम में राजनीति का “सबसे बुरा औपनिवेशीकरण” (Colonization) करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस का मानना है कि 500 करोड़ का केस केवल विपक्ष की आवाज दबाने का एक जरिया है। दूसरी तरफ, भाजपा का तर्क है कि गौरव गोगोई और अन्य नेताओं ने व्यक्तिगत छवि खराब करने के लिए बिना किसी सबूत के वेबसाइट लॉन्च की।
चुनाव आयोग द्वारा तारीखों के एलान से पहले ही असम का चुनावी माहौल नोटिसों और याचिकाओं से भर गया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अदालत में कांग्रेस के नेता 12,000 बीघा जमीन के अपने दावों को साबित कर पाते हैं या मुख्यमंत्री सरमा को मानहानि के रूप में भारी हर्जाना मिलता है।
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